मुंबई पुलिस से गुस्साए लोग | दुनिया | DW | 20.11.2012
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

मुंबई पुलिस से गुस्साए लोग

बाल ठाकरे की मौत के बाद फेसबुक पर स्टेटस लिखने वाली लड़की इस कदर घबरा गई है कि उसने हमेशा के लिए फेसबुक से तौबा कर ली. इस बीच मुंबई पुलिस की भद्द पिट रही है और बचाव की कार्रवाई करते हुए उसने कुछ शिव सैनिकों को पकड़ा है.

मुंबई पुलिस ने बताया कि बाल ठाकरे के अंतिम संस्कार के दौरान जिस तरह मुंबई थमी हुई थी, उसे लेकर एक लड़की ने फेसबुक पर स्टेटस लिखा, जिसे उसकी फेसबुक फ्रेंड ने लाइक किया. इसके बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया. हालांकि थोड़ी देर बाद उन्हें छोड़ दिया गया. खास बात यह है कि फेसबुक स्टेटस में कहीं भी बाल ठाकरे का नाम नहीं लिया गया.

इन्हें डर है कि शिव सैनिक अब उनके खिलाफ हिंसक कार्रवाई करेंगे. सोमवार को मामला पहली बार सामने आने के बाद ही शिव सैनिकों ने एक लड़की के चाचा के क्लीनिक में घुस कर तोड़ फोड़ की. इसके बावजूद भारतीय मीडिया ने बिना सोचे समझे उन लड़कियों का नाम सार्वजनिक कर दिया है. भारत के सामाजिक विश्लेषकों ने सवाल उठाया था कि अगर हिंसा भड़कने या कानून व्यवस्था बिगड़ने के खतरे को देखते हुए मुंबई पुलिस लड़कियों को पकड़ सकती है, तो वही पुलिस उन शिव सैनिकों के खिलाफ क्यों नहीं कार्रवाई कर सकती है, जिन्होंने क्लीनिक में घुस कर तोड़ फोड़ की.

शर्मसार होने के बाद मुंबई की पुलिस ने एक दिन बाद नौ शिव सैनिकों को हिरासत में लिया है. ठाणे ग्रामीण के एसपी रवींद्र सेनगावकर ने बताया, "अभी तक हमने क्लीनिक में तोड़ फोड़ के मामले में नौ लोगों को पकड़ा है. हम कुछ और लोगों की तलाश कर रहे हैं."

इस बीच जिस लड़की को गिरफ्तार किया गया था, वह इतना घबरा गई है कि कभी भी फेसबुक नहीं इस्तेमाल करने का फैसला कर चुकी है. उसने इस मुद्दे पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी. मामले को तूल पकड़ता देख उसने सिर्फ यही कहा कि "ठाकरे महान आदमी थे और वह उनकी इज्जत करती थी."

उसने फेसबुक पर जो पोस्ट डाली थी, उसमें मुंबई को बंद किए जाने पर सवाल था और कहा गया था कि क्या भगत सिंह या राजगुरु को कभी याद नहीं किया जा सकता. इस पोस्ट को लाइक करने वाली लड़की को भी गिरफ्तार किया गया, जिस पर वह काफी खिन्न है, "मुझे अफसोस है कि मैंने ऐसा किया. ऐसा नहीं होना चाहिए था. मुझे सपने में भी ख्याल नहीं था कि मुझे अदालत जाना पड़ेगा. हमने जो किया, वह कोई अपराध नहीं था. अब मैं फेसबुक पर कुछ भी डालने से पहले दो बार सोचूंगी."

शिव सेना के एक कार्यकर्ता ने पुलिस में शिकायत की, जिसके बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया. फेसबुक कांड का पता लगने के बाद 40 से ज्यादा शिव सैनिक इस लड़की के चाचा के क्लीनिक पर पहुंच गए. पुलिस का कहना है कि 50 से ज्यादा लोगों के खिलाफ इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है.

इस घटना के बाद भारतीय मीडिया और सामाजिक क्षेत्रों में लोगों का गुस्सा नजर आया. भारतीय प्रेस काउंसिल के प्रमुख मार्कंडेय काटजू ने उन पुलिसकर्मियों के खिलाफ फौरन कार्रवाई की मांग की. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

टेलीकॉम मंत्री कपिल सिब्बल ने लड़कियों के खिलाफ पुलिस केस को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताया है, वहीं केंद्रीय आईटी मंत्री मिलिंद देवड़ा ने कहा है कि इस मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए.

कई दूसरे विश्लेषकों ने भी इस पूरे कांड पर सवाल उठाए हैं. कई अखबारों ने इस मामले में संपादकीय लिखे हैं.

फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल नेटवर्किंग साइटों पर भी इस मुद्दे को जोर शोर से उठाया गया है और ज्यादातर लोगों ने इन दोनों लड़कियों को बेकसूर बताया है. यहां तक की उस लड़की का इंटरनेट पर पड़े पोस्ट को भी लोग अपना स्टेटस बना रहे हैं.

एजेए/एएम (एपी, पीटीआई)

DW.COM

विज्ञापन