यूरोप की सबसे बड़ी कार कंपनी को खड़ा करने वाला चला गया | दुनिया | DW | 27.08.2019
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दुनिया

यूरोप की सबसे बड़ी कार कंपनी को खड़ा करने वाला चला गया

घाटे में चल रही कार कंपनी को भारी मुनाफे वाली यूरोप की सबसे बड़ी कंपनी में बदलने का करिश्मा दिखाने वाले फर्डिनांड पिएष का निधन हो गया है. सख्त छवि वाले पिएष ने फोल्क्सवागेन की सफलता की इबारत लिखी है.

जर्मन की फोल्क्सवागेन को कार बनाने वाली सफल कंपनी बनाने का श्रेय फर्डिनांड पिएष को जाता है. 82 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया है. पिछले दिनों वे जर्मन राज्य बवेरिया में अपनी पत्नी उर्सुला पिएष के साथ एक रेस्तरां गए थे, वहीं अचानक गिर गए. बाद में अस्पताल में उनकी मौत हो गई. उर्सुला पिएष ने एक बयान जारी कर यह जानकारी दी है.

फर्डिनांड पिएष 1993 से 2002 तक जर्मन कार कंपनी फोल्क्सवागेन के सीईओ थे और अपनी सख्त मिजाज कार्यशैली के लिए जाने जाते थे. इस 9 साल के कार्यकाल में एक अरब यूरो के नुकसान में चल रही कंपनी 2.6 अरब यूरो के मुनाफे में आ गई. फोल्क्सवागेन को उन्होंने 12 ब्रांड वाली कार कंपनी के रूप में मजबूती से खड़ा कर दिया. इसमें सीएट, स्कोडा, बेंटले, ऑडी, पोर्शे और डुकाटी शामिल हैं. साथ ही मान और स्कानिया जैसे ट्रक के ब्रांड भी.

चीफ एग्जिक्यूटिव मार्टिन विंटरकोर्न के साथ मिल कर पिएष ने कठोर हाथों से फोल्क्सवागेन का एंपायर खड़ा किया. जर्मन पत्रिका डेय श्पीगल ने एक बार इन दोनों अधिकारियों के नेतृत्व में फोल्क्सवागेन को "बगैर लेबर कैम्प वाला उत्तर कोरिया" कहा था.

पिएष ने जर्मनी के ऑटो क्षेत्र में कई दशकों तक एकछत्र राज किया है. वे बाद में फोल्क्सवागेन की प्रबंध संबंधी बोर्ड के चेयरमैन बने और इस पद पर 2015 तक रहे. 2015 में ही उन्हें विंटरकोर्न के साथ सत्ता संघर्ष की वजह से पद छोड़ना पड़ा. विंटरकोर्न ने भी इसके छह महीने बाद इस्तीफा दे दिया जब कंपनी उत्सर्जन को लेकर विवादों में घिर गई. पता चला था कि फोल्क्सवागेन पर्यावरण से जुड़ी जांच में अलग नतीजे दिखाने के लिए अपनी डीजल इंजन वाली गाड़ियों में एक उपकरण लगा रही थी जो नतीजों को प्रभावित करता था. इस विवाद में घिरने के बाद कंपनी को कई अरब डॉलर का खर्च जुर्माना और कानूनी लड़ाई में करना पड़ा.

पिएष ने अपने परिवार के सदस्यों को नाराज कर दिया था जब उन्होंने उत्सर्जन विवाद के दौरान यह दावा किया कि उन्होंने इस बारे में फोल्क्सवागेन के निदेशकों को फरवरी 2015 में ही जानकारी दे दी थी. 2017 में उन्होंने अपनी कंपनी पोर्शे में एक बड़ी हिस्सेदारी परिवार के युवा सदस्य को देने का फैसला किया.

2003 में पिएष की आत्मकथा प्रकाशित हुई थी, जिसमें पिएष ने खुद के बारे में लिखा था, "सद्भाव की जरूरत मेरे लिए सीमित है." 17 अप्रैल 1937 में वियना में जन्मे पिएष फर्डिनांड पोर्शे के पोते थे. फर्डिनांड पोर्शे नी फोल्क्सवागेन के बीटल जैसी टाइप वन गाड़ियों की खोज की थी.

फर्डिनांड पिएष ने सबसे पहले 9 साल की उम्र में गाड़ी चलाने की कोशिश की लेकिन गैरेज के दरवाजे से टक्कर हो गई. हालांकि इसके बाद भी कार से उनका प्रेम खत्म नहीं हुआ और पूरा जीवन उनके साथ ही बिताया. मेकैनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले पिएष को नौकायन का शौक था. इसके साथ ही उन्हें एशियाई संस्कृति और जापानी नीतिशास्त्र से गहरा लगाव था.

एनआर/आईबी (डीपीए, रॉयटर्स)

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