मंदी की चपेट में भारत का कार उद्योग, दनादन जा रही हैं नौकरियां | भारत | DW | 08.08.2019
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages
विज्ञापन

भारत

मंदी की चपेट में भारत का कार उद्योग, दनादन जा रही हैं नौकरियां

कुछ समय पहले तक फर्राटा भरने वाले भारत के कार उद्योग में अब सारी तेजी कर्मचारियों की छंटनी में दिख रही है. देसी विदेशी सारी कंपनियां उत्पादन घटा रही हैं और कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा रही हैं.

इसे मंदी का असर कहा जाए या कुछ और लेकिन ऑटोमोबाइल सेक्टर में जो स्थिति पिछले कुछ महीनों से देखने में आ रही है, वो देश की आर्थिक स्थिति के लिए ठीक नहीं कही जा सकती है.

ऑटोमोबाइल सेक्टर में पिछले चार महीनों के दौरान ना सिर्फ उत्पादन में कमी आई है, बल्कि खरीदार भी कम हुए हैं इसके साथ ही बड़ी संख्या में लोगों की नौकरी भी जा रही है. उद्योग संगठन फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (एफएडीए) ने दावा किया है कि पिछले तीन महीने में कार और बाइक की बिक्री में गिरावट के चलते एजेंसियों और डीलरों ने ही करीब दो लाख कर्मचारियों की छंटनी की है. पूरे ऑटोमोबाइल सेक्टर में तो ये संख्या कहीं ज्यादा है.

रोजगार देने के मामले में ऑटोमोबाइल उद्योग देश में सबसे आगे है लेकिन संकट के चलते करीब चार लाख लोगों का रोजगार दांव पर लगा हुआ है. समाचार एजेंसी रॉयटर की मानें तो इस साल अप्रैल से लेकर जुलाई तक करीब साढ़े तीन लाख लोग नौकरियों से हाथ धो चुके हैं.

ऑटोमोबाइल उद्योग पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें न सिर्फ वाहनों का निर्माण और उनकी बिक्री ही शामिल है बल्कि इस उद्योग में छोटे-बड़े कलपुर्जों को निर्माण से लेकर स्टील इंडस्ट्री तक इसका विस्तार है. जहां तक इस क्षेत्र में रोजगार का सवाल है तो रॉयटर्स के मुताबिक कार और बाइक बनाने वाली कंपनियों ने ही अपने यहां पंद्रह हजार से ज्यादा लोगों को नौकरी से निकाला है जबकि इसकी बिक्री और तमाम दूसरी चीजों से जुड़े क्षेत्र में बेरोजगार होने वालों की संख्या तीन लाख से ऊपर है.

रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले करीब डेढ़ साल के दौरान देश भर के 271 शहरों में वाहनों के 286 शोरूम बंद हुए हैं जिसमें कम से कम बत्तीस हजार लोगों की नौकरियां गई हैं. इसके अलावा इन सेक्टरों में करीब दो लाख नौकरियों की कटौती की गई है.

ऑटो सेक्टर में बिक्री की हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जुलाई महीने में मारुति की बिक्री में 33.5 फीसद और महिंद्रा की बिक्री 15 फीसदी गिर गई. गाड़ी बनाने वाली कंपनियों के एक संगठन के मुताबिक चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में सभी श्रेणियों में वाहनों की बिक्री में करीब साढ़े बारह फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.

फेडरेशन ऑफ आटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन का कहना है कि आने वाले दिनों में इस स्थिति में सुधार की गुंजाइश भी कम ही दिख रही है. एसोसिएशन ने आशंका जताई है कि ऐसी स्थिति में वाहनों के और शो रूप बंद हो सकते हैं, जिसकी वजह से जाहिर तौर पर और नौकरियां जाएंगी.

देशभर में दो पहिया और चार पहिया वाहनों के पंद्रह हजार डीलर करीब छब्बीस हजार शोरूम संचालित करते हैं जिनमें पच्चीस लाख लोगों को सीधे तौर पर रोजगार मिला हुआ है.

इस उद्योग में फैली मंदी की यह स्थिति इससे जुड़े क्षेत्रों में भी देखने को मिल रही है. ना सिर्फ वाहन निर्माण में लगी कंपनियों को मंदी की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है बल्कि उनके स्पेयर पार्टस बनाने वाली कंपनियों के सामने भी ये स्थिति विकट बनी हुई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत की बड़ी वाहन निर्माता कंपनियों जैसे टाटा मोटर्स, महिंद्रा और होण्डा ने मांग कम होने के चलते उत्पादन पर रोक लगा रखी है.

टाटा मोटर्स ने पिछले दो हफ्तों में अपने चार संयंत्रों को बंद कर दिया है. टाटा मोटर्स ने एक बयान में कहा है कि मांग और आपूर्ति में आए अंतर के कारण ऐसा किया गया है. वहीं महिंद्रा का भी कहना है कि पिछले कुछ महीनों में ऐसी स्थिती आई कि उत्पादन कुछ दिनों के लिए बंद करना पड़ा.

विशेषज्ञों की मानें तो ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए ये स्थिति काफी भयावह है और आने वाले दिनों में इसके दुष्परिणाम चारों ओर दिख सकते हैं. बताया जा रहा है कि इस क्षेत्र में साढ़े तीन करोड़ से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से रोजगार मिला हुआ है जो कि पूरे विनिर्माण क्षेत्र का करीब आधा है.

एफएडीए के अध्यक्ष हर्षराज काले का कहना है कि ऑटो सेक्टर की नौकरियों में छंटनी का दौर मई से शुरू हुआ जो अभी तक रुकने का नाम नहीं ले रहा है. इस मामले में उन्होंने सरकार से तत्काल प्रभाव से कदम उठाने की मांग भी की है. काले का कहना है कि सरकार को जीएसटी रेट में कटौती करके मंदी से जूझ रही ऑटो इंडस्ट्री को राहत देनी चाहिए.

वहीं, घरेलू ऑटोमोबाइल उद्योग भले ही मंदी की मार का सामना कर रहा हो लेकिन इसके निर्यात पर कोई विपरीत असर नहीं दिख रहा है. निर्यातक इकाइयों के अधिकारियों का कहना है कि घरेलू बाजार में वाहनों की मांग घटने से ऑटोमोबाइल क्षेत्र में भारी मंदी है, लेकिन निर्यात के क्षेत्र में ऐसा नहीं है.

एक ऑटोमोबाइल कंपनी के प्रबंध निदेशक और गुड़गांव इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के महासचिव दीपक मैनी ने डीडब्ल्यू को बताया कि गुरुग्राम से कारों की हेडलाइट्स, स्टीयरिंग, बॉडी पा‌र्ट्स जैसे तमाम उपकरण दूसरे देशों को निर्यात किए जाते हैं. उनके मुताबिक, "निर्यात किए जाने वाले ऑटोमोबाइल सामानों पर घरेलू स्थिति का कोई खास असर नहीं पड़ता है."

मैनी बताते हैं कि इसी वजह से निर्यात क्षेत्र मंदी की इस स्थिति से अभी तक प्रभावित नहीं हो पाया है. मैनी का कहना है कि दूसरे देशों से ऑर्डर में किसी प्रकार की कमी नहीं है, लेकिन ये जरूर है कि भारत में वाहन बनाने वाली कंपनियों की बिक्री में कमी आती रही और उत्पादन गिरता रहा तो आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में भी कमी दिखना स्वाभाविक है.

_______________

हमसे जुड़ें: WhatsApp | Facebook | Twitter | YouTube | GooglePlay | AppStore

DW.COM

विज्ञापन