भारत-पाकिस्तान कदम-कदम बढ़ रहे बातचीत की ओर | भारत | DW | 24.03.2021
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भारत

भारत-पाकिस्तान कदम-कदम बढ़ रहे बातचीत की ओर

प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर दोनों देशों के बीच दोस्ताना रिश्तों की कामना की है. जानकारों का कहना है कि एक लंबे अरसे के मनमुटाव के बाद दोनों देश रिश्तों को सुधारने के कई कदम उठा रहे हैं.

23 मार्च को पाकिस्तान दिवस पर मिली मोदी की चिट्ठी की पुष्टि पाकिस्तान सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने की. असद उमर ने चिट्ठी का स्वागत करते हुए ट्विटर पर उसे "सदभावना का संदेश" बताया और कहा है कि इमरान पहले ही दक्षिण एशिया में शांति की उनकी कामना अभिव्यक्त कर चुके हैं.

दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों ने चिठ्ठी के बारे में कुछ नहीं कहा है, लेकिन मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि मोदी ने लिखा, "भारत पाकिस्तान के लोगों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध चाहता है" और "इसके लिए भरोसे के वातावरण की जरूरत है, जिसमें ना आतंक हो और ना शत्रुता."

सामान्य तौर पर जब प्रधानमंत्रियों के बीच इस तरह के औपचारिक पत्र लिखे जाते हैं तो उसे सार्वजनिक करने से परहेज नहीं किया जाता है, लेकिन इस चिट्ठी की आधिकारिक रूप से घोषणा दोनों ही पक्षों की तरफ से नहीं की गई है. इससे पहले 20 मार्च को मोदी ने एक ट्वीट के जरिए इमरान खान को कोविड-19 से जल्द ठीक हो जाने की शुभकामना भी दी थी. इसके अलावा भी हाल के दिनों में दोनों पक्षों की तरफ से आपसी मनमुटाव को शांत करने के कई प्रयास देखे गए हैं.

लगभग ढाई साल के बाद दोनों देशों के बीच नदियों के पानी के बंटवारे को लेकर बातचीत शुरू हुई है, जो इस समय दिल्ली में चल रही है. पिछले सप्ताह, पाकिस्तान की शक्तिशाली सेना के प्रमुख जनरल कमर बाजवा ने एक बयान में कहा कि अब दोनों देशों को पीछे की बातों को भुला कर आगे की तरफ देखना चाहिए. इसी महीने पाकिस्तान के घुड़सवारों की टीम एक प्रतियोगिता में हिस्सा लेने दिल्ली आई थी.

पिछले महीने, दोनों देशों की सेनाओं ने एक असाधारण साझा बयान में नियंत्रण रेखा पर युद्ध विराम और दूसरी संधियों के पालन के प्रति प्रतिबद्धता जताई. दोनों देशों के रिश्ते पिछले दो सालों में काफी बिगड़ गए थे. फरवरी 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले और उसके 12 दिन बाद भारतीय वायु सेना द्वारा पाकिस्तान के बालाकोट में हवाई हमले की वजह से दोनों देश जंग की कगार पर पहुंच गए थे.

दोनों देशों ने अपने अपने उच्च आयुक्तों को भी वापस बुला लिया था और दूतावासों को भी लगभग बंद कर दिया था. रिश्तों को सामान्य करने के लिए दोनों पक्षों को उच्च आयुक्तों को फिर से नियुक्त करना होगा. कई जानकारों का यह मानना है कि ये सभी कदम भारत-पाकिस्तान के बीच रिश्तों के सुधरने के संकेत हैं. इसके कई कारण गिनाए जा रहे हैं.

वरिष्ठ पत्रकार संजय कपूर ने डीडब्ल्यू को बताया कि अमेरिका भी भारत-पाकिस्तान के बीच शांति की बहाली की कोशिश कर रहा है क्योंकि वो चाहता है कि पाकिस्तान चीन के आलिंगन से निकले. उन्होंने ने यह भी कहा कि अमेरिका अफगानिस्तान से जल्द निकलना भी चाहता है और अफगानिस्तान में शांति के लिए भी भारत और पाकिस्तान के रिश्ते सामान्य होने की जरूरत है.

संजय यह भी मानते हैं कि यूएई और सऊदी अरब भी भारत और पाकिस्तान की मित्रता करवाने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि वो चाहते हैं कि भारत ईरान में निवेश करना बंद करे और मध्य एशिया तक पहुंचने के लिए ईरान की जगह पाकिस्तान का इस्तेमाल करे. फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों देश उच्च आयुक्तों को जल्द नियुक्त करते हैं या नहीं.

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