रुमाल बताएगा बीमारी | विज्ञान | DW | 26.08.2013
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विज्ञान

रुमाल बताएगा बीमारी

अगर आपका रुमाल आपसे कह रहा हो कि आप बीमार होने वाले हैं तो यह या तो बच्चों की फिल्मों की कल्पना लगती है, या किसी साइंस फैंटसी फिल्म की तस्वीर, लेकिन ऐसा संभव है.

जब कभी छींक आती है तो हम सोचते हैं कि जरूर कोई याद कर रहा होगा, लेकिन जब ये छींकें लगातार आने लगती हैं तब समझ आता है कि जुकाम लग गया है. हालांकि जुकाम को भी अधिकतर लोग संजीदगी से नहीं लेते और यह भी नहीं समझ पाते कि जुकाम और फ्लू में फर्क है.

फ्लू या फिर इन्फ्लुएंजा की शुरुआत तो जुकाम की ही तरह होती है, लेकिन इन्फ्लुएंजा का वायरस बहुत परेशान करता है. धीरे धीरे बुखार आता है, बदन टूटने लगता है और कमजोरी आने लगती है. इसके लिए जरूरी है कि मरीज को फ्लू की शुरुआत में ही पता चल जाए ताकि वह एहतियात बरत सके. ऐसे में आपका रुमाल आपकी मदद कर सकता है.

"लैब इन ए हैंकी"

छींकते हुए आप जिस टिशू पेपर का इस्तेमाल करेंगे वह कुछ इस तरह रंग बदलेगा कि आपको पहली छींक के साथ ही पता चल जाएगा कि आपको फ्लू हो गया है. जर्मनी में वैज्ञानिक इस तरह के टिशू पेपर को तैयार करने में लगे हैं. उन्होंने इसे नाम दिया है "लैब इन ए हैंकी", क्योंकि रुमाल में ही आपकी बीमारी की टेस्टिंग हो जाएगी.

यह कुछ वैसे ही काम करता है जैसे कि होम प्रेगनेंसी टेस्ट किट. अगर आपको फ्लू हुआ है तो रुमाल का रंग बदल जाएगा. वैज्ञानिक इस बात का ध्यान रख रहे हैं कि यह रंग लाल ना हो, नहीं तो लोग इसे खून भी समझ सकते हैं. बर्लिन के पास पोट्सडम में स्थित फ्राउनहोफर इंस्टीट्यूट के इंजीनियर फ्रांक बीयर बताते हैं कि रुमाल के पॉलिमर में एंटीबॉडी जैसे कण डाले जाएंगे जिनकी संरचना वायरस से संपर्क में आते ही बदल जाती है. इन पॉलिमर और कणों को आपस में कुछ इस तरह बांधा जा सकता है कि धागे या कपड़े का रूप ले सके. बीयर बताते हैं, "हमने कई चीजों के बारे में सोचा. प्लास्टर, सफाई करने वाला कपड़ा, लेकिन अंत में हमें रुमाल सबसे सही लगा. इस प्रोजेक्ट का नाम भी बहुत दिलचस्प है, हालांकि यह केवल रुमाल नहीं, बल्कि उस से कहीं बढ़ कर है".

Infografik Diagnostik mit Hygienetüchern Englisch

अगर आपको फ्लू हुआ है तो रुमाल का रंग बदल जाएगा.

सफाई की गारंटी

इस तकनीक का इस्तेमाल घरों और अस्पतालों में भी किया जा सकेगा. आप रुमाल की मदद से जान सकेंगे कि दफ्तर में आपकी काम करने की मेज पर कहीं कीटाणु तो नहीं है. इसी तरह अस्पताल में डॉक्टर ऑपरेशन करने से पहले सुनिश्चित कर सकते हैं कि औजार ठीक से स्टरलाइज हुए हैं या नहीं. बीयर बताते हैं, "इन दिनों सफाई बस ऊपरी सतह पर ही की जाती है. आप किसी डिसइन्फेकटेंट को कपड़े पर लगा कर सतह पोंछ लेते हैं और सोचते हैं कि सफाई हो गयी, लेकिन हमारे इस टिशू से आप जान पाएंगे कि क्या जगह वाकई साफ है".

शरीर में दस्त करवाने वाले बैक्टीरिया की मौजूदगी का भी इससे पता चल सकता है. जर्मनी के शिक्षा और शोध मंत्रालय ने 2014 तक इस प्रोजेक्ट का समर्थन करने का फैसला किया है. तब तक आपको इसके बाजार में आने का इंतजार करना होगा.

रिपोर्ट: ब्रिगिटे ऑस्टेराथ/ईशा भाटिया

संपादन: महेश झा

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