यूक्रेन पर मैर्केल की चेतावनी | दुनिया | DW | 13.03.2014
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दुनिया

यूक्रेन पर मैर्केल की चेतावनी

क्रीमिया विवाद में रूस और पश्चिमी देश प्रतिबंधों की होड़ की ओर बढ़ रहे हैं. रूस ने पश्चिमी देशों द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने पर वैसे ही कदम उठाने की धमकी दी है. जर्मन चांसलर मैर्केल ने रूस को गंभीर परिणामों की चेतावनी दी.

जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल ने रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन को चेतावनी दी है कि यदि रूस नहीं झुकता है तो इसके गंभीर नतीजे होंगे. साथ ही उन्होंने पुतिन पर यूक्रेन से क्रीमिया के विभाजन को सक्रिय समर्थन देने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, "यह साफ है. क्षेत्रीय अखंडता पर खुले आम सवाल उठाए जा रहे हैं और उनका हनन हो रहा है." पुतिन ने फौरन इन आरोपों को ठुकरा दिया और कहा कि रूस संकट की वजह नहीं है.

क्रीमिया की रूसी बहुल आबादी रविवार को एक जनमत संग्रह में यूक्रेन से अलग होने और रूस में शामिल होने का फैसला करेगी. यूक्रेन की सरकार ने जनमत संग्रह को गैरकानूनी बताया है. यूरोपीय संघ और अमेरिका ने भी रूस को क्रीमिया का अधिग्रहण करने के खिलाफ चेतावनी दी है और कई स्तरों वाले प्रतिबंधों की धमकी दी है, जिसमें जरूरत पड़ने पर आर्थिक प्रतिबंध भी शामिल होंगे.

जर्मनी की चेतावनी

चांसलर मैर्केल ने जर्मन संसद बुंडेसटाग में सरकार का नीतिगत बयान देते हुए कहा कि क्रीमिया का अधिग्रहण और पूर्वी यूक्रेन की अस्थिरता से सिर्फ रूस के प्रति यूरोपीय संघ और जी-7 देशों का रुख ही नहीं बदलेगा, " मुझे पूरा विश्वास है कि यह रूस को भी आर्थिक और राजनीतिक रूप से गंभीर नुकसान पहुंचाएगा." मैर्केल ने पुतिन पर आरोप लगाया कि वे 19वीं और 20वीं सदी के तरीकों से 21वीं सदी की समस्याओं का हल करना चाहते हैं.

जर्मन चांसलर ने कहा कि रूस पड़ोसी देश के कमजोर समय का लाभ उठाकर क्रीमिया को हड़पना चाहता है. मैर्केल ने रूसी नीति की आलोचना करते हुए कहा, "ताकत के कानून को कानून की ताकत के साथ खड़ा किया जा रहा है." साथ ही मैर्केल ने साफ किया कि यूक्रेन में सैनिक कार्रवाई कोई विकल्प नहीं है. यूरोपीय संघ रूस और यूक्रेन के बीच संवाद कायम करना चाहता है और यूक्रेन की अंतरिम सरकार की मदद करना चाहता है. लेकिन यदि रूसी नेतृत्व नहीं झुकता तो कदम दर कदम प्रतिबंध लगाए जाएंगे. उन्होंने कहा कि रूसी पक्ष इस चक्र को रोक सकता है.

रूस के उप वाणिज्य मंत्री लिखाचेव ने पश्चिमी देशों के दबाव पर प्रतिक्रिया में कहा है, "हम हर हालत के लिए तैयार हैं." उन्होंने कहा कि रूस पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का जवाब उन्हीं कदमों के साथ देगा. उन्होंने कहा है कि यदि अमेरिका और पश्चिमी देश यात्रा और बैंक खातों पर रोक लगाते हैं तो रूस की सरकार भी वैसा ही करेगी. इसके बावजूद मॉस्को में उम्मीद की जा रही है कि पश्चिमी देश सिर्फ राजनीतिक प्रतिबंध लगाएंगे और आर्थिक प्रतिबंधों से बचा जा सकेगा.

आर्थिक नतीजों की चिंता

जर्मनी में चीन के राजदूत शी मिंगदे ने भी प्रतिबंधों का विरोध किया है. उन्होंने कहा, "हम प्रतिबंधों का समर्थन नहीं करते, क्योंकि प्रतिबंधों के जवाब प्रतिबंधों से दिए जा सकते हैं.उसके साथ एक चक्र शुरू होगा जिसके अप्रत्याशित नतीजे होंगे." उन्होंने कहा कि चीन अभी भी इस बात की संभावना देखता है कि विवाद को भड़कने से रोका जा सकता है. बातचीत का दरवाजा अभी भी खुला है.

जर्मनी के आर्थिक जगत ने पिछले दिनों ही प्रतिबंधों का होड़ शुरू होने के खिलाफ चेतावनी दी थी. लेकिन चांसलर मैर्केल ने अपनी पार्टी के संसदीय दल के सदस्यों से कहा कि यूरोप यूक्रेन संकट में अपने रुख पर अडिग रहेगा और आर्थिक नतीजों को स्वीकार करेगा. जर्मनी अपनी जरूरत का एक तिहाई गैस रूस से खरीदता है. इसके अलावा कार निर्माताओं के लिए रूस अहम बाजार है. यूक्रेन संकट की वजह से जर्मन कार कंपनी फोल्क्सवागेन को रूस के साथ कारोबार में घाटे की आशंका है.

रूस पर यूक्रेन संकट का असर शुरू हो गया है. रूस की मुद्रा रूबल यूक्रेन संकट की वजह से काफी दबाव में है. पांच वर्षीय सरकारी बांड पर कर्ज की अदायगी में देरी से संबंधित बीमा का प्रीमियम यून 2012 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है. उधर औद्योगिक देशों के आर्थिक सहयोग और विकास संगठन ओईसीडी ने रूस के साथ सदस्यता वार्ता रोक दी है. संगठन ने पेरिस में बताया कि इसके बदले सदस्य देश यूक्रेन के साथ सहयोग को बढ़ाने पर सहमत रहे हैं.

एमजे/एएम (रॉयटर्स, डीपीए)

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