भारत में ठेके पर होम वर्क | मनोरंजन | DW | 23.05.2014
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मनोरंजन

भारत में ठेके पर होम वर्क

गर्मी की छुट्टियों में बच्चों के लिए होम वर्क का बोझ जरा ज्यादा हो जाता है. ऐसे में भारत में ठेके पर होम वर्क कराने वाली एजेंसियां पांव पसारने लगी हैं. यहां तक कि वे अखबारों में इश्तिहार भी दे रही हैं.

हिन्दुस्तान टाइम्स ने शुक्रवार को इस बाबत एक विस्तृत रिपोर्ट छापी है. अखबार ने लिखा है कि भले ही टीचरों के लिए यह अच्छी खबर न हो लेकिन कई "एक्सपर्ट" बच्चों का होम वर्क कराने का ठेका लेने लगे हैं. ओएलएक्स नाम की वेबसाइट पर विज्ञापन है, "छुट्टियों के होम वर्क की चिंता छोड़ दें. हर क्लास के होम वर्क एक्सपर्टों के जरिए कराएं."

होम वर्क करने वाले ये एक्सपर्ट प्रोजेक्ट तैयार कर देते हैं, आर्टिकल लिख देते हैं, यहां तक कि पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन भी बना देते हैं. अब तो इनमें भी प्रतिद्वंद्विता चल पड़ी है कि कौन कम दाम में होम वर्क करा सकता है.

अभिषेक शर्मा को हर साल छुट्टियों में 25 ऑर्डर मिलते हैं. उनका दावा है कि वह "बढ़िया क्वालिटी के होम वर्क" कर सकते हैं. वह साधारण प्रोजेक्ट के लिए 1000 रुपये और मुश्किल के लिए 3000 रुपये लेते हैं. कोचिंग इंस्टीट्यूट चलाने वाली दीपिका वर्मा का कहना है कि बिजनेस में प्रतिद्वंद्विता बढ़ गई है, "बहुत कॉम्पिटिशन है. मैं तो यह काम छोड़ना चाह रही हूं. कई बच्चे हमें फोन करते हैं और उनके मां बाप को इसकी जानकारी नहीं होती और वे इसका खर्च भी नहीं उठा सकते."

लहर राज भी इस बिजनेस में लगे हैं. उनका कहना है कि स्कूल वाले जरूरत से ज्यादा बोझ लाद देते हैं, "जिस तरह का काम छुट्टियों में दिया जाता है, उसे तो सिर्फ मां बाप ही पूरा कर सकते हैं."

दिल्ली की स्प्रिंगडेल्स स्कूल की प्रिंसिपल अमीता मुल्ला वट्टल कहती हैं, "हम बच्चों को छुट्टी के लिए एक जर्नल बनाने के लिए कहते हैं. अगर उन्होंने अपना प्रोजेक्ट खुद नहीं तैयार किया है, तो उसका मूल्यांकन नहीं किया जाता. बच्चों को भी यह पता है."

एजेए/एमजी (डीपीए)

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