येदियुरप्पा बने सीएम, ट्विटर पर झगड़े अमित शाह और राहुल गांधी | दुनिया | DW | 17.05.2018
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दुनिया

येदियुरप्पा बने सीएम, ट्विटर पर झगड़े अमित शाह और राहुल गांधी

कर्नाटक में बीजेपी विधायक दल के नेता बीएस येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. राज्यपाल वजुभाई वाला ने गुरुवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुबह नौ बजे राजभवन में येदियुरप्पा को शपथ दिलाई.

75 वर्षीय येदियुरप्पा ने बीजेपी के केंद्रीय और राज्य के नेताओं और नवनिर्वाचित विधायकों की मौजूदगी में कन्नड़ भाषा में शपथ ली. इस दौरान ट्विटर पर राहुल गांधी और अमित शाह के बीच शब्दों की लड़ाई देखी जा सकती है. राहुल गांधी ने लिखा, "आंकड़े ना होने के बाद भी कर्नाटक में सरकार बनाने की बीजेपी की जिद संविधान की खिल्ली उड़ाने का काम कर रही है. आज सुबह जब बीजेपी अपनी खोखली जीत का जश्न मना रही है, तब भारत लोकतंत्र की हार का शोक मना रहा है."

इसके जवाब में अमित शाह ने लिखा है, "लोकतंत्र का कत्ल तो तभी हो गया था, जब हताश कांग्रेस ने जेडीएस को मौकापरस्त पेशकश की, कर्नाटक के भले के लिए नहीं, बल्कि अपने तुच्छ राजनीतिक फायदे के लिए. शर्मनाक."

याचिका खारिज

इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय की तीन सदस्यीय बेंच ने येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण पर रोक लगाने संबंधी कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) की संयुक्त याचिका खारिज कर दी. न्यायाधीश एके सीकरी के नेतृत्व में बेंच ने उस पत्र को पेश करने को कहा, जिसे येदियुरप्पा ने बुधवार को राज्यपाल को लिखते हुए उन्हें सूचित किया था कि कर्नाटक में बीजेपी विधायक दल के नेता के रूप में उनका चुनाव किया गया है. येदियुरप्पा आठवीं बार शिकारीपुरा से चुनाव जीते हैं और उन्होंने तीसरी बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है.

राज्यपाल का फैसला

राज्यपाल वजुभाई वाला ने बीजेपी को सरकार बनाने का न्यौता दिया था, जिसके खिलाफ कांग्रेस और जेडीएस ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया. इस पर न्यायालय ने देर रात सुनवाई शुरू की. राज्यपाल ने येदियुरप्पा को बहुमत सिद्ध करने के लिए 15 दिनों का समय दिया है.

कर्नाटक में 222 सीटों पर चुनाव हुए, जिसमें से बीजेपी को 104, कांग्रेस को 78 और जेडीएस को 37 सीटें मिली. त्रिशंकु विधानसभा की तस्वीर सामने आने के एक दिन बाद सबकी निगाहें राज्यपाल वजुभाई वाला पर टिकी थीं कि वे सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे या बहुमत वाले गठबंधन को और यह तस्वीर देर शाम साफ हो गई जब बीजेपी को सरकार गठन का न्यौता मिला.

चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी लेकिन बहुमत के जादुई आंकड़े 112 से आठ सीट पीछे रही. ऐसे में, कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन ने कुमारस्वामी के नेतृत्व में बहुमत के बल पर राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश किया था. कांग्रेस-जेडीएस ने 117 विधायकों के समर्थन की सूची भी राज्यपाल को सौंपी.

हताश कांग्रेस

गोवा, मेघालय और मणिपुर की थोड़ा पहले की सियासी तस्वीरों की नजीर सामने है. वहां राज्यपालों ने बहुमत वाले गठबंधन को वहां सरकार बनाने का न्यौता दिया था. ऐसे में सवाल उठ रहा था कि क्या वैसा ही न्यौता कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन को यहां मिलेगा या सबसे बड़े दल बीजेपी को? अंत में राज्यपाल ने सबसे बड़ी पार्टी को सरकार गठन का न्यौता दिया.

दिनभर चली गहमागहमी के बीच जेडीएस ने बीजेपी पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया और कहा कि विधायकों को 100 करोड़ रुपये की पेशकश की गई है.

आईबी/एके (आईएएनएस)

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