रेप के आरोप में हर 4 घंटे में एक नाबालिग गिरफ्तार | दुनिया | DW | 25.10.2017
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दुनिया

रेप के आरोप में हर 4 घंटे में एक नाबालिग गिरफ्तार

पिछले तीन सालों से भारत में हर चार घंटे में एक नाबालिग को रेप के आरोप में गिरफ्तार किया जा रहा है.

भारत में हर चार घंटे में बलात्कार और हर दो घंटे में छेड़खानी के आरोप में कोई ना कोई नाबालिग गिरफ्तार होता है. केंद्रीय मंत्रालय के हाल के आंकड़ों के साल 2016 में 1 जनवरी से 31 दिसंबर के बीच 2054 नाबालिगों को रेप और 1624 नाबालिगों को छेड़खानी के मामले में गिरफ्तार किया गया.

पिछले तीन सालों से नाबालिगों के इन अपराधों में कमी नहीं हो पा रही है. साल 2014 के आंकड़ों को देखें तो 1 जनवरी से लेकर 31 दिसंबर के बीच 6039 गिरफ्तारियां की गई थीं. नेशनल क्राइम रेकॉर्ड ब्यूरो इन ताजा आंकड़ों से 2016 और 2017 की वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगा.

हालांकि, पूरे आंकड़ों से इतर छेड़खानी के मामलों में 2014 की तुलना में 2016 में वृद्धि हुई है. इस मामले में बंगलौर विश्वविद्यालय के समाजशास्त्री समता देशमैन कहते हैं कि यह सिर्फ सामाजिक नहीं मनोवैज्ञानिक समस्या भी है. यह दोषपूर्ण समाजीकरण है, जिससे लोगों को महिलाओं को ऐसे तरीके से देखने की इजाजत मिलती है, जो उन्हें चोट पहुंचाने, या उन पर किसी भी तरीके से हमला करने के लिए प्रोत्साहित करती है. दूसरे मनोवैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि सेक्स शिक्षा का अभाव और इस विषय पर बात न करना भी नाबालिगों को कुंठा से भर देता है.

महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले

2015 में भारत में महिलाओं से बलात्कार के 34651 मामले सामने आए थे. इसी तरह 2015 में बलात्कार के प्रयास के 4434 मामले दर्ज किये गये थे. 2014 में इस तरह के 4232 मामले सामने आये थे. 2014 की तुलना में इन आंकड़ों में बढ़ोत्तरी दर्ज की गयी.

छेड़खानी के मामलों का आंकड़ा काफी बड़ा है. साल 2015 में महिलाओं से छेड़खानी के 82,422 मामले दर्ज हुए. इसमें तेज वृद्धि हुई है. यह आंकड़ा 2011 में 42,968 मामलों का था.

दहेज के चलते हुई मौतों का आंकड़ा 2015 में 7,634 था. 2014 में दहेज के चलते मौतों के 8455 मामले दर्ज हुए थे. इस कमी के बावजूद हर साल महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा के आंकड़े बढ़ ही रहे हैं.

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