मर्दों ने माना औरते हैं बेहतर शिकारी | मनोरंजन | DW | 11.01.2014
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मनोरंजन

मर्दों ने माना औरते हैं बेहतर शिकारी

ऑस्ट्रिया में शिकार करने का शौक रखने वाली औरतों की तादात हजारों में है. कई पुरूष शिकारी मानते हैं कि औरतें न सिर्फ पुरानी परंपराओं को जिंदा रख रही हैं बल्कि शिकार के तरीकों और पुरूषों दोनों को ज्यादा शिष्ट बना रही हैं.

जानवरों के शिकार को पारंपरिक रूप से पुरूषों का शौक माना जाता है. लेकिन ऑस्ट्रिया की करीब 11,000 रजिस्टर्ड महिला शिकारियों की तादात इस स्थापित मान्यता को सीधी चुनौती पेश कर रही है. ऑस्ट्रिया में ऐसी औरतों की संख्या बढ़ती जा रही है जो अपने खाली समय में हाथ में बंदूक थामे जंगलों से गुजरना पसंद करती हैं. कई बार कुत्तों को साथ लेकर ये औरतें शिकार का मजा लेने जंगलों में निकल पड़ती हैं.

शिकार हुआ है 'एलीगेंट'

49 साल के जोएर्ग डॉयचमन कहते हैं, "मुझे लगता है कि महिलाओं की वजह से शिकार में भी सुधार आया है. उनकी वजह से यह काफी सुरूचिपूर्ण हो गया है." डॉयचमन अपनी ऑडी गाड़ी में राइफल रख कर जर्मनी से ऑस्ट्रिया में लाल हिरनों और जंगली सूअरों का शिकार करने पहुंचे थे. "हुल्लड़बाजी थोड़ी कम हो गई है. वैसे हर किसी को यह बात पसंद नहीं आती है, खास तौर पर कुछ पुराने शिकारियों को."

डॉयचमन बताते हैं, "पहले पुरूषों के मुकाबले बहुत कम औरतें होती थीं. पिछले 10 से 15 सालों में तो हालात काफी बदल गए हैं. अब तो करीब 15 से 20 फीसदी शिकारी औरतें हैं." औरतों की वजह से माहैल में आए कुछ और बदलावों के बारे में उनका कहना है, "जब औरतें आसपास होती हैं तो पुरूष ज्यादा सलीके से बात करते हैं और थोड़ा सोच समझ कर बोलते हैं."

संभालती हैं रस्में

48 साल की पेट्रा श्नेवाइस के लिए शिकार शौक ही नहीं जुनून भी है. उन्होंने अपनी 28 साल की बेटी एलिया के साथ मिल कर "डी येगरिन" यानि 'शिकारी' नाम की एक पत्रिका निकालना शुरू कर दिया. पेट्रा का मानना है कि औरतों की दिलचस्पी दिखावे में कम और साथ मिलकर शिकार और प्रकृति का मजा लेने में ज्यादा होती है. अपने हरे रंग के शिकार वाले कपड़ों में सिगरेट संभाल कर रखते हुए पेट्रा बताती हैं, "किसी जानवर का शिकार करने के तुरंत बाद मुझे कुछ पल शांति में बिताने होते हैं. मेरे मन में इन जानवरों के लिए सम्मान होता है. जब कोई ताबड़तोड़ गोलियां बरसाता है तो मुझे अच्छा नहीं लगता."

Österreich Lärchenwald im Herbst Karwendel

पेट्रा शिकार की कुछ खास परंपराओं को जिंदा रखना चाहती हैं. ऐसा ही एक पुराना रिवाज है "लास्ट बाइट", जिसमें किसी पशु का शिकार करने के बाद उसके मुंह में किसी पौधे की टहनी को रखा जाता है. शिकारी उसी टहनी का एक हिस्सा अपनी हैट के दाहिनी तरफ भी लगाता है. पेट्रा इस रिवाज का महत्व बताते हुए कहती हैं, "कुछ खास रस्मों के दौरान टहनी को हैट के बांयी तरफ लगाया जाता है जैसे कि जब किसी शिकारी की मौत हो जाए."

आसान नहीं यह शौक

बहुत से नए तhttp://dw.de/p/19X9z इन रस्मों से अनजान होते हैं. उनके लिए शिकार की दुनिया को समझना एक रहस्य के खुलने जैसा होता है. 38 साल की एवेलिन ग्रुबेल्निग को दो साल पहले ही शिकार करने का लाइसेंस मिला. वह बताती हैं, "इसमें एक साल लग गया. आप जानवरों के बारे में बहुत कुछ सीखते हैं. जंगल, पर्यावरण, शिकारी कुत्तों से लेकर प्रक्षेपण और बहुत सारे नियम कानून के बारे में जानना होता है." दो बच्चों की मां एवेलिन, जो खुद पेशे से स्कूल टीचर हैं, उन्हें भी यह काफी मुश्किल लगा. "मैंने बहुत सी परीक्षएं दी हैं लेकिन यह वाली सबसे कठिन थी."

यह शौक पूरा करने के लिए बहुत सारे पैसों की भी जरूरत होती है. ग्रुबेल्निग की राइफल ही करीब 5,000 यूरो की है. समय देने के साथ साथ इसमें काफी संयम भी बरतना होता है. अगर मौसम साथ न दे तो बारिश में भीगना, कीचड़ में लत पथ भी होना पड़ता है. लेकिन हर औरत को बनने संवरने का जितना शौक होता है उसके हिसाब से शिकार के वक्त पहने जाने वाले कपड़े मिलने में दिक्कत आ रही है, "औरतों के लिए बाजार में ज्यादा कुछ नहीं मिल रहा. सही नाप की पैंट भी मिलना मुश्किल है." शिकायती लहजे में ग्रुबेल्निग कहती हैं, "कई बार हमें पुरुषों के कपड़े ही छोटी साइज में खरीदने पड़ते हैं."

आरआर/आईबी (एएफपी)

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