रोने वाले खिलाड़ियों के लिए मनोचिकित्सकों की मदद | वर्ल्ड कप 2014 | DW | 02.07.2014
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वर्ल्ड कप

रोने वाले खिलाड़ियों के लिए मनोचिकित्सकों की मदद

चिली के साथ मुकाबले के बाद मैदान में नेमार समेत कई ब्राजीलियाई खिलाड़ियों के आंसू छलक आने से नेशनल फेडरेशन काफी चिंता में पड़ गया है.

अपने देश में विश्व कप जीतने के दबाव में खेल रहे ब्राजीलियाई खिलाड़ियों की मदद के लिए उन्होंने अब विशेषज्ञों की मदद ली है.

शुक्रवार को होने वाले क्वार्टर फाइनल राउंड में कोलंबिया की टीम को टक्कर देने के लिए ब्राजील अपने खेल के साथ साथ मानसिक शक्ति बढ़ाने पर भी काम कर रहा है. चिली से मुकाबले के दौरान पेनाल्टी शूटआउट में दो के मुकाबले तीन गोल दागकर जीत दर्ज करने वाली ब्राजीलियाई टीम की भावनात्मक प्रतिक्रिया से ब्राजील में काफी लोग परेशान हैं. मैदान में ही नेमार, जूलियो सेजार और टियागो सिल्वा जैसे कई ब्राजीली खिलाड़ी रोते हुए दिखे थे. ऐसे में मशहूर मनोचिकित्सक को ब्राजीलियाई खिलाड़ियों की मदद के लिए बुलाया गया है. ब्राजीलियन फुटबॉल फेडरेशन ने रेजीना ब्रांडाओ को जीत का भारी दबाव झेल रहे खिलाड़ियों को सही सलाह देने के लिए नियुक्त किया है. मंगलवार को ब्रांडाओ ने रियो डी जेनेरो में टीम से मुलाकात की.

शनिवार के मैच के बाद मीडिया में इस विषय पर खास चर्चा हो रही है कि क्या ब्राजीलियाई टीम भावनात्मक रूप से असंतुलित है. मंगलवार को रिजर्व कीपर विक्टर ने इन आशंकाओं का खंडन करते हुए कहा, "हमारे खिलाड़ी विश्व कप को बहुत गंभीरता से लेते हैं जिसके कारण कई बार रो भी पड़ते हैं लेकिन मुझे नहीं लगता कि यह कोई नकारात्मक बात है." चेल्सी क्लब के लिए खेलने वाले ब्राजीलियाई मिडफील्डर रामिरेज ने मीडिया में इस बात को जरूरत से ज्यादा तवज्जो दिए जाने की शिकायत भी की. रामिरेज ने कहा कि वे चैंपियंस लीग के मैचों में पहले भी कई खिलाड़ियों को रोते हुए देख चुके हैं.

ब्राजीलियाई टीम की ओर से दिए जा रहे तमाम स्पष्टीकरणों के बावजूद कई ब्राजीलियाई फैन काफी चिढ़ गए हैं. पिछले कई दिनों से टेलीविजन पर खिलाड़ियों के रोने वाले दृश्यों को बार बार दोहराया जा रहा है. रियो डी जेनेरो की एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करने वाले फर्नांडो डियास ने समाचार एजेंसी डीपीए से बातचीत में कहा, "यह बेवकूफ रोना बंद करके गोल करना कब शुरू करेंगे?" 52 साल के डियास आगे कहते हैं, "यह लोग महीने के बीस लाख रियाल (करीब 9 लाख डॉलर) कमाते हैं. अगर मैं इतना कमाता तो मेरी ट्रेन क्रैश हो जाने पर भी मैं हंसता रहता." डियास की तरह ही कई पुराने खिला़ड़ी भी रोना धोना देखकर खीजे हुए हैं. 1970 में अपनी कप्तानी में ब्राजील को विश्व कप जिताने वाले रिटायर्ड मिडफील्डर कार्लोस अल्बर्टो टोरेस ने एक ब्राजीलियाई अखबार 'एक्स्ट्रा' से बातचीत में कहा है, "यह टीम तब रोती है जब वे देश का राष्ट्रगान गाते हैं, जब इन्हें चोट लगती है या जब पेनाल्टी शूट करते हैं... बस बहुत हुआ!"

आरआर/एएम (डीपीए)

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