मिलेंगे ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के नेता | दुनिया | DW | 16.02.2012
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages
विज्ञापन

दुनिया

मिलेंगे ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के नेता

ईरान, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के नेता गुरुवार से इस्लामाबाद में त्रिपक्षीय वार्ता के लिए मिल रहे हैं. मुश्किल वक्त में हो रही दो दिवसीय वार्ता को आपसी संबंधों को बेहतर बनाने की तीनों देशों की कोशिश माना जा रहा है.

सम्मेलन के केंद्र में आतंकवाद के खिलाफ युद्ध और ड्रग तस्करी पर बातचीत रहेगी. अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई ने सम्मेलन से पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह पाकिस्तान पर उन्हें प्रमुख अफगान तालिबान नेताओं के करीब लाने के लिए दबाव डालना चाहते हैं. अफगानिस्तान तालिबान नेताओं को शांति वार्ता की मेज पर लाना चाहता है. तालिबान लड़ाकों के साथ अफगानिस्तान में चल रहे युद्ध को सुलझाने में पाकिस्तान की बड़ी भूमिका मानी जा रही है. अफगानिस्तान का मानना है कि पाकिस्तान ने अब तक उसकी चिंताओं पर बहुत ध्यान नहीं दिया है और अब तक आपसी सहयोग भी बहुत ईमानदारी भरा नहीं रहा है.

तालिबान नेताओं को पनाह

अफगानिस्तान का पाकिस्तान पर आरोप है कि वह तालिबान के नेताओं की रक्षा कर रहा है और उन्हें पाकिस्तान में छुपने की अनुमति दे रहा है. लेकिन इस बात से पाकिस्तान ने हमेशा इंकार किया है. विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान लड़ाकों को अफगानिस्तान में भारत के प्रभाव को कम करने के लिए इस्तेमाल कर रहा है. अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जटिल रिश्तों को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तानी विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर ने कुछ दिन पहले अपनी अफगानिस्तान यात्रा के बाद कहा कि उन्हें "अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच विवाद कम होता दिख रहा है और यदि पाकिस्तान से मदद मांगी जाती है तो वह अफगानिस्तान में सक्रिय लड़ाकों को शांति का रास्ता अपनाने के लिए कहेगा." रिश्तों में सुधार की पुष्टि करते हुए अफगान राष्ट्रपति के प्रवक्ता ऐमल फैजी ने कहा, "त्रिपक्षीय वार्ता और राष्ट्रपति करजई की पाकिस्तान में धार्मिक नेताओं से भी बातचीत के पीछे का मकसद यह है कि धीरे धीरे बेहतर हो रहे रिश्तों को मजबूत बनाया जाए." करजई 2009 से तीसरी बार पाकिस्तान आ रहे हैं.

बातचीत पर अमेरिका की बारीक नजर

ईरान, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बातचीत मुश्किल वक्त में हो रही है. पाकिस्तान में अल कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन को मारे जाने के बाद अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों में खटास आ गई है. दूसरी ओर ईरान पर अमेरिका के तेवर भी तीखे होते जा रहे हैं क्योंकि अमेरिका को डर है कि वह परमाणु हथियार बनाने के अपने प्रोग्राम में तेजी ला रहा है. साथ ही अमेरिका पाकिस्तान के इस फैसले से भी नाखुश है कि ईरान पाकिस्तान को 2012 से नए पाईपलाईन के जरिए गैस सप्लाई करेगा. डील पर 2010 में ही हस्ताक्षर हुए थे. लेकिन अमेरिका नहीं चाहता कि आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में उसके सबसे महत्वपूर्ण साझेदार पाकिस्तान और पड़ोसी ईरान के बीच करीबी रिश्ते हों. इस्लामाबाद में दो दिन चलने वाले त्रिपक्षीय सम्मेलन में पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद और अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई भाग ले रहे हैं.

रिपोर्ट: एएफपी, डीपीए/प्रिया एसेलबॉर्न

संपादन: महेश झा

DW.COM

WWW-Links

संबंधित सामग्री

विज्ञापन