लालची बीसीसीआई को चेतावनी | खेल | DW | 14.11.2012
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खेल

लालची बीसीसीआई को चेतावनी

अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेसियों ने भारत-इंग्लैंड सीरीज के बहिष्कार की चेतावनी दी है. बीसीसीआई की एक करतूत से समाचार एजेंसियां नाराज है. बीसीसीआई पर प्रेस की आजादी पर हमला करने के आरोप लग रहे हैं.

द न्यूज मीडिया कोएलिशन (एनएमसी) ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड से कहा है कि वह स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसियों से पाबंदी हटाए. एनएमसी के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर एंड्र्यू मॉगर का कहना है, "बीसीसीआई ने प्रस्ताव दिया है कि वह खुद तस्वीरें लेगी और हमें मुहैया कराएगी लेकिन यह स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रेस फोटोग्राफी का विकल्प नहीं है."

एनएमसी के सदस्यों में रॉयटर्स, एएफपी और एपी जैसी न्यूज एजेंसियां हैं. फोटो एजेंसी गेटी इमेज और ब्रिटेन्स प्रेस एसोसिएशन भी एनएमसी में हैं. इनमें से ज्यादातर एजेंसियों का कहना है कि अगर बीसीसीआई ने अपना फरमान वापस नहीं लिया तो वह सीरीज के बारे न तो रिपोर्ट लिखेंगे और न ही फोटो जारी करेंगे. मॉगर ने कहा, "कई संभावनाओं के बावजूद बीसीसीआई को अभी भी यह सफाई देनी है कि वह फोटो एजेंसियों के साथ भेदभाव क्यों कर रही है."

बयान में यह भी कहा गया है, "एक अंतरराष्ट्रीय संगठन, एनएमसी स्वतंत्र समाचार सामग्री के जरिए जनता को सूचना देने की प्रेस की योग्यता की रक्षा करेगी." बीसीसीआई एक बार पहले भी इसी तरह की हरकत कर चुकी है. उस वक्त भारतीय मीडिया के कड़े विरोध के बाद बीच का रास्ता निकाला गया.

भारतीय संविधान के तहत भी प्रेस को आजादी दी गई है. प्रेस के जरिए सूचना पाना जनता का अधिकार है लेकिन बीसीसीआई शायद ऐसा नहीं सोचती. अरबपति बोर्ड क्रिकेट को खेल से ज्यादा पैसा कमाने का उद्योग मानता है.

दो साल पहले आईपीएल में वित्तीय धांधली का मामला सामने आया. जांच बीसीसीआई ने खुद की. आईपीएल के तत्कालीन कमिश्नर ललित मोदी को बाहर निकाल दिया गया. इसके बाद धांधली से संबंधित कोई रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई. बीसीसीआई ने कभी यह नहीं बताया कि जांच में और कौन कौन दोषी पाए गए या जांच रिपोर्ट का नतीजा क्या निकला.

यह बात किसी से छुपी नहीं है कि जब पिछले साल खेल मंत्री अजय माकन ने बीसीसीआई को नियमों के दायरे में बांधने की कोशिश की तो भारतीय संसद में जोरदार हंगामा हुआ. बीसीसीआई से जुड़े एनसीपी के शरद पवार, कांग्रेस के राजीव शुक्ला और बीजेपी के अरुण जेटली ने मिलकर माकन के खेल अध्यादेश का विरोध किया.

अब साल भर बाद बीसीसीआई ने फिर नया विवाद खड़ा कर दिया है. न्यूज एजेंसियों को कवरेज का अधिकार नहीं दिया गया तो गुरुवार से अहमदाबाद में खेले जा रहे पहले टेस्ट मैच की रिपोर्टें और तस्वीरें आम लोगों तक आसानी से नहीं पहुंच सकेंगी.

ओएसजे/एनआर (रॉयटर्स)

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