महिला निर्देशकों से चमका वेनिस | लाइफस्टाइल | DW | 02.09.2012
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लाइफस्टाइल

महिला निर्देशकों से चमका वेनिस

इस बार का वेनिस फिल्मी मेला महिलाओं की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी कामयाबी की बात कर रहा है. फिल्मों के सम्मानित सालाना मेले में इस बार महिलाओं के निर्देशन में बनी फिल्मों का जलवा है.

वेनिस के फिल्मी मेले में दिखाई जा रही इस साल की 52 फिल्मों में 21 का निर्देशन औरतों ने किया है. सिनेमा में औरतों की अहम भूमिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल गई है. कम से कम आयोजक तो यही मान रहे हैं. वेनिस फिल्मी मेले की निदेशक अल्बर्टो बारबरा ने इसे, "वक्त का संकेत" कहा है. समाचार एजेंसी एएफपी से बातचीत में बारबरा ने कहा, "सिनेमा में एक शताब्दी से मर्दों के वर्चस्व का माहौल रहा है. आखिरकार अब सिनेमा ने भी जान लिया है कि यहां औरतों की रचनात्मकता है."

वेनिस में फिल्म फेस्टिवल की शुरूआत मीरा नायर की द रिलक्टेंट फंडामेंटलिस्ट और चार दूसरी फिल्मों से हो रही है. ये फिल्में महिलाओं के निर्देशन में बनी 18 उन फिल्मों में शामिल हैं जो सुनहरे शेर को पाने की दौड़ में हैं. कान के फिल्मी समारोह में पुरस्कारों की दौड़ में कोई भी ऐसी फिल्म नहीं थी जिसकी निर्देशक महिला हो.

वेनिस में एक कांफ्रेंस के दौरान मीरा नायर ने कहा कि उन्हें हमेशा महिलाओं की क्षमता पर भरोसा रहा और महिला होना उनके काम की राह में कभी बाधा नहीं बना. नायर ने कहा, "मैं लिंग से परे हूं, कला से प्रेरित हूं." हालांकि मीरा नायर ने इस ओर भी ध्यान दिलाया कि महिलाएं उन सच्चाइयों को भी जान सकती हैं जिन तक पुरुष नहीं पहुंच पाते. नायर ने 1985 में बनी एक डॉक्यूमेंट्री का हवाला दिया. "इंडियन कैबरे" नाम की यह डॉक्यूमेंट्री मुंबई के दो स्ट्रीपरों के बारे में थी जिसमें फोकस इस बात पर था कि रचनात्मकता ना तो मर्द होती है ना औरत.

वेनिस में हिस्सा लेने आईं कुछ महिला निर्देशकों का मानना है कि अलग कर दिए जाने से उन्हें सहूलियत हुई है, हालांकि वह इस कठिन होड़ वाले क्षेत्र में बस बराबरी का व्यवहार चाहती हैं. शॉर्ट फिल्म द पाउडर रूम की निर्देशक जो कासावेट्स अमेरिकी अभिनेता निर्देशक जॉन कासावेट्स और अभिनेत्री जेना रॉलैंड्स की बेटी हैं. जो कहती हैं, "मेरे ख्याल से यह कहना कि मैं महिला निर्देशक हूं मुझे सीमित करना है. किसी के लिए भी फिल्म बनाना एक मुश्किल काम है. मुझे लगता है कि जितनी तेजी से यह भूल सकें कि हम महिला निर्देशक हैं, उतने ही बड़े मौके हमारे पास होंगे." जो की 2007 में बनाई फिल्म ब्रोकेन इंग्लिश ने उन्हें खूब ख्याति दिलाई थी.

हालांकि इससे अलग राय रखने वाले लोग भी यहां मौजूद हैं. हॉलीवुड के पूर्व दिग्गज विलेम दाफो की बीवी जियादा कोलाग्रैंडे का कहना है कि इटली और अमेरिका की हालत में बड़ा फर्क है. वेनिस में शॉर्ट फिल्म के साथ पहुंची कोलाग्रैंडे ने कहा, "इटली में केवल पांच से छह फीसदी निर्देशक ही महिलाएं हैं. मुझे लगता है कि इस बारे में ज्यादा जागरूकता की जरूरत है क्योंकि यह वाकई एक समस्या है. महिलाएं पूर्वाग्रहों की गुलाम हैं और इससे मानसिकता पर फर्क पड़ता है."

फिल्म समारोहों की लाल कालीन अभिनेत्रियों की चकाचौंध में गुम रहती है जबकि महिला निर्देशकों को बड़ी मुश्किल से ही यहां ढूंढा जा सकता है. कान की समारोह अध्यक्ष गिल्स जैकब ने पहले कहा था, "यह बेहद शर्मनाक है कि केवल एक महिला, जेन कैम्पियन (द पियानो लेसन) ही पुरस्कार जीत सकीं."

वेनिस के पुरस्कारों की दौड़ में चार महिलाए हैं. इनमें फ्रांसेस्का कोमेन्चीनी, जेसिका वुडवर्थ, रामा बर्शस्टाइन और वलेरिया सरमियेन्टो शामिल हैं.

अर्जेंटीना की निर्देशक, प्रोड्यूसर और पटकथा लेखक लूसर्सिया मार्टेल का कहना है कि उन्हें समझ में नहीं आता कि इतनी हायतौबा क्यों मची है. अर्जेंटीना में तो 1980 के दशक से ही फिल्म बनाने में महिलाएं बड़ी भूमिका निभा रही हैं. मार्टेल ने कहा, "मेरी पीढ़ी की महिला के लिए फिल्म निर्देशक बनना एक सामान्य बात है. कई बार ऐसा होता है कि इतिहास की कोई बड़ी बाधा बेवकूफी से भरी हो और उसे बड़ी आसानी से बदल दिया जाए."

एनआर/एमजी (एएफपी)

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