यूरोप: कोकेन के कारोबारियों का पसंदीदा ठिकाना | दुनिया | DW | 16.04.2021
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दुनिया

यूरोप: कोकेन के कारोबारियों का पसंदीदा ठिकाना

अगर आपको लगता है कि लॉकडाउन में पार्टी नहीं हो रही या ड्रग्स का इस्तेमाल नहीं हो रहा, तो यह गलत है. कोरोना के बावजूद जर्मनी में कई टन कोकेन की खपत हो रही है. शिपिंग कंटेनरों में छिपाकर इसे अटलांटिक पार कराया जा रहा है.

जर्मनी राजधानी बर्लिन में रहने वाले आलेक्जांडर की उम्र 40 साल के आस-पास है. वह कोकेन का सेवन करते हैं. पहले वह सप्ताह में दो बार कोकेन लेते थे लेकिन कोरोना महामारी की वजह से लॉकडाउन लगने के बाद अब कोकेन का इस्तेमाल पहले से ज्यादा करने लगे हैं. आलेक्जांडर ने डॉयचे वेले को बताया, "अब मैं सप्ताह में कम से कम चार बार कोकेन लेता हूं."

लगभग हर रात उनके कई दोस्त उनसे मिलने आते हैं. यह बर्लिन में लगे लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन है. वह कहते हैं, "लॉकडाउन की वजह से लोग ऊब चुके हैं. यह नरक जैसा लगने लगा है. और जब लोग ऊब जाते हैं, तो क्या करते हैं? कुछ ऐसा जिससे उन्हें मजा आए."

घर पर कोकेन वाली पार्टी

महामारी से पहले आलेक्जांडर और उनके दोस्त बार में मिलते थे जहां वे छिपकर कोकेन का इस्तेमाल करते थे. वह बताते हैं, "अगर आपके ग्रुप में आठ लोग हैं, तो ऐसा नहीं होता कि सभी लोग एक बार में ही बाथरूम जाते हैं. लेकिन जब आप घर पर होते हैं, तो आप सारा सामान टेबल पर रखते हैं, आठ लाइन बनाते हैं और सभी एक ही समय में कुछ न कुछ लेते हैं. ऐसे में लोग ज्यादा कोकेन का इस्तेमाल करते हैं."

कोराना महामारी के दौरान ड्रग्स का इस्तेमाल किस तरह से बढ़ गया है, इसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है. आने-जाने पर लगी पाबंदी, सीमा बंद होने और एयरपोर्ट पर आवाजाही कम होने से कोकेन के व्यापार से जुड़े आपराधिक गिरोह का काम मुश्किल होना चाहिए था. विशेषज्ञों को शुरू में उम्मीद थी कि इन हालातों में ड्रग्स के अवैध व्यापार में कमी आएगी और इससे खपत में भी गिरावट होगी. हालांकि, शायद ऐसा नहीं हुआ है.

आलेक्जांडर कहते हैं कि ड्रग्स की सप्लाई में किसी तरह की समस्या नहीं हो रही है. बस एक फोन कॉल कीजिए और 20 से 30 मिनट के अंदर 'कोकेन टैक्सी' आपके घर के दरवाजे पर आ जाएगी. आपको कभी भी 45 मिनट से ज्यादा इंतजार करने की जरूरत नहीं पड़ती. यह खाना पहुंचाने वाली सेवाओं की तरह हो गया है. कीमत भी पहले की तरह ही है. साथ ही कोकेन की क्वॉलिटी पहले की तुलना में बेहतर हो गई है.

रेने मात्सके इसकी पुष्टि कर सकते हैं. उनका काम उन 'कोकेन टैक्सियों' की आवाजाही को कम करना या उस पर रोक लगाना है जो आलेक्जांडर के पास पहुंचते हैं. मात्सके जर्मनी के सबसे बड़े बंदरगाह शहर हैम्बर्ग में सीमा शुल्क जांच कार्यालय के प्रमुख हैं. उन्होंने डॉयचे वेले को बताया, "कोकेन को अक्सर बड़े बंदरगाहों के जरिये ही लाया जाता है."

