″भारत नहीं छीन रहा अमेरिकियों की नौकरी″ | जर्मन चुनाव 2017 | DW | 16.08.2010
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जर्मन चुनाव

"भारत नहीं छीन रहा अमेरिकियों की नौकरी"

अमेरिकी चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स ने भारतीय कंपनियों की तरफदारी करते हुए कहा है कि भारत अमेरिकियों की नौकरी नहीं छीन रहा है. अमेरिकी चेम्बर्स ने इन आरोपों को भी खारिज किया है कि भारत सबसे ज्यादा एच1बी वीजा हथियाता है.

सवाल नौकरियों का

सवाल नौकरियों का

इमिग्रेशन पर अपनी ताजा रिपोर्ट में अमेरिकी चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स ने कहा है कि भारत की कंपनियों पर लग रहे आरोपों को बढ़ा चढा कर पेश किया जा रहा है. तीस लाख सदस्यों वाला अमेरिकी चेम्बर दुनिया का सबसे वाणिज्य संघ है.

इसकी रिपोर्ट कहती हैं कि कुछ लोगों को डर है कि एच1बी वीजा पर भारत से बुलाए जाने वाले प्रोफेशनल्स अमेरिकी लोगों की नौकरी के लिए खतरा हैं या कइयों को चिंता है कि भारतीय कंपनियां अपने ज्यादातर कर्मचारियों का ग्रीन कार्ड स्पॉन्सर नहीं करतीं. लेकिन ऐसे मामलों की संख्या इतनी कम है कि उसके आधार पर कुछ कहना मुश्किल है.

रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2009 में भारतीय आईटी कंपनियों ने 4,809 एच1बी वीजा इस्तेमाल किए जो अमेरिकी असैन्य कार्यबल का 0.003 प्रतिशत है. यह एक प्रतिशत के सौवें हिस्से से भी कम है. देखा जाए तो 2006 से 2009 के बीच भारतीय कंपनियों की तरफ से एच1बी वीजा के इस्तेमाल में 70 फीसदी की गिरावट आई है.

रिपोर्ट में अमेरिकी नागरिकता और इमिग्रेशन सेवा के हवाले से कहा गया है कि एच1बी वीजा से शुरू में लाभ उठाने वालों में भारतीय कंपनियों की हिस्सेदारी सिर्फ छह प्रतिशत है. भारत या फिर अन्य देशों की आईटी कंपनियां अमेरिका में सिर्फ इसलिए काम करती हैं क्योंकि अमेरिकी कंपनियां सोचती हैं कि इससे उनके बिजनेस को ज्यादा फायदा होगा.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः आभा एम

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