भारत में ठेके हासिल करने के लिए जर्मन कंपनी पर रिश्वत देने के आरोप | भारत | DW | 11.03.2021

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भारत

भारत में ठेके हासिल करने के लिए जर्मन कंपनी पर रिश्वत देने के आरोप

फोक्सवागन समूह की कंपनी स्केनिया पर आरोप लगे हैं कि उसने भारत में बसों के ठेके हासिल करने के लिए अधिकारियों और नेताओं को रिश्वत दी. जर्मनी में एजेंसियों ने इन आरोपों की प्राथमिक जांच शुरू कर दी है.

स्केनिया फोक्सवागन समूह की सहायक कंपनी है और इसका मुख्यालय स्वीडन में है. कंपनी के खिलाफ इन आरोपों का खुलासा स्वीडन के एक टीवी चैनल ने किया. चैनल के एक कार्यक्रम में दिखाया गया कि कंपनी ने 2013 से 2016 के बीच ठेके हासिल करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों और राजनेताओं को रिश्वत दी. चैनल ने बताया कि ईमेल, टेक्स्ट मेसेज, कागजातों और कुछ लोगों के बयानों में इन आरोपों के सबूत मिले हैं.

स्केनिया ने इन आरोपों को स्वीकार भी कर लिया है. कंपनी की मुख्य कार्यकारी हेनरिक हेनरिकसन ने टीवी चैनल से कहा कि कंपनी के अंदरूनी सिस्टम "को इस बारे में घंटी बजा देना चाहिए था, लेकिन ऐसा हुआ नहीं क्योंकि भारत में कंपनी के वरिष्ठ कर्मचारियों ने सिस्टम को नाकाम कर दिया." रिपोर्ट दिखाने वाले टीवी चैनल के मुताबिक स्केनिया की अंदरूनी समीक्षा में सामने आया था कि भारत के सात राज्यों में बस ठेकों के लिए पैसों का भुगतान किया गया था.

कंपनी ने ईमेल में भेजे एक बयान में बताया है कि टीवी चैनल पर जो जानकारी दी गई है वो "2017 में स्केनिया द्वारा खुद की गई जांच में सामने आए तथ्यों पर ही आधारित है." कंपनी ने बयान में यह भी कहा कि उस समय के जिन प्रबंधकों का इस सिलसिले में नाम आया है वो अब कंपनी छोड़ कर जा चुके हैं और स्केनिया ने भी अब भारत में बसें बेचना बंद कर दिया है.

Volkswagen

स्केनिया जर्मनी के फोक्सवागन समूह की कंपनी है.

कंपनी ने यह भी कहा कि इन सब के बावजूद पूरे मामले में "सबूत इतने मजबूत नहीं हैं कि इनसे किसी को दोषी ठहराया जा सके." लेकिन जर्मनी के ब्राउनश्वाइग में प्रॉजीक्यूटरों ने इन आरोपों में प्राथमिक जांच शुरू कर दी है. तहकीकात करने वालों में से एक ने बताया कि अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं या नहीं.

फोक्सवागन ने 2008 में स्केनिया में मालिकाना हिस्सेदारी हासिल की थी और 2014 में पूरी तरह से कंपनी को अपने नियंत्रण में ले लिया था. स्वीडन के टीवी चैनल ने बताया कि उसने इस रिपोर्ट के लिए जर्मनी के टीवी चैनल जेडडीएफ और भारत के कॉन्फ्लुएंस मीडिया से सहयोग किया था.

सीके/एए (डीपीए)

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