हैम्बर्ग बंदरगाह पर हर दिन 23 हजार से ज्यादा शिपिंग कंटेनर पहुंचते हैं. मात्सके के कर्मचारी विशेष रूप से संदिग्ध कंटेनरों को बाहर निकालते हैं. इनमें अधिकांश वे कंटेनर होते हैं जो दक्षिण अमेरिका से आते हैं. ये एक ऐसे रास्ते से आते हैं जिसका इस्तेमाल ज्यादातर संदिग्ध और अवैध कारोबार करने वाली कंपनियां करती हैं. हैम्बर्ग के सीमा शुल्क अधिकारी इन कंटेनरों की जांच एक्स-रे मशीन से करते हैं.

कभी-कभी वे स्पोर्ट्स बैग में कोकेन पाते हैं, कभी-कभी यह चावल या जानवरों के भोजन के बैग के बीच छिपा होता है. मात्सके कहते हैं, "अभी हम जितनी मात्रा में कोकेन जब्त कर रहे हैं, उतनी पहले कभी नहीं देखी गई. पिछले दो साल में हम दस टन से ज्यादा कोकेन जब्त कर चुके हैं. इससे पहले हम पूरे देश में एक साल में तीन या पांच टन कोकेन जब्त करते थे."

मार्च में मात्सके ने अब तक की सबसे ज्यादा मात्रा में जब्त की गई कोकेन के बारे में जानकारी दी. जब्त की गई कोकेन की मात्रा 16 टन थी. यह कोकेन प्रोटीन के कैन में छिपाकर लाई जा रही थी. इससे पहले यूरोप में कभी भी एक बार में इतनी मात्रा में कोकेन जब्त नहीं की गई थी.

कारोबार के लिए अच्छा है यूरोप

इनसाइट क्राइम संगठन के निदेशक जेरेमी मैकडरमॉट कहते हैं कि वर्तमान में यूरोप कोकेन के तस्करों के लिए सबसे आकर्षक बाजार है. डॉयचे वेले के साथ इंटरव्यू में वे 'कोकेन पाइपलाइन टू यूरोप' की बात करते हैं, "कीमतें बहुत अधिक हैं और जोखिम अमेरिका की तुलना में बहुत कम हैं." जेरेमी और उनकी टीम कोलंबिया के मेडेलिन में दक्षिण अमेरिका में होने वाले संगठित अपराध का विश्लेषण करती है.

जेरेमी कहते हैं, "ड्रग्स की समस्या से निपटने के लिए अमेरिका हर साल अरबों डॉलर खर्च करता है. उन्होंने नशीले पदार्थों से निपटने के लिए एक अलग आर्मी तैनात की है. इसकी वजह से ड्रग्स कारोबारियों के लिए यूरोप में कारोबार करना आसान हो गया है." जेरेमी का मानना है कि यूरोप में कोकेन का बाजार बढ़ता रहेगा, खासकर पूर्वी यूरोप में.

जेरेमी कहते हैं, "कोलंबिया, बोलीविया और पेरू जैसे देशों में कोकेन का उत्पादन उच्च स्तर पर बना हुआ है. इसकी वजह यह है कि इन देशों से यूरोप पहुंचने के कई रास्ते हैं. कोलंबिया से ब्राजील में स्थित एक बंदरगाह इन लोकप्रिय रास्तों में से एक है. वहां से यूरोप जाने वाले एक कंटेनर में कोकेन रखा जाता होगा. इसमें एक अलग तरह की आपराधिक संरचना होगी, जिसमें बंदरगाह और सीमा शुल्क के भ्रष्ट अधिकारी शामिल हो सकते हैं."

जेरेमी आगे बताते हैं कि यूरोप पहुंचने पर दूसरे क्रू के लोग इन कंटेनर को रिसीव करते हैं और उसे किसी सुरक्षित जगह पर रख देते हैं. रॉटरडैम और एंटवर्प के बंदरगाहों पर यह ज्यादा होता है. वे कहते हैं, "यहां से संगठित अपराध में शामिल लोग कोकेन को बंदरगाह से दूर सुरक्षित जगह पर ले जाएंगे. इस कोकेन के कई मालिक होते हैं और इसे कई जगहों पर ले जाया जाता है."

