युवाओं को लुभा रहे हैं यूरोप के धुर दक्षिणपंथी नेता | दुनिया | DW | 19.05.2019
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दुनिया

युवाओं को लुभा रहे हैं यूरोप के धुर दक्षिणपंथी नेता

धुर दक्षिणपंथी पार्टियों के बेहद युवा नेता लोगों से खुद को हल्के में ना लेने के लिए जोर देते हैं. पुराने यूरोप के समर्थक ये नेता आप्रवासन और शरणार्थियों जैसे मुद्दों पर युवाओं को अपने साथ जोड़ रहे हैं.

इस महीने हो रहे यूरोपीय चुनाव में धुर दक्षिणपंथी पार्टियों की ओर से खड़े हुए बहुत सारे उम्मीदवारों की उम्र 30 साल से भी कम है. उनके कट्टर समर्थकों की उम्र भी कुछ ऐसी ही है. बेल्जियम में तेजी से उभरते नेता ड्रीज फान लांगेनहोफ की उम्र है 26 साल, वहीं फ्रांस में नेशनल रैली स्लेट के अध्यक्ष की उम्र है केवल 23 साल. डेनमार्क में डेनिश पीपुल्स पार्टी की ओर से मुख्य उम्मीदवार की उम्र 29 साल है और वो अभी से वरिष्ठ प्रचारक की भूमिका में आ चुके हैं. स्पेन में वॉक्स पार्टी के मुख्य प्रवक्ता की उम्र 27 साल है और हाल ही में वह स्पेन की संसद के सदस्य भी बने हैं.

ये सभी उम्मीदवार असल में यूरोपीय कट्टर दक्षिणपंथी पार्टियों के उस प्रयास की बानगी दे रहे हैं जो अपने आप्रवासन-विरोधी, यूरोप-विरोधी संदेश युवा वोटरों तक पहुंचाना चाहते हैं. इन्हें लुभाने के लिए वे युवाओं की बीयर-नाइट आयोजित करने से लेकर सोशल मीडिया पर उन्हें जोड़ने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं. यूरोप के युवा वोटरों में भी समाज के बड़ी उम्र के लोगों के मुकाबले दक्षिण की ओर झुकाव ज्यादा तेजी से होता दिख रहा है. इसका सबूत हाल में इटली, फ्रांस, स्पेन और ऑस्ट्रिया में हुई वोटिंग में भी देखने को मिला. यह ट्रेंड 23 से 26 मई के बीच होने जा रहे यूरोपीय चुनावों पर भी असर दिखा सकता है. इस दौरान होने वाले चुनाव से यूरोपीय संसद की संरचना और बेल्जियम जैसे कुछ देशों में नई सरकारों का भविष्य तय होना है.

वामपंथी विचारधारा की ओर झुकाव रखने वाले एक थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटीजिक डॉयलॉग की रिसर्चर जूलिया एबनर बताती हैं, "अति दक्षिणपंथियों ने बहुत स्पष्ट रूप से युवा दर्शकों को बढ़ावा देने की कोशिशें की हैं. इसके लिए उन्होंने अपनी छवि को लगभग पूरी ही तरह बदल दिया है." वे कहती हैं कि सोशल मीडिया के यूजर्स से साथ जुड़ने में ये पार्टियां सबसे ज्यादा सक्रिय रही हैं. इसके अलावा इन पार्टियों ने समाज में व्याप्त लोगों की शिकायतों और डरों को पहचान कर, उन्हें आम लोगों की ही भाषा में सामने रखकर अपनी संस्कृति और सभ्यता के साथ जोड़ने में सफलता पाई है.

यूरोपीय चुनावों को समझें

विश्व युद्धों के खत्म होने के बाद धुर दक्षिणपंथी दल जिस हाल में थे, ये उसके बिल्कुल उलट जा रहे हैं. नाजी विचारधारा और होलोकॉस्ट में 60 लाख यहूदियों की हत्या की जिम्मेदार मानी जाने वाली हर चीज को नई सरकारें और एकजुट हो चुके यूरोप ने हाशिये पर धकेल दिया था. इस नए उभार पर विपक्षी कह रहे हैं कि उन्हीं पुराने नस्लवादी विचारों, हिंसा के आह्वान जैसी चीजों को नए आवरण में ढका छुपा के पेश किया जा रहा है. अपने ईसाई-समर्थक, इस्लाम-विरोधी विचारों से वे यूरोप की उस युवा आबादी को निशाना बना रहे हैं जिन्हें उस काल का कोई अनुभव नहीं है.

आमतौर पर वाम विचारधारा की ओर झुकाव रखने वाले युवाओं का तेजी से दक्षिण की ओर जाना हैरान करने वाला ट्रेंड है. चुनावी अनुमानों की मानें तो इटली में 18 से 34 की उम्र वाले करीब 17 फीसदी वोटरों ने 2018 में उग्र दक्षिणपंथी लीगा को चुना. 2013 में यह संख्या केवल पांच फीसदी के करीब थी. ऑस्ट्रिया में 30 फीसदी सबसे युवा वोटरों ने 2017 में फ्रीडम पार्टी को वोट दिया, जबकि 2013 के चुनाव में यह संख्या करीब 22 प्रतिशत थी. यानि 16 से 29 साल के बीच के युवाओं में यह सबसे लोकप्रिय पार्टी बन कर उभरी. जर्मनी में एएफडी के समर्थन में काफी बढ़ोत्तरी उसके समर्थन में आए युवा वोटरों के कारण ही हुई. जर्मन युवाओं में लंबे समय तक लोकप्रिय रही ग्रीन पार्टी के युवा समर्थकों में जरा भी बढ़त देखने को नहीं मिली. फ्रांस में भी जर्मनी जैसे ही हाल रहे.

यूरोपीय युवाओं के साथ किए गए तमाम सर्वेक्षणों में से इसी महीने सामने आया टीयूआई फाउंडेशन का सर्वे अहम है. युवाओं का मानना है कि आप्रवासन और शरणार्थियों जैसे मुद्दे यूरोप के लिए सबसे ऊपर हैं. पर्यावरण से जुड़ी चिंताएं दूसरे स्थान पर आती हैं. बेल्जियम ने 15 फीसदी जबकि फ्रांस के 20 फीसदी युवाओं के लिए नौकरियां ना मिलने की चिंता सबसे बड़ी है. देखना होगा कि सोशल मीडिया और चुनाव प्रचार अभियानों में युवाओं की ऐसी तमाम चिंताओं को हवा देने वाले अति दक्षिणपंथी दल और उनके युवा नेता अपने फॉलोअर्स को वोटों में तब्दील कर पाने में कितने सफल होते हैं.

आरपी/एमजे (एपी)

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