मलय ′गर्ल′ को मिला कृत्रिम कूल्हा | विज्ञान | DW | 28.01.2011
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विज्ञान

मलय 'गर्ल' को मिला कृत्रिम कूल्हा

जर्मनी में पहली बार एक ऐसा ऑपरेशन हुआ है जिसमें मादा बाघ को कृत्रिम कूल्हा लगाया गया है. जल्द ही 'गर्ल' नाम की मादा बाघ अपने पैरों पर खड़ी हो सकेगी. जर्मनी की लाइप्सिग यूनिवर्सिटी ने यह जानकारी दी है.

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गुरुवार को लाइप्सिग यूनिवर्सिटी ने बताया कि तीन घंटे चले ऑपरेशन के बाद मादा बाघ ठीक हालत में है. पूर्वी जर्मनी के हाले चिड़ियाघर में रखी गई गर्ल के दाएं कूल्हे में करीब साल भर से बहुत ज्यादा दर्द था. इस कारण उसके ऑपरेशन का फैसला लिया गया.

लाइप्सिग विश्वविद्यालय से जारी बयान में कहा गया है, "मलय के बाघ दुनिया से विलुप्त हो रहे हैं. फिलहाल जंगलों में इस प्रजाति के कुल 500 ही बाघ बचे हैं. गर्ल का ऑपरेशन करने का यह भी एक कारण था."

यह ऑपरेशन पांच स्पेशलिस्ट डॉक्टरों ने मिल कर किया. इस दौरान एक बड़ी मुश्किल तब आई जब गर्ल के दिल ने धड़कना बंद कर दिया लेकिन एनेस्थेटिस्ट मिषेले अलेफ ने उसे बचा लिया.

अब गर्ल हाले के चिड़ियाघर में आराम कर रही है. अभी छह हफ्ते उसके लिए बड़े गंभीर हैं क्योंकि इस समय में आर्टिफिशियल हिप के डिसलोकेट होने यानी निकल जाने का खतरा बना रहता है. यह समय अगर ठीक से निकल गया तो उसे फिर जीवन भर परेशानी नहीं होगी.

ऑपरेशन करने वाली डॉक्टरों की टीम के अन्य सदस्य पेटर बोएट्चर और इतालवी डॉक्टर आल्डो वेज्जोनी ने कहा, "हम बहुत खुश हैं." वेज्जोनी कुत्तों में कृत्रिम कूल्हा लगाने के लिए जाने जाते हैं और यह काम वह बिना कोई शुल्क लिए करते हैं.

जो कृत्रिम कूल्हा गर्ल को दिया गया है वह ज्यूरिख यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पियरे मोंटाफोन ने स्विटजरलैंड की कंपनी क्योन के साथ मिल कर बनाया था. इसे खास तौर पर टाईटेनियम धातु से बनाया गया है जो लंबे समय चलता है और बेहतर है. इन कूल्हों को पहले कुत्तों में लगाया गया. लेकिन हाल ही में अब इन्हें मनुष्य के लिए भी इस्तेमाल किया जा रहा है.

रिपोर्टः एजेंसियां/आभा एम

संपादनः एमजी

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