लड़ाई अफ़ग़ानिस्तान में, ट्रेनिंग जर्मनी में! | दुनिया | DW | 23.04.2010
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दुनिया

लड़ाई अफ़ग़ानिस्तान में, ट्रेनिंग जर्मनी में!

जर्मनी की मुख्य विपक्षी पार्टी एसपीडी का कहना है कि अफ़ग़ान पुलिसकर्मियों को ट्रेनिंग अफ़ग़ानिस्तान में देने के बजाए जर्मनी में देनी चाहिए. लेकिन एसपीडी के इस विचार ने आलोचनाओं के साथ नई बहस छे़ड़ दी है.

जर्मन गृहमंत्री थोमास दे मेज़िएरे (दांए)

जर्मन गृहमंत्री थोमास दे मेज़िएरे (दांए)

नैटो सेनाएं अफ़ग़ानिस्तान की पुलिस को आत्मनिर्भर बनाना चाहती हैं और इसके लिए उन्हें ट्रेनिंग देना ज़रूरी है, पर अफ़ग़ानिस्तान से दूर जर्मनी में एक बिल्कुल अलग माहौल में प्रशिक्षण देने के एसपीडी के विचार ने असमंजस खड़ा कर दिया है.

इस बारे में जर्मनी के आतंरिक मामलों के मंत्री थोमास दि मेज़ियेर को एसपीडी के एक वरिष्ठ नेता एयहार्ट कौएर्टिंग ने ख़त लिखा है. ख़त में कहा गया है कि अफ़गान पुलिसकर्मियों को जर्मनी बुलाकर ट्रेनिंग देने की योजना काफ़ी समय से लंबित पड़ी है. कौएर्टिंग ने सुझाव दिया है कि ट्रेनिंग के लिए जर्मन शहर म्युंस्टर का नैशनल पुलिस कॉलेज एकदम ठीक स्थान रहेगा. एसपीडी नेता का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान के ख़तरनाक माहौल से कहीं ज़्यादा अच्छी ट्रेनिंग जर्मनी के अन्य कई राज्यों में दी जा सकती है. अफ़ग़ानिस्तान में हाल के समय में पुलिस ट्रेनिंग सेंटरों पर आतंकवादी हमले बढ़े हैं. वहां काम कर चुके पूर्व जर्मन ट्रेनर ग्युंटर अलब्रेश्त कहते हैं, ''मैं भाग्यशाली था कि मैं तालिबान के हमले का शिकार नहीं बना. दो बार ऐसे मौक़े आए जब तालिबान ने हमारे साथियों पर हमला किया और मैंने भागकर अपनी जान बचाई. जो कुछ आप वहां देखते हैं उससे पता चलता है कि हमारे पुलिस ट्रेनर रोज़ किस ख़तरे का सामना करते हैं.''

जर्मनी की पुलिस यूनियन के यैर्ग रादेक भी ट्रेनिंग के नए प्रस्ताव से सहमत दिखते हैं. वह कहते हैं, ''अगर आप अफ़ग़ानिस्तान के इलाकों में बख़्तरबंद गाड़ी में सवार होकर आस पास देंखेंगे, तो आपको पता चलेगा कि वहां पुलिस ट्रेनिंग का तो कोई काम ही नहीं है. यह सैनिक रणभूमि है. इस तरह की स्थिति को तो सेना को ही संभालना चाहिए, हमें नहीं.''

लेकिन, कई लोगों की राय इससे बिल्कुल अलग है. उनका कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान के असल माहौल से दूर जर्मनी में आख़िर कैसे पुलिसकर्मियों को अच्छी ट्रेनिंग दी जा सकती है. सरकार की गठबंधन पार्टी एफ़डीपी भी यही मानती है. जर्मनी के पूर्व सेनाध्यक्ष हाराल्ड कूयात कहते हैं, ''योजना के मुताबिक ट्रेनिंग के दौरान पुलिसकर्मियों और ट्रेनरों को आस पास के गावों और लोगों के बीच में जाना है. यह नई रणनीति का हिस्सा है कि ट्रेनिंग किसी कैंप के दूरस्थ इलाके में नहीं दी जाएगी. मैं इसे बेहद अहम मानता हूं कि असल ज़मीन पर स्थानीय लोगों के बीच में हमें वह भरोसा भी हासिल करने का मौक़ा मिलेगा जो बीते कुछ बरसों में हमने खोया है.''

अमेरिका चाहता है कि नैटो में शामिल देश अफ़ग़ानिस्तान के एक लाख चौंतीस हज़ार पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण देने के लिए 2000 अतिरिक्त पुलिस अधिकारी भेजें. अमेरिका के मुताबिक ट्रेनिंग का कार्यक्रम 2011 तक पूरा हो जाना चाहिए, उसी साल वहां से अंतरराष्ट्रीय सेनाओं की वापसी शुरू होनी है. जर्मनी को इस ट्रेनिंग के लिए 200 ट्रेनर भेजने हैं. लेकिन, फिलहाल तो बहस हो रही है और वह भी अफ़ग़ानिस्तान से हज़ारों किलोमीटर दूर.

रिपोर्ट: ओ सिंह

संपादन: राम यादव

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