भारत से शुरू हुआ था महाविनाश | विज्ञान | DW | 08.07.2016
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

विज्ञान

भारत से शुरू हुआ था महाविनाश

डायनासोर और दूसरे जीव करोड़ों साल पहले पूरी तरह साफ कैसे हो गए. वैज्ञानिकों के मुताबिक इस सफाये की शुरुआत भारत से हुई. ब्रह्मांड से आए एक पिंड ने आग में घी का काम किया.

विशालकाय डायनासोर और कई दूसरे जीव एक झटके में खत्म नहीं हुए. नई तकनीक और खोजों के आधार पर वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है. अब तक यह माना जाता था कि 6.6 करोड़ साल पहले एक विशाल पिंड धरती से टकराया. टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पृथ्वी थरथरा गई और जीवन धराशायी हो गया. यह टक्कर जिस जगह हुई, वो इलाका आज मेक्सिको में आता है.

लेकिन गहन होती खोज बताती है कि असली मुश्किल तो इस टक्कर से काफी पहले ही शुरू हो चुकी थी. करोड़ों साल पुराने 29 जीवाश्मों और कवचों की जांच के बाद मिशिगन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है. इन जीवाश्मों में 65 लाख साल का इतिहास छुपा है. वैज्ञानिकों के मुताबिक पहले एक विशाल ज्वालामुखी फूटा. यह ज्वालामुखी मौजूदा भारत के दक्कन इलाके में था. इसे इतिहास का सबसे बड़ा ज्वालामुखी विस्फोट माना जाता है.

ज्लावामुखी के बारे में ज्यादा जानकारी

उस ज्वालामुखी ने हजारों साल तक विषैली गैसें और अरबों टन राख का गुबार छोड़ा. विस्फोट और गर्म लावे के चलते पहले समुद्र का तापमान बढ़कर 7.8 डिग्री सेल्सियस हो गया. इसके बाद राख का गुबार पूरे वायुमंडल में छा गया और धरती सूरज की रोशनी के लिए तरस गई. फिर तापमान गिरने लगा और हालात बर्फीले होने लगे. डायनासोर समेत 24 जीवों को परेशानी होने लगी. 10 प्रजातियां इसी दौरान साफ हो गईं.

ज्वालामुखी विस्फोट से हुए जलवायु परिवर्तन को 14 प्रजातियां जैसे तैसे झेल गईं, लेकिन उसके 1.5 लाख साल बाद आकाश से आया एक पिंड धरती से टकराया. इस टक्कर ने पूरी पृथ्वी को भूकंपीय तरंगों से थर्रा दिया. जलवायु परिवर्तन का एक दौर शुरू हुआ और बाकी बची 14 प्रजातियां भी खत्म हो गईं. ज्वालामुखी विस्फोट और पिंड की टक्कर से हुए जलवायु परिवर्तन का असर 35 लाख साल तक धरती पर रहा.

मिशिगन यूनिवर्सिटी की वैज्ञानिक सियेरा पीटरसन कहती हैं, "तापमान का यह नया रिकॉर्ड सीधे ज्लावामुखी और टक्कर के बीच के हालात दिखाता है. ज्लावामुखी की वजह से पर्यावरण तनाव में आ गया, वह इतना कमजोर हो गया कि टक्कर ने उसे गिरा दिया."

वैज्ञानिक एक बार फिर जलवायु परिवर्तन के खतरे से आगाह कर रहे हैं. इंसानी गतिविधियों से वातावरण का तापमान बढ़ रहा है, वैज्ञानिकों के मुताबिक अगर भविष्य में भी व्यापक जलवायु परिवर्तन हुआ तो इंसान का सफाया हो सकता है.

DW.COM

संबंधित सामग्री