मुश्किल वक्त में पाकिस्तान के वित्तमंत्री का इस्तीफा | दुनिया | DW | 18.04.2019
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दुनिया

मुश्किल वक्त में पाकिस्तान के वित्तमंत्री का इस्तीफा

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से सहायता पाने की कोशिशों के बीच ही पाकिस्तान के वित्त मंत्री ने इस्तीफा दे दिया है. गुरुवार को वित्त मंत्री असद उमर ने इस्तीफे का एलान कर दिया. फिलहाल उनकी जगह कौन लेगा यह तय नहीं है.

प्रधानमंत्री इमरान खान की कैबिनेट के सबसे कद्दावर मंत्रियों में से एक असद उमर को बेलआउट पैकेज पर बातचीत करने की जिम्मेदारी दी गई थी. पाकिस्तान के पास फिलहाल नगद की भारी कमी है और देश भुगतान संकट से जूझ रहा है. पिछले साल सत्ता में आई इमरान खान की सरकार के सामने गंभीर चुनौती है क्योंकि पाकिस्तानी रुपये की कीमत 2018 की शुरुआत से लेकर अब तक 30 फीसदी से ज्यादा नीचे गिर चुकी है. इसके नतीजे में महंगाई काफी ज्यादा बढ़ गई है. ऐसे कठिन वक्त में वित्त मंत्री के इस्तीफे की आखिर क्या वजह हो सकती है?

असद उमर ने ट्वीट किया है, "कैबिनेट में फेरबदल के तहत प्रधानमंत्री ने इच्छा जताई कि मैं वित्त की बजाय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालूं. हालांकि मैंने उनसे इस बात पर रजामंदी ले ली है कि मैं कैबिनेट में कोई भी पद ना लूं. मेरा यकीन है कि इमरान खान पाकिस्तान की सबसे बड़ी उम्मीद हैं और वो इंशाअल्लाह एक नया पाकिस्तान बनाएंगे."

प्रधानमंत्री के कार्यालय से इस मसले पर तुरंत कोई बयान नहीं आया है. ना ही इस बात की पुष्टि की गई है कि उनकी जगह कौन लेगा. उमर की गैरमौजूदगी का आईएमएफ के साथ चल रही बातचीत पर क्या असर होगा फिलहाल यह भी साफ नहीं है. उमर ने जल्दबाजी में बुलाई गई प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि नए वित्त मंत्री देश की "मुश्किल अर्थव्यवस्था" को संभालेंगे. असद उमर ने यह भी कहा, "कई बार हमें कड़े फैसले लेने पड़ते हैं और तब हमें थोड़ा धैर्य दिखाने की जरूरत होती है. उमर ने चेतावनी भी दी, "ऐसे किसी चमत्कार की उम्मीद मत रखिए कि अगले तीन महीने में दूध और शहद की नदियां बहने लगेंगी."

असद उमर ने इन खबरों को अफवाह बताया है कि वो सेना और सरकार के बीच तनातनी की वजह बन गए थे इसीलिए उन्हें हटना पड़ा है. उमर ने यह भी कहा कि वे इमरान खान की तहरीक ए इंसाफ पार्टी में बने रहेंगे. कराची में इमर्जिंग इकोनॉमिक्स रिसर्च के प्रमुख, अर्थशास्त्री मुजम्मील असलम का कहना है कि उमर ने अर्थव्यवस्था को ठीक करने के लिए "कड़े फैसले" लिए हैं. असलम के मुताबिक, "मेरी राय में वो राजनीति के शिकार हुए हैं और दबाव को कम करने के लिए उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है."

पाकिस्तान 1980 के बाद से कई बार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की शरण में गया है. आखिरी बार 2013 में पाकिस्तान को 6.6 अरब डॉलर की सहायता मिली थी. उमर कई बार कहते रहे हैं कि बहुत जल्द करार हो जाएगा और यह आखिरी बार होगा. इसी हफ्ते की शुरूआत में राजस्व राज्य मंत्री हम्मद अजहर ने ट्वीट कर कहा था कि उमर आईएमएफ के साथ हाल के वॉशिंगटन दौरे में "सैद्धांतिक रुप से सहमति" बना चुके हैं. करार इस महीने में किसी वक्त हो सकता है.

हालांकि जानकारों ने चेतावनी दी है कि आईएमएफ की कड़ी शर्तें इमरान खान के इस्लामिक वेलफेयर स्टेट के लिए बड़ी योजनाओं पर असर डाल सकती हैं. आईएमएफ का पूर्वानुमान है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था जून 2019 को खत्म हो रहे वित्तीय वर्ष में 2.9 फीसदी की दर से विकास करेगी. पिछले वित्तीय वर्ष में यह दर 5.8 फीसदी थी. सरकार पहले ही मुसीबतें झेल रही है. रुपये की लगातार गिरती कीमतों ने महंगाई की दर को 9.4 फीसदी तक पहुंचा दिया है. रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ने से लोगों का गुस्सा भी बढ़ रहा है.

पाकिस्तान ने मध्य पूर्व में अपने सबसे बड़े कारोबारी सहयोगी संयुक्त अरब अमीरात से अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए 3 अरब डॉलर का कर्ज लिया है. इसके साथ ही पाकिस्तान ने सऊदी अरब से 6 अरब डॉलर का कर्ज भी लिया है. इसके साथ ही 12 महीने के लिए नगद हासिल करने का भी भरोसा सऊदी अरब ने इमरान खान को दिया है. इमरान खान ने बीते साल अक्टूबर में सऊदी अरब का दौरा किया था. पाकिस्तान को अरबों डॉलर का कर्ज चीन से भी बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं के लिए मिला है. 

एनआर/एमजे (एएफपी)

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