यूरोप वायदे को चुने या फायदे को | दुनिया | DW | 11.05.2018
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दुनिया

यूरोप वायदे को चुने या फायदे को

अमेरिका के ईरान डील से बाहर निकलने के बाद यूरोप बड़ी मुश्किल में फंस गया है. वह साझेदार को चुने या अपने वायदे को या फिर फायदे को?

यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी की चांसलर अंगेला मैर्केल ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले को एक "बड़ी चिंता" बताया. म्युंस्टर शहर में कैथोलिक चर्च के एक बड़े आयोजन को संबोधित करते हुए मैर्केल ने कहा, अमेरिका को ईरान परमाणु समझौते से बाहर करने का ट्रंप का फैसला "अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर भरोसे को नुकसान" पहुंचाएगा.

शांति के मुद्दे पर लोगों को संबोधित करते हुए जर्मन चांसलर ने कहा कि, "यह सही नहीं है कि जिस डील पर सब सहमत हुए हों, जिस पर यूएन सिक्योरिटी काउंसिल की वोटिंग में सर्वसम्मति से हामी भरी गई हो, उसे अकेले ही खत्म कर दिया जाए." 2015 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने चीन, रूस, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन के साथ मिलकर ईरान के साथ परमाणु समझौता किया था. डील के तहत ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को बंद करने का वचन दिया और अमेरिका व पश्चिमी देशों ने तेहरान पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों में ढील दी.

ट्रंप ने मई 2018 में अमेरिका को इससे बाहर करने का एलान कर दिया. साथ ही उन्होंने ईरान पर नए प्रतिबंध लगाने का रास्ता भी साफ कर दिया. फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों भी अमेरिका के ईरान डील से बाहर निकलने पर निराशा व्यक्त कर चुके हैं. यूरोपीय संघ के नेताओं ने ट्रंप से डील न तोड़ने की अपील की, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति पर ऐसी अपीलों का कोई असर नहीं हुआ.

नए अमेरिकी प्रतिबंधों का असर जर्मनी, फ्रांस, चीन, भारत और रूस की कंपनियों पर निश्चित रूप से पड़ेगा. यूरोपीय संघ के नेता अब ईरान डील को बचाने के लिए नए सिरे से विचार कर रहे हैं. इस मुद्दे को लेकर जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन के विदेश मंत्री ईरानी विदेश मंत्री जवाद जरीफ से मुलाकात भी करने वाले हैं.

जर्मनी की विदेश मामलों की संसदीय समिति के चैयरमैन नॉर्बर्ट रोएटगेन कहते हैं, "अमेरिकियों के बिना यह डील काम नहीं करेगी. अंत में यह कारोबार से जु़ड़ा फैसला होगा. अगर यूरोपीय कंपनियों को ईरानी और अमेरिकी बाजार में से किसी एक को चुनना हो तो ज्यादातर अमेरिकी बाजार को ही ज्यादा अहम मानेंगे." जर्मनी की कई कंपनियां ईरान के साथ करोड़ों डॉलर के सौदे कर चुकी हैं. इन सौदों के भविष्य पर ट्रंप के फैसले ने तलवार लटका दी है. ईरान के साथ करोबार करने वाली कंपनियों पर अगर अमेरिकी प्रतिबंध लगे तो जर्मनी समेत कई देशों की कंपनियां इससे प्रभावित होंगी.

क्रीमिया और फेक न्यूज जैसे मतभेदों के बावजूद ईरान डील के मुद्दे पर रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल से टेलीफोन पर बातचीत की है. दोनों नेताओं ने परमाणु समझौते को लेकर अपनी वचनबद्धता दोहराई है. लेकिन क्या यूरोप अमेरिका के बिना ईरान डील को जारी रख सकेगा.

ओएसजे/एमजे (डीपीए, एपी, एएफपी)

 

 

 

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