राजनीतिक फैसला है बो की उम्रकैद | दुनिया | DW | 22.09.2013
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दुनिया

राजनीतिक फैसला है बो की उम्रकैद

चीन में राजनीति के पूर्व स्टार बो शिलाई को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. सजा उम्मीद से ज्यादा सख्त है. डॉयचे वेले के मथियास फॉन हाइन कहते हैं कि इरादा यह संदेश देना है कि अलिखित नियमों को न मानना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

अभियोजन पक्ष के ठोस आरोप इस मुकदमे के केंद्र में कभी नहीं थे. भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ी रकम हालांकि लाखों यूरो में है, लेकिन चीन के हिसाब से मामूली है. मुकदमे के केंद्र में उसका राजनीतिक आयाम था. यह बात चीन की अदालतों को पता थी. राजनीतिक विरोधी को भर्ष्टाचार का आरोप लगाकर ठंडा कर देना, चीन में पार्टी के अंदर के सत्ता संघर्ष की सामान्य प्रक्रिया है. फिर भी इस मुकदमे में बहुत कुछ असामान्य था. अभियुक्त चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का पोलितब्यूरो सदस्य रहा है और उसने जोरदार ढंग से अपना बचाव किया. मुकदमा असामान्य रूप से लंबा चला. अदालत ने माइक्रोब्लॉग खबरों के जरिए मुकदमे की नियमित जानकारी दी, भले ही वे सेंसर से हो कर गुजरे हों.

China Bo Xilai Verurteilung lebenslange Haftstrafe 22.09.2013

हथकड़ियों में पूर्व स्टार

चीन की अदालतें स्वतंत्र नहीं हैं. वे पार्टी के निर्देशों का पालन करती हैं. बो शिलाई जैसे प्रमुख मामले में निर्देश एकदम ऊपर से आते हैं, पोलितब्यूरो की स्थायी समिति से. खासकर राजनीतिक मामले आम तौर पर पहले से ही तय होते हैं. सुनवाई दो दिन चलती है. अभियुक्त दोष मान लेता है और पछतावा दिखाता है. अंत में पहले से ही तय सजा की घोषणा कर दी जाती है. लेकिन बो शिलाई खुद के पैमाने पर खरे उतरे. उन्होंने तय स्क्रिप्ट को नहीं माना, पहले दिए गए इकरारनामे को वापस ले लिया, अभियोजन पक्ष के गवाहों पर सख्त हमला किया और उन्हें उपहास का पात्र बनाया.

इसके साथ बो शिलाई ने कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व को मामले पर फिर से विचार करने को बाध्य किया.इस मुकदमे का चार हफ्ते तक चलना दिखाता है कि अभी भी बो शिलाई को कितना समर्थन मिला हुआ है और उनके खिलाफ एकराय बनाना कितना कठिन था. अब नेतृत्व का संदेश यह है कि पार्टी विभाजित नहीं है. नेतृत्व के रुतबे पर सवाल नहीं हैं. जो अलिखित नियमों को तोड़ेगा, उसे सजा मिलेगी.

Bo Xilai vor Gericht 24. August 2013

काम न आया जोशीला बचाव

बो शिलाई के लिए नियमों की कभी कोई अहमियत नहीं रही. एक ऐसी कम्युनिस्ट पार्टी में , जिसने बड़ी मुश्किल से सामूहिक नेतृत्व का सिद्धांत लागू किया था, उन्होंने खुद को बढ़ावा दिया, खुलेआम अपनी महात्वाकांक्षा दिखाई, लोकलुभावन राजनीति की और जनता से सीधे संपर्क किया. क्रांति में शामिल नेता का बेटा होने के कारण उनमें आत्मविश्वास था कि चीजों को प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले अलग तरीके से करें. ऐसा कर उन्होंने बहुत सारे दुश्मन बना लिए. लेकिन उन्होंने चीनी समाज में बढ़ते अन्याय पर हमला किया और आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में हारने वालों का पक्ष लिया, वे नए वामपंथ के लोकप्रिय नेता बन गए.

बो शिलाई के पास अदालत के फैसला के खिलाफ अपील करने के लिए दस दिनों का वक्त है. संभवतः वे ऐसा करेंगे भी. लेकिन इसमें संदेह ही है कि उन्हें फिर से वैसा मंच मिले, जैसा जिहान की अदालत में मिला था.कम्युनिस्ट पार्टी का नेतृत्व बो को स्थायी रूप से परिदृश्य से हटाने पर सहमत हो गया लगता है. इस कहानी की विडंबनाओं में यह भी शामिल है कि बो शिलाई की नव माओवादी नीतियां पार्टी प्रमुख शी जिनपिंग के शासनकाल में जिंदा हैं. वे पार्टी और देश में माओवादी स्टाइल में अभियान चला रहे हैं, क्रांति के आदर्शों की बात कर रहे हैं और ब्लॉगरों तथा आलोचना करने वाले बुद्धिजीवियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं. एक तरह से यह सर्वोच्च स्तर पर बौद्धिक संपदा की चोरी का मामला है.

समीक्षा: मथियास फॉन हाइन/एमजे

संपादन: ईशा भाटिया

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