मैर्केल और आबे ने मांगी बंधकों की रिहाई | दुनिया | DW | 30.04.2014
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दुनिया

मैर्केल और आबे ने मांगी बंधकों की रिहाई

जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बर्लिन दौरे पर जर्मन चांसलर ने यूरोपीय संघ से अपील की कि जापान के साथ मुक्त व्यापार संधि को जल्द पूरा कर लिया जाए. दोनों नेताओं ने यूक्रेन में ओएससीई के बंधकों की रिहाई की मांग की.

बर्लिन में आबे के साथ बातचीत के बाद मैर्केल ने कहा कि यह संधि जापान के साथ निर्यात चैंपियन जर्मनी के कारोबारी रिश्ते भी एकदम बेहतर कर देगी. चांसलर ने कहा कि हम दोनों की ही इच्छा है कि यह संधि पूरी की जाए. उन्होंने 2015 को इसके लिए अच्छा साल बताया. मैर्केल ने कहा कि वे अगले साल जापान जाएंगी. उन्होंने ऊर्जा के क्षेत्र के अलावा सामाजिक क्षेत्र में जापान के साथ सहयोग बढ़ाने की जर्मनी की तैयारी पर भी जोर दिया ताकि "आबादी में बदलाव की साझा चुनौती का सामना किया जा सके." जन्मदर में कमी के कारण बूढे होते समाज की ओर इशारा करते हुए मैर्केल ने कहा, "हम एक दूसरे से बहुत कुछ सीख सकते हैं."

दोनों नेताओं ने दक्षिण चीन सागर की स्थिति और विवाद के समाधान की संभावना की भी चर्चा की. मैर्केल ने कहा, "दोनों इस पर एकमत हैं कि अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को समुद्री सीमा के विवाद में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए." जापान और चीन के बीच इस इलाके को लेकर सालों से विवाद है. राजनीतिक प्रेक्षकों को डर है कि यह विवाद कभी भी सशस्त्र विवाद बन सकता है.

Abe bei Merkel 30.04.2014 Berlin PK

आबे और मैर्केल

जापान और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार संधि पर बातचीत 2013 में शुरू हुई. यूरोपीय आयोग को उम्मीद है कि जापान के साथ मुक्त व्यापार संधि होने के बाद यूरोप का जापान को निर्यात 30 फीसदी बढ़ जाएगा. इसके जवाब में यूरोपीय देशों को होने वाले जापानी आयात में भी 25 फीसदी की वृद्धि हो सकती है. यूरोपीय संघ का मकसद इस संधि के जरिए सिर्फ सीमा शुल्क में कमी करवाना नहीं है. वह बहुत सी औद्योगिक शाखाओं में आयात कोटा और औद्योगिक मानकों जैसी गैर टैरिफ बाधाओं को भी मिटाना चाहता है.

बर्लिन में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से बात करते हुए शिंजो आबे ने कहा कि मुक्त व्यापार संधि उनकी सरकार की विकास रणनीति का महत्वपूर्ण पाया है. जापान मुख्य रूप से यूरोप में अपनी कारों के निर्यात में सीमा शुल्क में कमी चाहता है. ऐसा होने से जर्मन कार कंपनियों को अपने घरेलू बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है.

मैर्केल और आबे ने यूक्रेन विवाद पर भी चर्चा की. दोनों देश जी-7 के सदस्य हैं और रूस को इस धड़े से बाहर करने और प्रतिबंध लगाने में साथ रहे हैं. जर्मन चांसलर ने रूस के प्रतिबंधों का जवाब देने की धमकी को अस्वीकार कर दिया और पूर्वी यूक्रेन में यूरोपीय सुरक्षा और सहयोग संगठन के बंधक बनाए गए पर्यवेक्षकों की रिहाई की मांग की. जापान के प्रधानमंत्री ने भी बंधकों की रिहाई की मांग करते हुए कहा कि यूक्रेन में हो रहा विकास जी-7 के देश जापान के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है. रूस को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के जिम्मेदार सदस्य के रूप में पेश आना चाहिए. उन्होंने कहा कि रूस के साथ संवाद जरूरी है लेकिन जापान जी-7 के दूसरे देशों की तरह प्रतिबंधों के लिए भी तैयार है.

एमजे/एएम (एएफपी, रॉयटर्स)