भारत से घबराते विदेशी पर्यटक | दुनिया | DW | 20.03.2013
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दुनिया

भारत से घबराते विदेशी पर्यटक

बलात्कार की घटनाएं अब भारत के पर्यटन उद्योग पर भी असर डालने लगी हैं. पर्यटक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. कई देशों ने भारत जाने की तैयारी कर रहे अपने नागरिकों को सलाह भी दी है.

स्विस दंपत्ति बैगपैकर्स की तरह भारत आए. वे मुंबई से दिल्ली तक साइकिल से जाना चाहते थे. मध्य प्रदेश में ओरछा से आगरा की तरफ जाते हुए रात हो गई. गांव से थोड़ी दूर उन्होंने जंगल में कैंप लगाया. अंधेरा गहराते ही कैंप पर सात-आठ लोगों ने हमला किया. हमलावरों ने पति को बांधा दिया और उसी के सामने उसकी 39 साल की पत्नी से बलात्कार किया. घटना के बाद महिला को पास के अस्पताल में मेडिकल जांच के लिए ले जाया गया. पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

कहां है दिक्कत

मध्य प्रदेश अपराधों और लिंगानुपात के लिए कुख्यात है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक हर दिन राज्य में बलात्कार के नौ मामले सामने आते हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि कन्या भ्रूण हत्या के मामले में भी मध्य प्रदेश पहले नंबर है. 2011 की जनगणना के मुताबिक राज्य में लिंगानुपात राष्ट्रीय औसत से भी कम है. मध्य प्रदेश में 1,000 पुरुषों पर 930 महिलाएं हैं. भारत में 1,000 पुरुषों पर 940 महिलाएं हैं.

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से रिटायर हो चुके समाजशास्त्र के प्रोफेसर दीपांकर गुप्ता भी लिंगानुपात को लेकर संवेदनशील है. वह मानते है कि उत्तर भारत में लिंगानुपात की खराब स्थिति और बढ़ती बलात्कार की घटनाओं में संबंध है, "उत्तराधिकार, अंत्येष्टि अधिकार, वंशवाद की परंपरा और इसके ऊपर लड़की की शादी में होने वाला खर्च, इन सारी चीजों साथ मिलकर भारत में लड़कों को तरजीह देती हैं."

परवरिश के दौरान ही लड़कों को दिए जाने वाले भाव को भी गुप्ता जिम्मेदार ठहराते हैं, "पुरुष श्रेष्ठ हैं, महिलाओं को झुकना चाहिए, यह एक नीति सी बन गई है, जिसके साथ वे बड़े हो रहे हैं." बेरोजगारी और शराब की लत उत्तर भारत में स्थिति को और खराब कर रही है.

भारत में सबसे खराब लिंगानुपात वाले राज्य हरियाणा में तो ऐसे मामले भी सामने आ रहे हैं जहां महिलाओं को अगुवा किया जा रहा है. कुछ मामलों में शादी के लिए पूर्वोत्तर भारत से महिलाओं को खरीदकर हरियाणा लाया जा रहा है. लेकिन गुप्ता मानते है कि बलात्कार की घटनाओं के लिए सिर्फ अकेले लिंगानुपात ही जिम्मेदार नहीं है. उनके मुताबिक दक्षिण अफ्रीका या भारत जैसे देशों में होने वाली सामूहिक बलात्कार की घटनाएं पुरुषों की मानसिक दशा को भी दिखाती हैं, "यह ताकत दिखाने जैसा है. पुरुष साथ आते हैं और एक दूसरे के विचारधारा संबंधी दोषों, परवरिश और हैसियत को बढ़ा चढ़ा कर पेश करते हैं. इस तरह वे महिलाओं को एक लाचार स्थिति में देखते हैं और उस पर ताकत का इस्तेमाल करते हैं."

पयर्टक जरा ध्यान दें

भारत में महिलाओं के खिलाफ हिंसा से निपटने के लिए जल्द से जल्द प्रभावी कदमों की जरूरत है. इस बीच कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि स्विस दंपत्ति को अपराधों के लिए बदनाम राज्य में एक अंजान जंगल में कैंप नहीं लगाना चाहिए था. नई दिल्ली में बीते सात साल से रह रहीं एक जर्मन महिला कहती हैं कि वे दुनिया के कई इलाकों में इस ढंग से कैंपिंग करने के विचार करने से पहले दो बार सोचेंगी. भारत के इस इलाके के बारे में तो खास तौर पर वह बहुत गंभीरता से सोचेंगी. स्विस दंपत्ति के साथ हुई वारदात के बाद उन्होंने कहा, "रोमांच की तलाश में निकले जोड़े ने जोखिम का अंदाजा ठीक ढंग से नहीं लगाया. अपने अनुभव की बात करूं तो मैं पर्यटकों को यह सलाह नहीं दूंगी कि वो भारत में कहीं भी अचानक कैंप लगा लें. व्यक्तिगत रूप से मैं सुरक्षित महसूस नहीं करूंगी, लूट के डर से और प्राकृतिक कारणों से."

