भारत में 3जी फ़्रीक्वेंसियों की नीलामी | दुनिया | DW | 09.04.2010
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दुनिया

भारत में 3जी फ़्रीक्वेंसियों की नीलामी

भारत में शुक्रवार को तीसरी पीढ़ी की टेलिफ़ोनी (3जी) के लिए रेडियो फ़्रीक्वेंसी स्पेक्ट्रम की नीलामी शुरू हुई है. पूरे देश में 22 सर्विस एरिया के लिए नीलामी हो रही है.

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बोली लगाने वाली कंपनियों में भारत की प्रमुख मोबाइल फ़ोन कंपनियां भारती एयरटेल और रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड भी शामिल है.

दूरसंचार मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा है कि नीलामी शुरू हो चुकी है, लेकिन साथ ही यह भी कहा है कि इसे पूरा होने में कई सप्ताह लग सकते हैं. एक अधिकारी ने गुमनामी की शर्त पर कहा, "यह कदम-ब-कदम पूरी की जाने वाली प्रक्रिया है. नीलामी को बंद करने की कोई समयसीमा नहीं है."

3जी एयरवेव और ब्रॉडबैंड वायरलेस एक्सेस (बीडब्ल्यूए) स्पेक्ट्रम की बिक्री से सरकार को 350 से 500 अरब रुपए की कमाई होने की उम्मीद है. बोली में नौ कंपनियां हिस्सा ले रही हैं.

तीसरी पीढ़ी की दूरसंचार सेवाओं में दूसरी पीढ़ी की जीएमएम सेवाओं से बड़े डेटा का ट्रांसफर संभव है. जीएसएम में अधिकतम 220kbit प्रति सेकंट डेटा ट्रांसफर संभव था तो तीसरी पीढ़ी 7.2 Mbit प्रति सेकंट संभव होगा. इससे इंटरनेट टीवी, वीडियो ऑन डिमांड, ऑडिया वीडियो कॉल और डेटा का हाइस्पीड आदान प्रदान संभव हो सकेगा.

जर्मनी में यूनीवर्सल मोबाबाइल टेलिकम्युनिकेसंस सिस्टम के नाम से 2000 में फ़्रीक्वेंसियों की नीलामी की गई थी. जर्मन सरकार को छह लाइसेंसों की बिक्री से लगभग 50 अरब यूरो की आमदनी हुई थी. 2004 से जर्मनी में यूएमटीएस व्यावसायिक रूप से उपलब्ध है और बाज़ार में पर्याप्त संख्या में टेलिफ़ोन सेट भी उपलब्ध हैं.

रिपोर्ट: एजेंसियां/महेश झा

संपादन: उज्जवल भट्टाचार्य

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