मुझे नीचा दिखाया गया: शशि थरूर | ताना बाना | DW | 02.04.2010
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ताना बाना

मुझे नीचा दिखाया गया: शशि थरूर

अक्सर विवादों में घिरे रहने वाले विदेश राज्य मंत्री शशि शरूर ने कहा है कि उन्हें कई मौक़ों पर नीचा दिखाया गया क्योंकि भारतीय समाज में ऐसे लोग हैं जो इस तरह की हरक़तों का आनंद लेते हैं.

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विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर

संयुक्त राष्ट्र में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके शशि थरूर कांग्रेस पार्टी के टिकट पर सांसद बने. विदेश राज्य मंत्री का पद संभालने के बावजूद वह सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट ट्विटर पर सक्रिय रहे लेकिन उसके चलते कई बार वह विवादों में भी फंस गए. 

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सीएनएन आईबीएन को दिए एक इंटरव्यू में थरूर ने बताया कि वह भारतीय राजनीति की संस्कृति को बदलना चाहते थे क्योंकि उसमें बहस को तरज़ीह नहीं दी जाती. "मुझे नीचा दिखाने की कोशिश हुई हैं लेकिन मैं इसे मुद्दा नहीं बनाना चाहता हूं. सच्चाई यह है कि जब आपके विचार सीधे सात लाख लोगों तक पहुंच सकते हैं तो हर नेता लोगों से संपर्क स्थापित करना चाहता है."

थरूर का कहना है कि कुछ विवाद उनकी ओर से इस्तेमाल की गई भाषा के चलते पनपे. जब उनसे पूछा गया कि क्या वह मानते हैं कि भारतीय राजनीति की भाषा पूरी तरह नहीं समझ पाए तो थरूर ने जवाब दिया, "मैं इस बात से इनकार नहीं कर सकता." थरूर कहते हैं कि राजनीतिक संस्कृति बदलनी थोड़ी मुश्किल है क्योंकि उनके पास उतना रूतबा या अधिकार नहीं हैं.

सरकारी नीतियों के संबंध में ट्विटर पर मैसेज को भी थरूर सही ठहराते हैं. थरूर के मुताबिक़ ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ऐसा कर रहे हैं, ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड मिलिबैंड ट्विट करते हैं और अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन भी ट्विटर पर संदेश देती हैं. जब वह दिल्ली यात्रा पर आई थीं तो उनके कार्यक्रमों से जुड़ी जानकारी पर कई ट्विट भेजे गए.

विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर को एक विवाद पर अफ़सोस ज़रूर है. वीज़ा नियमों पर सरकार के फ़ैसले पर उन्होंने ट्विटर पर संदेश भेजा था जिससे विवाद खड़ा हो गया था. थरूर के मुताबिक़ भारत की राजनीतिक संस्कृति ऐसी नहीं है जहां मुद्दों पर बहस का स्वागत किया जाता हो. वैसे थरूर इकॉनॉमी क्लास में भेड़ बकरियों के सफ़र के मुद्दे पर भी मुश्किलों में आ गए थे.

रिपोर्ट: एजेंसियां/एस गौड़

संपादन: ए कुमार

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