रूस में इलाज को तरसेंगे क्रीमियाई | दुनिया | DW | 22.03.2014
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दुनिया

रूस में इलाज को तरसेंगे क्रीमियाई

क्रीमिया के रूस में मिलने के साथ हजारों मरीजों की जिंदगी दांव पर लग गई है. नशे के लती इन मरीजों का एक खास इलाज किया जाता है, जिस पर रूस में पाबंदी है. संयुक्त राष्ट्र ने इस पर चिंता जताई है.

ओएसटी पर पाबंदी

संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधि मिचेल कजाचकिन ने चिंता जाहिर की है कि इन लोगों को दिया जाने वाला ओपीडियम सब्स्टिट्यूशन थेरेपी (ओएसटी) का इलाज रुक जाने से एचआईवी का खतरा बढ़ जाएगा. उन्होंने कहा, "जाहिर है मुझे इस बात की फिक्र है कि जिन लोगों को ओएसटी से फायदा हुआ है उन्हें इसके न मिल पाने से झटका लगेगा. ओएसटी रूस में प्रतिबंधित है. क्रीमिया के रूस में शामिल हो जाने पर यह कार्यक्रम आगे कैसे चलेगा, मुझे समझ नहीं आ रहा है."

क्रीमिया के करीब 14000 ऐसे मरीज हैं जो इससे प्रभावित हो सकते हैं. फिलहाल क्रीमिया के 800 मरीज ओएसटी पर निर्भर हैं. ये ऐसे मरीज हैं जो हेरोइन जैसे नशे के आदी हैं और उन्हें डॉक्टरों की देख रेख में सीमित मात्रा में मेथाडोन और बूप्रीनॉर्फीन की खुराक दी जाती है. ओएसटी न मिलने पर वे दोबारा सूई का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे एचआईवी का भारी खतरा है.

एचआईवी के खिलाफ काम कर रहे संगठन इंटरनेशनल एचआईवी/एड्स अलायंस के अनुसार, "क्रीमिया में मेथाडोन और बूप्रीनॉर्फीन (ओएसडी के लिए जरूरी तत्व) का स्टॉक बस कुछ हफ्ते और चलेगा." संगठन के मुताबिक क्रीमिया से जोड़ने वाले रास्ते बंद होने के कारण मेडिकल सप्लाई का पहुंचना मुश्किल होगा और इससे चुनौतियां पैदा होने की आशंका है.

कई खतरे

एड्स विशेषज्ञों का मानना है कि नशे के लती लोगों के साथ सख्ती से पेश आना कई बार ज्यादा खतरनाक होता है. उन्हें अलग नजर से देखा जाता है, जेल भेज दिया जाता है. ऐसे में वे नशा तो नहीं छोड़ते लेकिन गलत तरीकों से नशा करने के चक्कर में खुद को एचआईवी संक्रमित कर लेते हैं और दूसरों तक भी पहुंचा देते हैं. ओएसटी का इलाज रुकने पर उन्हें दोबारा तलब होगी और मुमकिन है वे संक्रमित सूई के इस्तेमाल जैसे पुराने तरीके अपनाएं, जिससे एचआईवी का खतरा रहता है. इसके अलावा जल्द से जल्द नशा पाने के चक्कर में वे ड्रग तस्करों के हाथ में फंस सकते हैं, अपराध करने को मजबूर हो सकते हैं या ड्रग खरीदने के लिए सेक्स कारोबार में पड़ सकते हैं.

यूक्रेन में एचआईवी के खिलाफ कई कार्यक्रम हैं जो इन सब चुनौतियों को दूर रखते हैं, जैसे नई सूइयों और कॉन्डोम का वितरण और एचआईवी टेस्ट. वहीं रूस में एचआईवी के कुल मामलों में से 80 फीसदी मामले ड्रग इंजेक्शन लेने वालों के हैं.

यूक्रेन के राजनैतिक नियंत्रण के दौरान क्रीमिया में पिछले करीब 10 साल से ओएसटी इलाज उपलब्ध रहा है. जहां 2006 में क्रीमिया में इंजेक्शन से ड्रग लेने वालों की संख्या 7127 थी वहीं पिछले साल यह संख्या घटकर 5847 हो गई.

बढ़ता संकट

यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रीवेंशन एंड कंट्रोल के मुताबिक 2011 के मुकाबले 2012 में पूर्वी यूरोप में एचआईवी के मामलों में नौ फीसदी बढ़ोत्तरी हुई है. 1,02,000 नए मामलों में से तीन चौथाई रूस में हैं. इसके अलावा विश्व स्वास्थ्य संगठन ने टीबी के मामलों में वृद्धि की भी चेतावनी दी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के टीबी कार्यक्रम के प्रमुख मारियो रेविलियोने ने कहा कि जब किसी देश पर राजनैतिक संकट आता है तो वहां की स्वास्थ्य एवं चिकित्सा व्यवस्था पर सबसे पहले असर पड़ता है. क्योंकि बजट का बड़ा हिस्सा सैन्य विभाग में खिसकने लगता है.

एसएफ/एजेए (एएफपी)