भारत में अक्टूबर तक आ सकती है कोरोना की तीसरी लहर | भारत | DW | 18.06.2021
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भारत

भारत में अक्टूबर तक आ सकती है कोरोना की तीसरी लहर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में अक्टूबर तक कोरोना वायरस महामारी की तीसरी लहर आ सकती है. हालांकि उन्हें उम्मीद है कि दूसरी लहर के मुकाबले इस बार महामारी पर बेहतर नियंत्रण रहेगा.

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच रॉयटर्स द्वारा कराए गए एक सर्वेक्षण में सामने आया है कि महामारी भारत में कम से कम अगले एक और साल तक जन स्वास्थ्य के लिए एक खतरा बनी रहेगी. सर्वेक्षण तीन से 17 जून के बीच करवाया गया था और इसमें दुनिया भर के 40 स्वास्थ्य विशेषज्ञों, डॉक्टरों, वैज्ञानिकों, वायरस वैज्ञानिकों, महामारी वैज्ञानिकों और प्रोफेसरों ने भाग लिया था. विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि अगर टीकाकरण की रफ्तार बढ़ती है तो अगली लहर से कुछ राहत भी मिल सकती है.

24 विशेषज्ञों ने पूर्वानुमान लगाया और उनमें से 21 ने (यानी 85 प्रतिशत से ज्यादा ने) कहा कि अगली लहर अक्टूबर तक आएगी. इनमें से तीन विशेषज्ञों का तो कहना था कि अगली लहर अगस्त में ही आ सकती है. इनमें से 12 का अनुमान था कि अगली लहर सितंबर तक आएगी. बाकी तीन ने कहा कि लहर नवंबर से फरवरी के बीच में आएगी. लेकिन 34 में से 24 विशेषज्ञों का (यानी 70 प्रतिशत से ज्यादा का) मानना है की अगली किसी भी लहर पर दूसरी लहर के मुकाबले ज्यादा नियंत्रण रखना संभव होगा.

दिल्ली के एम्स अस्पताल के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने बताया, "इस पर बेहतर नियंत्रण हो पाएगा क्योंकि संक्रमण के मामले पहले से काफी कम होंगे...काफी लोगों को टीका लग चुका होगा और दूसरी लहर की वजह से कुछ हद तक स्वाभाविक इम्यूनिटी भी हो गई होगी." अभी तक भारत में टीके के लिए योग्य 95 करोड़ लोगों में से सिर्फ लगभग पांच प्रतिशत लोगों का टीकाकरण पूरा हो चुका है.

Indien Coronavirus Pandemie

असम के गुवाहाटी में टीका मिलने का इंतजार करते लोग

जल्दबाजी से होगा संकट

सर्वेक्षण में अधिकांश स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पूर्वानुमान लगाया कि टीकाकरण अभियान इस साल काफी आगे बढ़ेगा, लेकिन इसके साथ उन्होंने कुछ राज्यों द्वारा प्रतिबंधों को हटाने में दिखाई जा रही जल्दबाजी के खिलाफ चेताया. सर्वेक्षण में 40 में से 26 ने (यानी लगभग दो तिहाई ने) माना कि तीसरी लहर अगर आती है तो उसमें बच्चों और 18 साल से काम उम्र के लोगों को खतरा ज्यादा होगा.

निम्हांस में महामारी विज्ञान विभाग के प्रमुख डॉक्टर प्रदीप बानंदूर के मुताबिक, "इसका कारण यह है कि टीकाकरण के लिहाज से यह आबादी का बिलकुल अनछुआ वर्ग है क्योंकि इस समय इनके लिए कोई टीका उपलब्ध ही नहीं है." विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि स्थिति गंभीर बन सकती है. नारायणा हेल्थ कंपनी के चेयरमैन और महामारी से संबंधित नीतियों पर कर्नाटक सरकार के सलाहकार डॉक्टर देवी शेट्टी कहते हैं, "अगर बच्चे बड़ी संख्या में संक्रमित हो गए और हम उसके लिए तैयार नहीं रहे, तो आखिरी समय में आप कुछ नहीं कर पाएंगे."

वायरस के वेरिएंट

उन्होंने आगे कहा, "ये एक अलग ही समस्या हो जाएगी क्योंकि देश में बच्चों के लिए आईसीयू बिस्तर बहुत ही कम हैं, और ये एक आपदा बन जाएगी. हालांकि 14 विशेषज्ञों ने कहा कि बच्चों पर जोखिम नहीं है. एक अलग सवाल के जवाब में 38 में से 25 विशेषज्ञों ने कहा कि भविष्य में आने वाले कोरोना वायरस के वेरिएंट मौजूदा टीकों को प्रभावहीन नहीं कर पाएंगे. 41 में से 30 ने कहा कि कोरोना वायरस भारत में कम से कम एक साल तक जन स्वास्थ्य के लिए एक खतरा बना रहेगा.

11 ने कहा कि खतरा एक साल से कम तक रहेगा, 15 ने कहा कि ये एक साल से ज्यादा लेकिन दो साल से कम तक रहेगा, 13 ने कहा कि दो साल से भी ज्यादा तक रहेगा और दो ने कहा कि जोखिम कभी भी खत्म नहीं होंगे. मेरीलैंड विश्वविद्यालय में मानव वायरस विज्ञान संस्थान के निदेशक रोबर्ट गैलो के मुताबिक, "कोविड-19 एक ऐसी समस्या है जिसका समाधान हो सकता है, क्योंकि इसका समाधान करने के लिए टीका ईजाद करना आसान था. दो सालों में टीके और बीमारी के प्रसार की वजह से भारत में संभवतः हर्ड इम्यूनिटी आ जाएगी."

सीके/एए (रॉयटर्स)

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