मौत के बाद भी हरकत में रहता है इंसान का शरीर | दुनिया | DW | 16.09.2019
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages
विज्ञापन

दुनिया

मौत के बाद भी हरकत में रहता है इंसान का शरीर

एक ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिक ने यह दावा किया है कि मानव शरीर मृत्यु के बाद एक साल से अधिक समय तक हरकत में रहता है.

यह एक ऐसा निष्कर्ष है जो दुनिया भर के जासूसों और पैथोलॉजिस्ट के लिए उपयोग साबित हो सकता है. वैज्ञानिक एलिसन विल्सन ने 17 महीने तक एक शव का अध्ययन और उसकी फोटोग्राफी की. ऐसा करने के बाद उन्होंने पाया कि इंसान मौत के बाद भी पूरी तरह से शांत नहीं रहता है. अध्ययन में पाया गया कि शुरू में हाथ शरीर के समीप था, जो कुछ समय बाद दूर हो गया. वे कहती हैं, "हमें लगता है कि गति का संबंध विघटन की प्रक्रिया से है क्योंकि विघटन के दौरान शरीर ममी के रूप में बदलता है और लिगामेंट्स सूख जाते हैं."

इस अध्ययन के लिए विल्सन प्रत्येक महीने कैडवर्स से सिडनी तक तीन घंटे की हवाई यात्रा कर के जाती थीं और शव का परीक्षण करती थीं. जिस शव का वह अध्ययन करती थीं, वह उन 70 शवों में से एक था जिसे ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े शहर के बाहर में बुशलैंड इलाके में बनाए गए फार्म में रखा गया है. यह दक्षिणी गोलार्ध का एकमात्र "बॉडी फार्म" है. आधिकारिक तौर पर इसे ऑस्ट्रेलियन फैसिलिटी फॉर ताहोनोमिक एक्सपेरिमेंटल रिसर्च (एएफटीईआर) के रूप में जाना जाता है. यहां पोस्टमार्टम मूवमेंट पर रिसर्च हो रहा है.

विल्सन और उनके सहयोगी टाइम लैप्स कैमरों का उपयोग कर मृत्यु के समय का अनुमान लगाने के लिए आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली प्रणाली में सुधार करने की कोशिश कर रहे थे. इस प्रक्रिया में पाया गया कि मानव शरीर वास्तव में घूमते हैं. कैमरा और इस प्रक्रिया के सहारे किए गए अध्ययन में पाया गया कि मानव शरीर चारों ओर हलचल करता है. उनकी यह खोज हाल ही में "फोरेंसिक साइंस इंटरनेशनलः सिनर्जी" जर्नल में छपी है.

शव के मूवमेंट की बेहतर समझ और विघटन की गति का उपयोग कर पुलिस किसी मृतक के मौत की सटीक जानकारी प्राप्त करने में कर सकेगी. वैज्ञानिक को उम्मीद है कि इस जानकारी से उन गुमशुदा लोगों की संख्या में कमी आ सकेगी जिनका संबंध अज्ञात लोगों से जोड़ दिया जाता है. पोस्टमार्टम मूवमेंट की अच्छी समझ से मौत के गलत कारण या अपराध की गलत व्याख्या में कमी आ सकेगी. विल्सन कहती हैं, "वे एक अपराध स्थल, पीड़ित के शरीर की अवस्था और घटनास्थल से मिले किसी साक्ष्य का नक्शा तैयार करेंगे और इस तरह से वे मौत की वजह को समझ सकते हैं."

सीक्यू यूनिवर्सिटी से क्रिमिनोलॉजी में ग्रेजुएट विल्सन कहती हैं कि वे एक बार माया सभ्यता के मिले कंकालों के अवशेषों को वर्गीकृत करने में मदद करने के लिए मैक्सिको गईं थीं और वहां से लौटने के बाद अपनी इस प्रोजेक्ट की शुरूआत की. वे कहती हैं, "एक बच्चे की मौत के बाद मेरी दिलचस्पी जगी. मैं हमेशा से यह जानना चाहती थी कि मृत्यु के बाद शरीर कैसे टूट जाता है. अपने पिछले अध्ययन में भी मैंने एक मूवमेंट पाया था. इसके बाद मैंने शोध किया और पाया कि दुनिया में कहीं भी इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है. इसलिए मैंने सोचा कि मैं जो करने जा रही हूं, वह ठीक है."

आरआर/आरपी (एएफपी)

_______________

हमसे जुड़ें: WhatsApp | Facebook | Twitter | YouTube | GooglePlay | AppStore

DW.COM

संबंधित सामग्री

विज्ञापन