वीडियो देखें 04:25

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हिंसा के लिए तैयार

इस तरीके से ये ड्रग्स छोटे डीलरों और आलेक्जांडर जैसे ग्राहकों तक पहुंचता है. पुर्तगाल के लिस्बन स्थित यूरोपियन मॉनिटरिंग सेंटर फॉर ड्रग एंड ड्रग एडिक्शन (ईएमसीडीडीए) का अनुमान है कि करीब एक करोड़ बीस लाख लोग यूरोपियन कोकेन का इस्तेमाल करते हैं. ईएमसीडीडीए के लॉरेंट लैनियल कहते हैं कि यूरोप में पिछले कई सालों से कोकेन का चलन बढ़ रहा है. उन्होंने डॉयचे वेले को बताया, "हमें यूरोप में ज्यादा भ्रष्टाचार और ज्यादा हिंसा के लिए तैयार रहना चाहिए."

जब्त की गई कोकेन की मात्रा को देखते हुए लैनियल का कहना है कि यह मान लेना चाहिए कि ड्रग्स गिरोह बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर कर्मचारियों को रिश्वत दे रहे हैं. वे कहते हैं, "यूरोप में कानून का पालन कराने वालों और न्याय के क्षेत्र से जुड़े लोगों में भी भ्रष्टाचार के संकेत मिले हैं." लैनियल का मानना है कि यूरोप में प्रशासन और राजनीति से जुड़े कुछ लोग पहले से ही कोकेन व्यापार से मुनाफा कमा रहे हैं. 

लैनियल कहते हैं कि जितना ज्यादा कोकेन यूरोप में आता है, उतना ज्यादा पैसा दांव पर होता है. इससे अलग-अलग गिरोहों के बीच हिंसा बढ़ जाती है. उन्होंने नीदरलैंड्स में शिपिंग कंटेनरों में टॉर्चर की घटनाओं का संदर्भ दिया और कहा कि इससे साफ पता चल रहा है कि यह कारोबार यूरोप में कितने क्रूर तरीके से संगठित अपराध के तौर पर चल रहा है. मात्सके कहते हैं कि हैम्बर्ग में ड्रग्स की तलाशी के दौरान गोलीबारी की घटनाएं भी हुई हैं. तलाशी के दौरान शक्तिशाली हथियार भी मिले हैं. सीमा शुल्क और पुलिस अधिकारियों को भी धमकी दी जा रही है.

समग्र दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत

देशों को किस तरह से कार्रवाई करनी चाहिए? क्या उस तरह से ड्रग्स के खिलाफ लड़ना चाहिए जैसे अमेरिका लड़ रहा है? इस सवाल पर इनसाइट क्राइम से जुड़े जेरेमी मैकडरमॉट को लगता है कि यह सही तरीका नहीं है, "इसके लिए आपको समग्र दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है. दमनकारी नीतियों और गिरफ्तारियों से कुछ नहीं होने वाला है. ऐसा करने के लिए जर्मनी को यूरोप के अन्य देशों, अमेरिका और लैटिन अमेरिका के देशों के साथ मिलकर काम करना होगा. आपको सिविल सोसायटी को मजबूत करना होगा. कोकेन के किसानों को सम्मानजनक और कानूनी विकल्प देना होगा. यदि आप हैम्बर्ग में कंटेनरों की तलाशी करके ड्रग्स के कारोबार को रोकने की कोशिश कर रहे हैं, तो इसकी संभावना काफी कम है कि आप इस कारोबार को नियंत्रित कर पाएंगे."

कोकेन का इस्तेमाल करने वाले आलेक्जांडर खुद को इस लंबी कड़ी का सबसे अंतिम छोर मानते हैं, "अगर मैं कोकेन का इस्तेमाल करना छोड़ देता हूं, तो इससे ज्यादा कुछ नहीं बदलने वाला है. एक बार कोकेन अगर यहां पहुंच जाती है, तो यह मारे गए सुअर की तरह है. अगर मैं इसे नहीं भी खाता हूं, तो भी यह मर तो चुका होता है.”

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