मल्टीटास्किंग में मर्दों से बेहतर नहीं औरतें! | विज्ञान | DW | 15.08.2019
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विज्ञान

मल्टीटास्किंग में मर्दों से बेहतर नहीं औरतें!

लंबे समय से माना जाता रहा है कि मल्टीटास्किंग में महिलाएं पुरुषों से बेहतर होती हैं लेकिन जर्मन यूनविर्सिटी की ताजा रिसर्च में पता चला है कि ऐसा नहीं है.

जर्मनी की आखन यूनिवर्सिटी 48 पुरुष और 48 महिलाओं को पर अपने रिसर्च के बाद इस नतीजे पर पहुंची है. यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर पाट्रिशिया हिर्ष के नेतृत्व में यह रिसर्च हुई. उनके मुताबिक मर्द और औरत दोनों जब एक ही समय में दो काम करते हैं तो उनकी गति धीमी होती है. रिसर्च में संख्या और अक्षरों का इस्तेमाल किया गया. 

जर्नल प्लोस वन में अपनी खोज के बारे में जारी रिपोर्ट में रिसर्चरों ने कहा है कि उन्होंने दोनों लिंगों के बीच इस मामले में कोई फर्क नहीं दिखा. हालांकि उन्होंने ध्यान दिलाया कि इससे पहले हुई रिसर्च में नतीजे बिल्कुल अलग आए थे. कुछ रिसर्चों में महिलाओं ने अच्छा प्रदर्शन किया तो कुछ में पुरुषों ने. पुरानी रिसर्चों में भी कुछ के नतीजे बराबरी वाले आए हैं.

आखन यूनिवर्सिटी की टीम का कहना है कि इस तरह का काम तैयार किया गया था जो अलग अलग लिंगों का फर्क दिखा सकता था. रिसर्चरों का यह भी मानना है कि ऐसा कोई अकेला प्रयोग नहीं हो सकता है जो हर तरह की मल्टीटास्किंग और उसके लिए जरूरी दक्षता को परख सके. रिसर्च में शामिल लोगों से स्क्रीन पर नजर आ रहे वर्णों में से स्वर और व्यजन वर्ण याद रखने को कहा गया. इसी तरह संख्याओं के मामले में सम और विषम संख्या याद करने को कहा गया.

कुछ परीक्षणों में मर्द और औरत दोनों ने एक ही वक्त में काम पूरा करने को कहा गया, जबकि दूसरे परीक्षणों में उन्हें तेजी से एक काम खत्म कर दूसरा शुरू करने को कहा गया. रिसर्च टीम का कहना है, "हमारे नतीजे इस पूर्वाग्रह की पुष्टि नहीं कहते कि महिलाएं मल्टीटास्किंग में पुरुषों से बेहतर होती हैं," कम से कम उन परीक्षणों में तो ऐसा नहीं दिखा जो उन्होंने कुछ चुनौतियों के लिहाज से आदर्श थे.

हिर्ष ने हर दिन के लिहाज से तीन श्रेणियां तैयार की थीं पहला कामजाजी याददाश्त को अपडेट करना, दूसरा एक काम से दूसरे काम में जाना और तीसरा बेकार की जानकारी को छांट कर बाहर निकालना.

एनआर/ओएसजे(डीपीए)

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