यूरोपीय संघ में जगह बनाने की कोशिश में लगा सिकंदर का ग्रीस | दुनिया | DW | 20.05.2019
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दुनिया

यूरोपीय संघ में जगह बनाने की कोशिश में लगा सिकंदर का ग्रीस

ग्रीस के साथ भारत का संबंध सिकंदर महान के दिनों से है. सिकंदर और पोरस की लड़ाई इतिहास में ही दर्ज नहीं है, इस रिश्ते ने दोनों इलाकों को भी सदा के लिए जोड़ दिया.

एक करोड़ से कुछ ज्यादा आबादी वाला देश ग्रीस यूं तो यूरोप की कुल आबादी का सिर्फ दो प्रतिशत से कुछ ज्यादा है लेकिन पिछले सालों में आर्थिक मुश्किलों की वजह से वह यूरोप के सबसे अहम मुद्दों में शामिल रहा है. ग्रीस के आर्थिक संकट और 2015 के शरणार्थी संकट ने आज के यूरोप को बहुत हद तक परिभाषित किया है. इन दो मुद्दों के न होने पर आज कई मुद्दों पर विभाजित दिख रहे यूरोप का स्वरूप कुछ और होता.

ग्रीस की राजनीतिक व्यवस्था

यूरोप के दक्षिण पश्चिम सीमा पर स्थित ग्रीस भारत की ही तरह लोकतांत्रिक गणतंत्र है जहां सरकार का मुखिया संसद में बहुमत का नेता प्रधानमंत्री होता है. प्रधानमंत्री के पास देश की कार्यपालिका के ज्यादातर अधिकार हैं. राज्य प्रमुख राष्ट्रपति होता है जो मुख्य रूप से देश का प्रतिनिधित्व करता है. ग्रीस में औपचारिक रूप से मतदान अनिवार्य है लेकिन इसकी हकीकत में जांच नहीं की जाती.

संसद में 300 सीटें हैं. चुनाव 59 चुनाव क्षेत्रों में होता है. 18 साल से ज्यादा उम्र के सभी नागरिकों को मतदान का अधिकार है. उनका रजिस्ट्रेशन अपने आप होता है. संसद की 250 सीटों का बंटवारा आनुपातिक पद्धति से होता है. सबसे बड़ी पार्टी को 50 सीटें बोनस में मिलती हैं ताकि बहुमत बनाने में आसानी हो. इस साल अक्टूबर में होने वाले संसदीय चुनावों से मतदान की उम्र घटाकर 17 वर्ष की जा रही है.

यूरोपीय संघ में ग्रीस

यूरोपीय संसद में ग्रीस 21 सदस्य भेजता है. वह 1981 से यूरोपीय संघ का सदस्य है और 2000 से शेंगेन का और 2001 से यूरो जोन का सदस्य है. ग्रीस पुराने यूरोपीय संघ के गरीब देशों में शामिल है. जबकि आयरलैंड, नीदरलैंड और ऑस्ट्रिया जैसे देशों की प्रति व्यक्ति आय यूरोप की औसत आय के करीब 130 प्रतिशत है. ग्रीस की प्रति व्यक्ति आय 73 प्रतिशत है.

ग्रीस का आर्थिक क्षेत्र में सबसे बड़ा हिस्सा थोक और खुदरा कारोबार तथा पर्यटन का है. दूसरे नंबर पर सार्वजनिक प्रशासन है और तीसरे स्थान पर जमीन और मकान की खरीदफरोख्त हैं. ग्रीस से होने वाले निर्यात का 56 प्रतिशत यूरोपीय संघ के दूसरे देशों को जाता है जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा 11 प्रतिशत के साथ इटली का है. ग्रीस द्वारा विदेशों से खरीदे जाने वाले माल का भी 55 हिस्सा यूरोपीय संघ के देशों से ही आता है.

ग्रीस के कर्ज संकट की कहानी

ग्रीस के राजनीतिक दल

वामपंथी मोर्चा सिरीजा ग्रीस की प्रमुख पार्टी है जिसके नेतृत्व में इस समय देश की सरकार चल रही है. संसद में उसके 145 सदस्य हैं और पार्टी के नेता अलेक्सिस सिप्रास देश के प्रधानमंत्री हैं. दूसरे नंबर पर लिबरल कंजरवेटिव न्यू डेमोक्रैसी पार्टी है जो पहले सरकार में रही है लेकिन इस समय विपक्ष में है. उसके संसद में 78 सदस्य हैं.

इसके अलावा ग्रीस की प्रमुख पार्टियों में सोशलिस्ट पासोक पार्टी, ग्रीन पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी और अल्ट्रा राष्ट्रवादी गोल्डन डाउन पार्टी है. कभी सत्ता में रही मध्यमार्गी पासोक पार्टी ने जनाता का भरोसा खो दिया है और इस समय मध्य वाम मोर्चा का नेतृत्व कर रही है.

भारत और ग्रीस

अलेक्जैंडर या सिकंदर महान के भारत आने तक ग्रीस के लोग भारत का मतलब सिंधु नदी के इलाके को मानते थे. बाद में पूरा उत्तर भारत इसमें शामिल हो गया. भारत के लोग ग्रीक लोगों को यवन कहते थे और भारतीयों और यवनों के संबंध पर बहुत सारी कथा कहानियां मौजूद हैं. पाणिनी ने यवनों का जिक्र किया है, तो चाणक्य के अर्थशास्त्र में भी उनकी चर्चा है. मेगास्थनीज ने अपनी किताब इंडिका में भारत के बारे में लिखा था.

आधुनिक काल में भारत के आजाद होने के तीन साल बाद दोनों देशों ने 1950 में कूटनीतिक संबंधों की स्थापना की. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दोनों देश निकट सहयोग करते रहे हैं. 1985 में दोनों देशों ने परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए साझा पहल की थी. भारत और ग्रीस का पारस्परिक कारोबार करीब 50 करोड़ डॉलर का है. 

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