म्यांमार पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी में अमेरिका | दुनिया | DW | 24.10.2017
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दुनिया

म्यांमार पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी में अमेरिका

रोहिंग्या मुसलमानों के मुद्दे पर अमेरिका म्यांमार के खिलाफ कई कदमों पर विचार कर रहा है, जिनमें प्रतिबंध भी शामिल हैं. इन कदमों से उन अधिकारियों को निशाना बनाया जाएगा जो रोहिंग्या लोगों के खिलाफ अभियान में शामिल हैं.

 

रोहिंग्या मसले पर अमेरिका ने म्यांमार के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है. अमेरिका म्यांमार पर प्रतिबंध लगाने की योजना बना रहा है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हीथर नॉर्ट ने कहा, "अमेरिका रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ रखाइन प्रांत में हुई हिंसा पर गहरी चिंता प्रकट करता है. अब यह अनिवार्य हो गया है कि इस हिंसा और ज्यादती के लिए जिम्मेदार लोगों और संस्थाओं की जवाबदेही तय की जाए." नॉर्ट ने बताया कि अमेरिकी कानून के तहत उपलब्ध जवाबदेही के विकल्पों को तलाशा जा रहा है. म्यांमार की सेना के जो सदस्य रखाइन प्रांत के उत्तरी हिस्से में चल रहे अभियान में शामिल हैं, वे अमेरिका के सहायता कार्यक्रमों का हिस्सा नहीं बन पाएंगे.

यूरोपीय संघ की प्रतिबद्धता

बांग्लादेश पहुंचे रोहिंग्या शरणार्थियों की मदद के लिए सोमवार को जेनेवा में हुई संयुक्त राष्ट्र की एकदिवसीय फंडरेजिंग कॉन्फ्रेंस में फरवरी तक 43.4 करोड़ डॉलर इकट्ठा करने का लक्ष्य रखा गया. सम्मलेन में यूरोपीय आयोग ने रोहिंग्या शरणार्थियों की मदद के लिए 3 करोड़ यूरो देने का वादा किया है. कॉर्डिनेशन ऑफ ह्यूमेनिटेरियन अफेयर्स मामलों पर संयुक्त राष्ट्र में काम कर रहे मार्क लोकॉक ने कहा, "हमें बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए ज्यादा धन चाहिए. यह अचानक पैदा हुआ संकट नहीं है बल्कि यह दशकों से हो रहे उत्पीड़न, हिंसा और विस्थापन का ताजा दौर है." कॉन्फ्रेंस में रोहिंग्या समुदाय के लिए विभिन्न सरकारों ने तकरीबन 34.5 करोड़ डॉलर की रकम देने का वादा किया है. संयुक्त राष्ट्र ने इसे एक "उत्साहवर्धक" कदम बताया है.

तकरीबन 9 लाख शरणार्थी

म्यांमार के रखाइन प्रांत में हिंसा और सैन्य कार्रवाई के बीच अगस्त से अब तक तकरीबन छह लाख से अधिक रोहिंग्या मुसलमान बांग्लादेश का रुख कर चुके हैं. इनमें बड़ी संख्या महिलाओं और बच्चों की है. लगभग तीन लाख रोहिंग्या बांग्लादेश में पहले से ही रह रहे हैं. इस तरह वहां अब रोहिंग्या लोगों की संख्या लगभग नौ लाख तक पहुंच सकती है. संयुक्त राष्ट्र में बांग्लादेश के राजदूत शमीम अहसान ने जेनेवा में कहा, "बांग्लादेश एक बेकाबू स्थिति का सामना कर रहा है." उन्होंने बताया कि बांग्लादेश सरकार म्यांमार के साथ इस मुद्दे पर बातचीत कर रही है लेकिन म्यांमार लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि रोहिंग्या शरणार्थी बांग्लादेश से अवैध तरीके से आये आप्रवासी हैं. वहीं रोहिंग्या खुद को पश्चिमी रखाइन से जुड़ा मानते हैं. अहसान के मुताबिक, "तमाम दावों के बावजूद रखाइन प्रांत में रोहिंग्या लोगों के खिलाफ हिंसा नहीं थम रही है."

यूरोपीय संघ के साथ कॉन्फ्रेंस की मेजबानी करने वाले कुवैत ने 1.5 करोड़ डॉलर देने का आश्वासन दिया है. ब्रिटेन ने 6.2 करोड़ डॉलर और ऑस्ट्रेलिया ने तकरीबन 1 करोड़ डॉलर की प्रतिबद्धता जतायी है.

एए/एके (रॉयटर्स, डीपीए, एएफपी)

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