मरीज ही मारेगा कैंसर को | विज्ञान | DW | 08.05.2012
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विज्ञान

मरीज ही मारेगा कैंसर को

सौ साल से वैज्ञानिक कोशिश कर रे हैं कि शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली से ही बीमारियों का इलाज हो जाए. अब डॉक्टरों ने कैंसर जैसी बीमारी ठीक करने के लिए इस सिस्टम का सहारा लिया है. एक दो साल में यह संभव हो सकेगा.

डॉक्टरों का मानना है कि बाजार में ऐसी दवाइयां उपलब्ध हो सकेंगी जो कैंसर के इलाज के लिए शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को फिट बनाएंगी.

इम्युनोथैरेपी पर आधारित दो दवाइयां तो अभी भी बाजार में हैं और इनके नतीजे मिश्रित हैं. ब्रिस्टल मेयर स्क्विब की येरवोय को मेलैनोमा के इलाज के लिए बढ़िया दवाई माना जाता है. इसे पिछले साल ही बिकने की अनुमति दी गई है. वहीं डेन्ड्रॉन कॉर्प्स के बारे में डॉक्टरों को थोड़ी झिझक है. ये दोनों दवाइयां कैंसर के नए इलाज में अहम शोध के तौर पर मानी जाती हैं. 2015 तक इम्युनोथैरेपी का ग्लोबल मार्केट 75 अरब डॉलर का हो सकता है.

बॉस्टन में डाना फैर्बेर कैंसर वैक्सीन सेंटर के सहनिदेशक डॉक्टर ग्लीन ड्रैनोफ बताते हैं, "हम एक नए दौर में आ चुके हैं जहां इम्यून थैरेपी कैंसर के इलाज में अहम भूमिका निभा सकती है. इस क्षेत्र अब विश्वास बढ़ा है."

अगले बारह महीने में कम से कम एक दर्जन थैरेपी का परीक्षण किया जाना है. कुछ जानकारों का मानना है कि नतीजे बढ़िया हो सकते हैं. नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट में ट्यूमर इम्यूनोलॉजी और बायोलॉजी के जेफ्री स्क्लोम कहते हैं, "इनमें से कई सफल होंगी. एक बार उन्हें एफडीए की अनुमति मिल जाए तो उन्हें ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किया जा सकेगा."

जिन दवाइयों का इंतजार किया जा रहा है उसमें डेनमार्क के बवेरियन नॉर्डिक कंपनी का प्रोस्टेट कैंसर का टीका, ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन का फेंफड़ों के कैंसर का टीका और एम्गेन का मेलानोमा के एक प्रकार के लिए टीका आने वाला है.

नई सफलता?

कैंसर के खिलाफ खुद की ही प्रतिरोधक क्षमता का इस्तमाल करने का विचार 1980 में डॉक्टर विलियम कोले ने रखा था. उन्होंने पाया कि कैंसर ऑपरेशन के बाद जिन मरीजों को इन्फेक्शन हुआ वे जल्दी ठीक हुए. उन्होंने कहा कि इन्फेक्शन के कारण प्रतिरोधक क्षमता में सुधार हुआ और इसलिए वह कैंसर के खिलाफ भी खड़ा हुआ.

डैन्ड्रॉफ कहते हैं, कैंसर में इम्युनोथैरेपी का टीका बनाना 100 साल पुराना विचार हैं. आज हम इसके बारे में काफी जानते हैं कि प्रभावी एंटी कैंसर इम्यून रिस्पॉन्स ड्रग को बनाने के लिए क्या जरूरी है.

हालांकि इस तरह की अधिकतर दवाइयां तभी सफल मानी जाती हैं जह ट्यूमर का आकार घटना शुरू हो या कैंसर कम हो, लेकिन प्रोवेंज और येरवॉय ने साबित किया है कि ट्यूमर का आकार कम होने के बावजूद कैंसर ठीक हुआ है. जानकारों का कहना है कि ट्यूमर बड़े दिख सकते हैं क्योंकि उसमें प्रतिरोधी कोषिकाएं होती हैं. लेकिन कुल मिला कर ठीक होना सही सूचक है. डैन्ड्रॉफ कहते हैं, "हमारे यहां ऐसे मरीज हैं जो अब नौ साल से जिंदा हैं. ट्यूमर खत्म होने का यह सबूत हो सकता है. हालांकि ट्यूमर के साथ जीने को लेकर विशेषज्ञों के विचार अलग अलग हैं."

शोधकर्ता पहले मानते थे कि मेलैनोमा और किडनी कैंसर की खुद की प्रतिरोधक क्षमता से ठीक हो सकने वाले कैंसर हैं. लेकिन अब यह बात गलत साबित हो गई है. शोध और परीक्षणों से पता चल रहा है कि फेंफड़ों, स्तन, लीवर, प्रोस्टेट, पेनक्रिया, अंडाषय, सिर, गले और मस्तिष्क का कैंसर भी इम्यून थेरैपी से ठीक हो सकता है.

एएम, आईबी (रॉयटर्स)

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