Flash-Galerie Swimmingpool 2010

अतुल्य भारत की मुश्किल

भारत में लंबे समय तक रहने के बाद जर्मन महिला ने घूमते हुए क्या करना चाहिए और क्या नहीं, इसकी लिस्ट बना ली है. वह कहती हैं कि भारत के सांस्कृतिक ताने बाने और देश में अपराधों की समस्या के प्रति संवेदनशील होना जरूरी है, "मैं अंधेरे में अकेले नहीं जाती हूं. मैं सुनसान गलियों से बचने की कोशिश करती हूं. अगर मुझे देर रात सफर करना पड़े तो मैं यह पक्का करती हूं कि मैं अपने दोस्तों के साथ रहूं और सिर्फ उन्हीं की कार में सफर करूं. देर रात को मैं सार्वजनिक परवहन का इस्तेमाल करने से बचती हूं, इसी वजह से मैं ज्यादा सुरक्षित महसूस करती हूं."

पर्यटन उद्योग को धक्का

बीते साल दिसंबर से भारत बलात्कार की वजह से सुर्खियों में है. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान जोर शोर से इस पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं. 16 दिसंबर की रात दिल्ली में 23 साल की छात्रा से हुए बलात्कार के बाद भारत में जबरदस्त प्रदर्शन हुए. अंतरराष्ट्रीय मीडिया में अब भी भारत में महिलाओं की स्थिति पर चर्चा हो रही है. लेकिन दिल्ली गैंगरेप के बाद भी हालात बदलते नहीं दिखे. उस घटना के बाद पंजाब में बस में युवती से सामूहिक बलात्कार हुआ, दिल्ली में दक्षिण कोरिया की एक महिला से बलात्कार हुआ. गुड़गांव में चीनी महिला हवस का शिकार बनी.

अमेरिका और ब्रिटेन के दूतावास भारत जाने की इच्छा रखने वाले अपने नागरिकों को चेतावनी भी दे रहे हैं. जर्मनी ने भी अपने नागरिकों और खास तौर पर महिलाओं से कहा है कि वे भारत में हरदम चौकस रहें. आशंका है कि आए दिन होती बलात्कार की घटनाओं का असर भारत के पर्यटन उद्योग पर भी पड़ेगा. दिल्ली में ट्रैवल एजेंसी चलाने वाले सुनील मनोचा के मुताबिक भारत की छवि पर गहरा धब्बा लग सकता है, "विदेशी पर्यटक के साथ हुए वाकये ने निश्चित तौर पर भारत आने वाले पर्यटकों को चिंतित किया है."

स्विस महिला से बलात्कार विदेशी महिला के साथ हुई अकेली घटना नहीं है. महीने भर पहले ही नई दिल्ली में घर में घुसकर एक विदेशी महिला से बलात्कार हुआ. 2009 में मुंबई में कॉलेज के छात्रों ने पार्टी में मिली एक अमेरिकी युवती से सामूहिक बलात्कार किया. 2008 में गोवा में 15 साल की ब्रिटिश किशोरी स्कारलेट की बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई. 2003 में नई दिल्ली की एक कार पार्किंग में स्विस दूतावास की अधिकारी से बलात्कार किया गया.

बड़ी समस्या यह भी है कि बलात्कार के ज्यादातर मामलों में न्याय मिलता ही नहीं. इसके अलावा पुलिस और राज्य प्रशासन भी महिलाओं के खिलाफ हो रही यौन हिंसा को रोकने में असमर्थ दिखते हैं. मनोचा के मुताबिक बदलाव के लिए लोगों की मानसिकता बदलने की जरूरत है.

स्विस महिला से हुए सामूहिक बलात्कार का विरोध अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी हो रहा है. माइक्रोब्लॉगिग साइट ट्विटर पर कई लोग भारत में महिलाओं की सुरक्षा पर चिंता जता रहे हैं. भारत जाने का मन बना चुके कई पर्यटक अपनी योजना रद्द करने की तैयारी कर रहे हैं. कुछ पर्यटक भारत के बजाए किसी और देश में जाने की तैयारी कर रहे हैं.

दस साल पहले पैदल चलकर दक्षिण भारत को अच्छे से जानने वाली जेसन मानती है कि भारत बहुत बदल चुका है. आए दिन होती बलात्कार की घटनाओं पर चर्चा करते हुए वह कहती हैं, "इसमें कोई शक नहीं है कि इन रिपोर्टों का विदेशी सैलानियों पर असर पड़ेगा." इंडियन असोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स के निदेशक गौड़ काजीलाल तो खतरे को साफ देख भी रहे हैं, "महिलाएं अन्य जगहों जैसे सिंगापुर या बाली या फिर थाइलैंड जाना पसंद करेंगी, वहां सुरक्षा एक बड़ी चिंता नहीं है. विदेशियों के खिलाफ हो रहे अपराधों की रिपोर्टिंग की पहली मार हमारे उद्योग पर पड़ रही है."

रिपोर्ट: रोमा राजपाल/ओ सिंह

संपादन: आभा मोंढे

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