भूमि अधिग्रहण और सूखे के बीच फंसे किसान | दुनिया | DW | 14.07.2015
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दुनिया

भूमि अधिग्रहण और सूखे के बीच फंसे किसान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 जुलाई को नीति आयोग की बैठक कर रहे हैं जिसमें भूमि अधिग्रहण पर देश के सभी मुख्यमंत्रियों के साथ चर्चा होगी. इस बीच महाराष्ट्र में किसानों ने खुदकुशी की मांग की है.

महाराष्ट्र के वर्धा जिले में सात किसानों ने सरकार से खुदकुशी की अनुमति देने की मांग की है. इनमें तीन महिलाएं भी हैं. किसानों की मदद के लिए चलाए जा रहे गैर सरकारी संगठन विदर्भ जन आंदोलन समिति के अध्यक्ष किशोर तिवारी ने अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को इस बारे में बताया, "हालात इतने बिगड़ गए हैं कि इन सातों ने जिला अधिकारी के पास अर्जी दी है कि इन्हें आत्महत्या की इजाजत दी जाए." उन्होंने कहा कि वदाद गांव के ये किसान जनवरी से ही दरबदर ठोकरें खा रहे हैं ताकि उन्हें महाराष्ट्र सरकार द्वारा आश्वासित मदद मिल सके. हार कर दस दिन पहले इन्होंने एक पत्र लिख कर तहसीलदार को दिया जिसमें खुदकुशी का जिक्र था.

सरकारी नियमों के अनुसार किसानों को प्राकृतिक आपदाओं के कारण हुए नुकसान की भरपाई के लिए परिवार में प्रति व्यक्ति चार हजार रुपये की मदद राशि मिल सकती है. लेकिन पिछले छह महीने से उन्हें यह पैसा नहीं मिला है. राज्य में पड़े सूखे के कारण 70 फीसदी फसल खराब हो चुकी है और पिछले 12 दिन में कम से कम 23 लोगों की जान जा चुकी है.

कांग्रेस बनाएगी दूरी

इस बीच बुधवार को होने वाली नीति आयोग की बैठक पर राजनीति गर्मा रही है. माना जा रहा है कि मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच काफी घमासान होगा. ललित मोदी विवाद, व्यापमं कांड और जाति आधारित जनगणना जैसे मुद्दे तो हैं ही, साथ ही भूमि अधिग्रहण पर भी विपक्ष सरकार को आड़े हाथ ले सकता है. इसके मद्देनजर प्रधानमंत्री ने मानसून सत्र शुरू होने से पहले ही देश भर के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई है जिसमें भूमि अधिग्रहण का मामला केंद्र में होगा.

ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि कांग्रेस के मुख्यमंत्री बैठक से दूरी बना सकते हैं. वीकेंड पर पार्टी सूत्रों ने इस ओर इशारा भी किया लेकिन अब तक किसी मुख्यमंत्री ने खुल कर इसकी पुष्टि नहीं की है. ऐसा भी माना जा रहा है कि यह बीजेपी सरकार का विपक्ष का मत जानने का पैंतरा हो सकता है ताकि मानसून सत्र के दौरान मजबूती से बहस की जा सके.

नहीं आएंगी ममता

वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बैठक को छोड़कर सरकार के चार साल पूरे होने पर 100वीं प्रशासकीय बैठक में शामिल होने का निर्णय लिया है. पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार के लिए 15 जुलाई ऐतिहासिक दिन है. पार्टी की वेबसाइट पर बताया गया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस बैठक की अध्यक्षता करेंगी. रिपोर्ट में कहा गया है, "पार्टी भूमि अधिग्रहण के बारे में अच्छी तरह समझती है. यह तृणमूल कांग्रेस ही है जिसने संसद में भूमि अधिग्रहण बिल 2013 का विरोध कर प्रस्ताव रखा था. तृणमूल कांग्रेस इस बिल का विरोध करने वाली पहली पार्टी थी." ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री को बैठक में शामिल नहीं हो सकने के लिए पत्र लिखकर अवगत करा दिया है.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी भूमि अधिग्रहण बिल का विरोध कर रहे हैं. नजदीकी सूत्रों के अनुसार उन्हें नीति आयोग में इस मुद्दे पर चर्चा पर भी आपत्ति है. उनका कहना है कि बिल संसद की विशेष समिति में भेजा गया है. ऐसे में उस पर नीति आयोग में बहस की जल्दी क्यों है.

एमजे/आईबी (वार्ता)

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