रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मिलेंगे उत्तर कोरिया के किम | दुनिया | DW | 23.04.2019
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दुनिया

रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मिलेंगे उत्तर कोरिया के किम

उत्तरी कोरियाई तानाशाह किम जॉन्ग उन ने पिछले सालों में कई सारे विदेशी नेताओं से मुलाकात की है. इनमें दक्षिणी कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन और अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के अलावा चीन के शी जिन पिंग भी शामिल हैं.

उत्तरी कोरिया और रूस की मीडिया रिपोर्टों के अनुसार किम जॉन्ग उन रूसी शहर व्लादिवोस्तोक में 25 अप्रैल को रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन से मिलेंगे. हालांकि इस मुलाकात को आर्थिक सहयोग बढ़ाने का प्रयास बताया जा रहा है, लेकिन यह ऐसे समय में हो रही है जब उत्तर कोरिया ने हाल ही में नया रॉकेट टेस्ट करने का दावा किया है. ये मुलाकात उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच वियतनाम में हुई मुलाकात के बाद हो रही है जिसमें कोई समझौता नहीं हो पाया था. अमेरिका ने अभी तक उत्तर कोरिया से प्रतिबंध भी नहीं हटाए हैं.

उत्तरी कोरिया की केंद्रीय न्यूज एजेंसी ने बताया कि पुतिन और किम की मुलाकात जल्द होगी लेकिन इसका समय नहीं बताया गया है. रूसी अखबार कॉमरसैंट ने कहा कि यह मुलाकात 25 अप्रैल को व्लादिवोस्तोक में होना तय हुआ है. रूसी सरकार के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि पुतिन और किम अप्रैल के अंत तक मुलाकात करने वाले हैं. किम के खास सलाहकार किम चांग सुन 21 अप्रैल को व्लादिवोस्तोक गए थे.

रूस पिछले कई सालों से उत्तरी कोरिया पर अपना परमाणु कार्यक्रम रोकने के लिए दबाव बनाता रहा है. रूस 2009 में इसके लिए हुई छह देशों अमेरिका, जापान, चीन, उत्तरी कोरिया और दक्षिण कोरिया की हुई बैठक में शामिल था. उत्तरी कोरिया की खबर रखने वाली एनके न्यूज ने अपनी वेबसाइट पर व्लादिवोस्तोक की उत्तरी फेडरल विश्वविद्यालय की तस्वीरें डाली हैं. यहां पर उत्तरी कोरिया और रूस के झंडे लगाए गए हैं. इसी जगह पर यह मुलाकात होना प्रस्तावित है.

दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय का कहना है कि रूस और उत्तरी कोरिया के बीच होने वाली इस मुलाकात में दोनों देशों के संबंधों के अलावा परमाणु कार्यक्रम पर रोक और क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी. प्रवक्ता किम इन चुल ने कहा कि रूस और हमारी सोच एक जैसी है. हम भी चाहते हैं कि कोरियाई प्रायद्वीप पूरी तरह से परमाणु मुक्त हो और यहां शांति कायम हो. दक्षिण कोरिया ने उम्मीद जताई है कि इस मुलाकात से एक सकारात्मक विकास का संकेत दिखेगा..

दरअसल हनोई समिट के असफल होने के बाद किम दूसरे देशों के बड़े नेताओं से संबंध बढ़ाने की लगातार कोशिश कर रहे हैं. वो अमेरिका या दक्षिणी कोरिया पर ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहते. पुतिन और किम की यह मुलाकात अगर सफल रहती है तो कहीं ना कहीं कोरियाई प्रायद्वीप पर रूस का दखल बढ़ेगा. साथ ही, उत्तरी कोरिया और रूस के संबंधों में घनिष्ठता आना अमेरिका को कूटनीतिक स्तर पर परेशानी देने वाला हो सकता है.

आरकेएस/एमजे (रॉयटर्स)

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