भोपाल कांड में कंपनी पर कार्रवाई नहीं करेगा अमेरिका | जर्मन चुनाव 2017 | DW | 08.06.2010
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जर्मन चुनाव

भोपाल कांड में कंपनी पर कार्रवाई नहीं करेगा अमेरिका

अमेरिका ने साफ कर दिया है कि भोपाल गैस कांड पर अदालत का फैसला आने के बाद वह यूनियन कार्बाइड पर कोई कार्रवाई नहीं करेगा. अमेरिका कहता है कि फैसले के साथ 15000 लोगों की जान लेने वाले इस हादसे का न्याय पूरा हो गया.

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अमेरिका ने हालांकि इस घटना को विश्व के सबसे खतरनाक औद्योगिक हादसों में गिना. अमेरिकी विदेश मंत्रालय में दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के उप मंत्री रॉबर्ट ब्लेक ने कहा, "जहां तक भोपाल का सवाल है, निश्चित तौर पर यह सबसे बड़े औद्योगिक हादसों में शामिल था. और मैं आपसे कहना चाहता हूं कि अदालती फैसले के साथ ही पीड़ितों और उनके परिवारों का संघर्ष पूरा हो गया."

ब्लेक ने कहा कि फैसले के बाद किसी मामले को फिर से नहीं खोला जाएगा और न ही किसी बात की दोबारा जांच की जाएगी. विदेशी पत्रकारों से बात करते हुए ब्लेक ने कहा, "बल्कि मुझे लगता है कि इससे मामले को खत्म करने में मदद मिलेगी." भोपाल गैस कांड और इस पर आए फैसले के बारे में खास सवाल पूछे जाने पर अमेरिकी मंत्री ने कहा कि यह भारत का अंदरूनी मामला है.

Flash-Galerie Giftgaskatastrophe Bhopal

इसी तरह के सवाल के जवाब में अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता पीजे क्राउली ने कहा, "यह हादसा 26 साल पहले हुआ था. यह एक भयावह घटना थी. मानव इतिहास की सबसे खतरनाक औद्योगिक दुर्घटनाओं में एक. हमें लगता है कि फैसले के साथ ही हादसे से प्रभावित लोगों और उनके परिवारों के लिए मामला पूरा हो गया."

क्राउली ने उम्मीद जताई कि इस घटना की वजह से भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक रिश्तों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा कि यह एक आपराधिक मामला था, जिसका राजनीतिक संबंध से कोई लेना देना नहीं.

भोपाल में यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में 1984 को हुए हादसे में 15000 से ज्यादा लोगों की जान गई थी. हालांकि आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक लगभग चार हजार लोगों की जान गई थी. इस मामले में सोमवार को भारत की अदालत ने यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के पूर्व चेयरमैन केशव महिन्द्रा और छह लोगों को दो दो साल की सजा सुनाई. सभी को बाद में जमानत मिल गई.

रिपोर्टः पीटीआई/ए जमाल

संपादनः उ भट्टाचार्य