युद्ध के साए में हमास के 25 साल | दुनिया | DW | 15.12.2012
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दुनिया

युद्ध के साए में हमास के 25 साल

इस्लामी कट्टरपंथी संगठन हमास गजा पट्टी में इतना लोकप्रिय पहले कभी नहीं था लेकिन इस्राएल पर कथित जीत की खुशी कभी भी निराशा में बदल सकती है. गरीबी, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसी समस्याएं बनी हुई हैं.

गजा की इमारतों पर हमास का हरा झंडा लहरा रहा है. संगठन की स्थापना की पचीसवीं वर्षगांठ के समारोह पूरे हो चुके हैं और सालों बाद गजा पट्टी के पहले दौरे के बाद हमास प्रमुख खालिद मशाल वापस लौट गए हैं. तीन हफ्ते से हथियार खामोश हैं और हौले हौले गजा पट्टी का जीवन सामान्य होता जा रहा है.

बीते सालों में गजा में खुले ढेर सारे फैशनेबल कॉफी हाउसों में से एक में फराह, लीमा और मरियम फ्रूट कॉकटेल का ग्लास लिए बैठी हैं. वे अगले साल हाईस्कूल पास करेंगी. फिलहास उनका दिमाग ताजा विवाद में फंसा है. 17 वर्षीया फराह कहती है, "इस बात की कोई गारंटी नहीं कि ऐसा कुछ फिर नहीं होगा." मरियम जर्मनी में पली बढ़ी हैं. कुछ साल पहले उनका परिवार गजा लौट गया था. "मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं युद्ध देखूंगी. इसे मैं इतिहास की किताबों से ही जानती थी." वह डरी हुई है और लौटकर जर्मनी जाना चाहती हैं, जहां शांति है.

हमास का अपने को विजेता के रूप में देखना अचंभे की बात नहीं है. अपने को अराजनीतिक बताने वाली मरियम कहती है, "यह पहला मौका है जब हमास के लोगों ने सचमुच हमारी रक्षा की है." इस तरह की बातें अक्सर गजा में सुनी जा सकती है. इस्राएल के साथ विवाद के पहले लोगों में असंतोष था. राजनीतिशास्त्री मुखैमर अबु सादा कहते हैं, "हमास इस समय अच्छी हालत में है." उसने पहली बार इस विवाद में तेल अवीव और यरूशलम के खिलाफ मध्य दूरी के रॉकेट का इस्तेमाल किया और इस्राएली हमले के बावजूद अपना हमला जारी रखा. इसने लोगों में यह भावना दी कि कोई उनकी रक्षा कर रहा है और उनकी जीत हुई है. खालिद मशाल के दौरे ने भी हमास की बड़ा मदद की. अबु सादा कहते हैं, "सवाल यह है कि यह लोकप्रियता कितने दिन चलती है."

अप्रत्यक्ष सौदेबाजी

मिस्र की मध्यस्थता में हुआ संघर्षविराम फिलहाल कायम है. इस्लामी कट्टरपंथियों को कुछ सफलता भी मिली है. अब मछुआरे तीन के बदले छह समुद्री मील तक मछली मार सकते हैं. इस्राएली सीमा पर बफर जोन को भी छोटा किया जा रहा है. वहां जिन किसानों की जमीन है, वे फिर से अपने खेतों पर जा सकते हैं. लेकिन संयुक्त राष्ट्र के ब्यूरो का कहना है कि अभी भी वहां हिंसक वारदातें हो रही हैं.

इस्राएल और हमास के बीच युद्ध विराम की संधि पर अभी भी अप्रत्यक्ष बातचीत हो रही है. हमास राजनीतिज्ञ गाजी हमद कहते हैं, "हम मिस्र के साथ संपर्क में हैं जो समझौते की गारंटी दे रहा है." हमास का कहना है कि इस्राएल समझौते तोड़ रहा है, लेकिन वह कोई नया विवाद नहीं चाहता. फिलहाल इलाके को दोबारा बसाने पर जोर है. अरब देशों ने मदद का आश्वासन दिया है. विवाद के दौरान भी उन्होंने हमदर्दी दिखाई थी और हमास की राजनीतिक अलगाव से बाहर निकलने में मदद दी थी. पश्चिमी देशों में हमास आतंकी संगठनों की सूची पर है क्योंकि वह इस्राएल के अस्तित्व को नहीं मानता और आतंकवाद को नहीं नकारता.

मेल मिलाप की कोशिशें

हमास के लिए सकारात्मक विकास के बावजूद गजा में रहने वाले 17 लाख लोगों के सरकार के रूप में चुनौती कम नहीं हुई है. मुखमैर अबु सादा कहते हैं, "एक साल पहले बंदियों की अदला बदली के बाद भी हमास बहुत लोकप्रिय हो गया था, लेकिन दो महीने के बाद लोग नींद से जागे, मुश्किलें बनी हुई थीं, गरीबी, बेरोजगारी, नाकेबंदी, भ्रष्टाचार और नागरिक अधिकारों का हनन." हमास की लोकप्रियता जाती रही.

समा कसब भी हमास को लोकप्रिय नहीं मानती. युवा कार्यकर्ता का कहना है कि फिलहाल लोगों को युद्ध के नतीजों से छुटकारा पाना है. दूसरे युवा लोगों के साथ वे हमास और फतह के बीच राजनीतिक विभाजन का विरोध कर रही हैं. वे कहती हैं, "मुझे समझ में नहीं आता कि लोग ऐसी प्रतिक्रिया क्यों कर रहे हैं. सिर्फ इसलिए कि उन्होंने इस्राएल का प्रतिरोध किया है?

पिछले दिनों में हमास और फतह के बिच मेलमिलाप के बारे में बहुत कुछ खबर आई है. पांच साल से आंतरिक विवाद अनसुलझा है, हालांकि गजा और वेस्ट बैंक का बहुमत सुलह चाहता है. लेकिन दोनों पक्ष कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे. समा कसब राजनीतिक नारों को सुनने को तैयार नहीं. "अब चुनाव होने चाहिए. लेकिन उसमें न तो हमास की और न ही फतह की दिलचस्पी है." कॉफी हाउस में बैठी एक और महिला कहती है, मुख्य बात है कि शांति रहे, कौन जानता है कि कल क्या हो? गजा के लोग इसी डर के साथ जी रहे हैं.

रिपोर्ट: तान्या क्रेमर/एमजे

संपादन: निखिल रंजन

LINK: http://www.dw-world.de/dw/article/0,,16451291,00.html

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