मैर्केल की गठबंधन सरकार पर जर्मनों को अब भी भरोसा | दुनिया | DW | 11.06.2019
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दुनिया

मैर्केल की गठबंधन सरकार पर जर्मनों को अब भी भरोसा

जर्मनी में चांसलर अंगेला मैर्केल की गठबंधन सरकार में शामिल एसपीडी ने यूरोपीय चुनावों में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया. कयास लगाए जाने लगे कि सरकार गिर सकती है, लेकिन सर्वे बताता है कि लोग अब भी सरकार पर भरोसा कर रहे हैं.

जर्मनी में सरकार चला रहा क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक पार्टी (सीडीयू) और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (एसपीडी) का गठबंधन भले ही लड़खड़ाने लगा हो, लेकिन एक सर्वे के नतीजे बताते हैं कि अब भी अधिकतर जर्मन 2021 तक इस गठबंधन सरकार को काम करते देखना चाहते हैं. चांसलर अंगेला मैर्केल की सीडीयू के साथ गठबंधन में उसकी सहोदर पार्टी सीएसयू और जर्मनी की सबसे पुरानी पार्टी एसपीडी शामिल है. बतौर चांसलर मैर्केल का यह चौथा कार्यकाल है जिसे अब अंतिम माना जा रहा है.

जर्मनी के टीवी चैनल आरटीएल और एनटीवी ब्रॉडकास्टर की ओर से किए गए ट्रेंडबेरोमीटर पोल में हिस्सा लेने वाले महज एक तिहाई लोगों ने कहा कि ये गठबंधन समाप्त हो जाए. वहीं 59 फीसदी लोगों ने कहा कि दोनों पार्टियों को अपना गठबंधन कम से कम साल 2021 तक चलाकर सरकार का कार्यकाल पूरा करना चाहिए. वहीं 8 फीसदी लोगों ने कहा कि वे नहीं जानते कि क्या सबसे अच्छा होगा. इस सर्वे में सरकार को पसंद और नापसंद करने वाले करीब एक हजार लोगों को शामिल किया गया था. यह भी देखा गया कि जर्मनी के धुर राष्ट्रवादी दल अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) के समर्थक सत्ताधारी गठबंधन को खत्म होने के पक्ष में थे.

हाल में हुए यूरोपीय चुनावों में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली ग्रीन पार्टी के महज 40 फीसदी समर्थक मानते हैं कि इस गठबंधन सरकार को खत्म होना चाहिए. वहीं लेफ्ट पार्टियों के समर्थकों में 49 फीसदी गठबंधन खत्म करने के पक्ष में नजर आए. कारोबारियों की पार्टी माने जाने वाली फ्री डेमोक्रेटिक पार्टी (एफडीपी) के समर्थक गठबंधन सरकार के जस का तस बने रहने के पक्ष में है. एफडीपी के महज 38 फीसदी समर्थकों ने कहा कि गठबंधन को खत्म होना चाहिए.

पहचान का संकट झेलती एसपीडी

सर्वे में यह भी सामने आया कि गठबंधन सरकार गिरने की स्थिति में करीब 53 फीसदी लोग मानते हैं कि नए चुनाव करवाना ही बेहतर विकल्प होगा. वहीं एक चौथाई से भी कम लोग गठबंधन में फेरबदल कर मैर्केल की सीडीयू के साथ ग्रीन और एफडीपी को पसंद कर सकते हैं. वहीं 54 फीसदी एफडीपी समर्थक तो इस नई व्यवस्था को पसंद कर सकते हैं लेकिन महज 16 फीसदी ग्रीन समर्थक ही इसे स्वीकार कर सकते हैं. 

हाल में आए यूरोपीय चुनावों के नतीजों से साफ है कि जर्मनी का सत्ताधारी गठबंधन जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पा रहा है. गठबंधन की नाकामी एसपीडी के लिए एक बड़ी समस्या बन गया है क्योंकि इसकी लोकप्रियता आम जनता के बीच लगातार घट रही है. एसपीडी ने अपने दस साल, मैर्केल के चौदह साल के नेतृत्व वाले गठबंधन में बिताए हैं, जिसके चलते सीडीयू और चांसलर मैर्केल की स्थिति तो मजबूत हुई है लेकिन एसपीडी का वोट बैंक लगातार घटा है, और इसके समर्थक विपक्षी दलों का रुख करने लगे हैं. 

यूरोपीय चुनावों में खराब प्रदर्शन के बाद एसपीडी नेता आंद्रेया नालेस ने अपना पद छोड़ दिया है.  फिलहाल एसपीडी नए नेतृत्व की तलाश में है. कई जानकारों का मानना है कि नया नेता एसपीडी को कैबिनेट से बाहर ले जाकर उसकी नई पहचान बनाने के लिए काम करेगा.

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डार्को जांजेविक /एए

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