मैं नहीं गा सकता ′डीके बोस′: कैलाश | लाइफस्टाइल | DW | 17.06.2011
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लाइफस्टाइल

मैं नहीं गा सकता 'डीके बोस': कैलाश

'डीके बोस' गाने पर विवाद जारी है. मशहूर गायक कैलाश खेर ने इस गाने को बेमतलब करार दिया है. उनका कहना है कि वह कभी 'डीके बोस' जैसे गाने नहीं गाएंगे. फिल्म निर्माताओं पर साधा निशाना.

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आमिर खान के बैनर तले बन रही फिल्म 'डेल्ही बेली' के एक गाने का टाइटल 'डीके बोस' है लेकिन गायकी में डीके बोस तेजी से और बार बार आता है, जिसकी वजह से यह एक अपशब्द सा लगने लगता है. यही कारण है कि सुर्खियों और विवादों में है.

गाने से नाराजगी जताने वालों में सूफी गायकी के फनकार कैलाश खेर भी हैं. 37 साल के कैलाश मानते है कि गायकों को गाने में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, जो ठीक नहीं हैं. उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि संगीत विचारों को प्रकट करने का जरिया है. मैं नहीं समझता कि मैं कभी अर्थहीन गाने सकता हूं. मैं कभी डीके बोस जैसे गाने नहीं गा सकता हूं.“

कैलाश ने ऐसे गानों के लिए फिल्म निर्माताओं को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा, ऐसे गाने सिर्फ इसलिए चल रहे हैं क्योंकि फिल्म निर्माताओं को लगता है कि ये गाने फिल्म को हिट करने में मदद करेंगे, इसलिए आइटम नंबर बनाए जा रहे हैं.

टूटा टूटा एक परिंदा, तेरी दीवानी, सैंय्या, पिया रे पिया, तौबा तौबा और चक दे फट्टे जैसे हिट गानों से अलग पहचान बनाने वाले गायक को उम्मीद है कि बॉलीवुड इस तरह के गानों वाली सोच से आगे निकलेगा. वह कहते है कि संगीत का अर्थ सिर्फ बॉलीवुड नहीं है, लोगों को गायकी के अन्य रंग भी जानने का हक है.

रिपोर्ट: पीटीआई/ओ सिंह

संपादन: उभ

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