रवैया बदले भारत: पाकिस्तान | दुनिया | DW | 14.08.2014
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

रवैया बदले भारत: पाकिस्तान

पाकिस्तान ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लगाए गए छद्म युद्ध छेड़ने के आरोपों को निराधार बताया है. पाकिस्तान ने कहा कि एक दूसरे पर इल्जाम लगाने की बजाय सकारात्मक रवैया जरूरी है.

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है, "मोदी पाकिस्तान के खिलाफ निराधार बातें कर रहे हैं." कश्मीर यात्रा के दौरान लेह में भारतीय सेना के अधिकारियों को संबोधित करते हुए मोदी ने यह टिप्पणी की थी. पाकिस्तान ने भारत से दोनों देशों के बीच सकारात्मक रवैया अपनाने की मांग की है.

कश्मीर के उत्तरपूर्व में स्थित कारगिल भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में हुए युद्ध का साक्षी है. भारत और पाकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध के 15 साल बाद यह कारगिल में पहले प्रधानमंत्री की यात्रा है. कश्मीर में आतंकवादी सरगर्मियों के लिए भारत लश्कर ए तैयबा जैसे आतंकवादी संगठनों का इस्तेमाल करने के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराता रहा है. पाकिस्तान इन आरोपों से इनकार करता आया है.

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय से जारी बयान में कहा गया है, "उच्चतम राजनीतिक स्तर पर भारत द्वारा लगाए गए आरोप के बारे में खबरें बहुत अफसोसनाक बात हैं." इस बयान में पाकिस्तान की पड़ोसी देश के साथ अच्छे संबंधों की इच्छा पर जोर दिया गया है. विदेश मंत्रालय के मुताबिक कश्मीर में शांति के लिए यह ज्यादा अच्छा होगा कि आरोप प्रत्यारोप करने की बजाय दोनों देश अपने संबंधों को बेहतर करने पर ध्यान दें. इसके लिए उन्हें बातचीत और एक साथ काम करने की जरूरत है ताकि सहयोगी और मैत्री संबंधों को बढ़ावा मिल सके.

कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच बंटा हुआ है, लेकिन दोनों ही देश इसे पूरी तरह अपने अधिकार में लेना चाहते हैं. भारत और पाकिस्तान के बीच हुए तीन में से दो युद्ध दोनों देशों के बीच विवादित कश्मीर क्षेत्र को लेकर हो चुके हैं. कश्मीर के अलगाववादी भारत से अलग होना चाहते हैं और इस मुद्दे पर 1989 से संघर्ष चला आ रहा है.

यात्रा के दौरान मोदी ने भारतीय सेना को और हथियार मुहैया कराने की भी बात कही. उन्होंने कहा कि युद्ध से ज्यादा हादसे आतंकवाद के कारण हो रहे हैं. 1989 से अब तक सैन्य और आतंकवादी संघर्षों में हजारों जानें जा चुकी हैं. 15 साल पहले दोनों देशों के बीच हुआ कारगिल युद्ध भी हजारों की मौत का गवाह बना.

एसएफ/एएम (एएफपी)

संबंधित सामग्री

विज्ञापन