′भारत के विचार′ को नष्ट कर रहे नरेंद्र मोदी: शशि थरूर | भारत | DW | 28.08.2019
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भारत

'भारत के विचार' को नष्ट कर रहे नरेंद्र मोदी: शशि थरूर

भारत प्रशासित कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने के बाद देश में विपक्ष नरेंद्र मोदी के फैसले की आलोचना कर रहा है. कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भारत में मानवाधिकार और कश्मीर मुद्दे को लेकर डीडब्ल्यू से खास बात की.

भारत सरकार ने 5 अगस्त 2019 को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 में संशोधन कर जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त कर दिया. प्रदेश को विभाजित कर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया. फैसले के वक्त जम्मू-कश्मीर के कई स्थानीय नेताओं को नजरबंद कर दिया गया जो अभी भी जारी है. जम्मू-कश्मीर में संचार के साधनों को बंद कर दिया गया और सभी जगह अर्धसैनिक बल के जवान तैनात कर दिए गए.

जर्मनी के गोएटिंगेन शहर में भारत के छात्रों के सम्मेलन में शामिल होने पहुंचे भारतीय सांसद शशि थरूर ने कश्मीर को लेकर डीडब्ल्यू की एशिया प्रमुख देबारती गुहा से बात की. शशि थरूर ने कहा, "कश्मीर को लेकर किया गया फैसला लोकतंत्र की आत्मा पर करारा प्रहार है. सर्वोच्च न्यायालय को अभी लग सकता है कि यह कानून का उल्लंघन नहीं है, लेकिन निश्चित रूप से लोकतंत्र की भावना का उल्लंघन है."

शशि थरूर ने कश्मीरियों के लिए नई दिल्ली द्वारा उठाए गए कदम की आलोचना की. साथ ही कहा कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा के सदस्यों से बात किए बिना केंद्र सरकार ने एकतरफा फैसला लिया. थरूर ने कहा, "यह साफ है कि भारत सरकार ने जो फैसला लिया है वह भारतीय लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है. केवल इस वजह से नहीं कि सिर्फ कश्मीर पर लिया गया फैसला गलत है बल्कि इस वजह से भी कि वे कल किसी और राज्य के लिए भी ऐसा ही कोई फैसला अचानक ले सकते हैं." कांग्रेस सांसद ने कहा कि नई दिल्ली के फैसले ने ताकत के बल फैसले लेने की भावनाओं को बढ़ाया है और नतीजतन देश के युवाओं ने "राष्ट्रीय गौरव और अंधराष्ट्रवाद" का प्रदर्शन किया.

पाकिस्तान और चीन नहीं कर सकता भारत की आलोचना

हिमालयी क्षेत्र जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग हिस्सों पर भारत और पाकिस्तान का शासन है. दोनों दावा करते हैं कि पूरा क्षेत्र उनका है. परमाणु हथियार से संपन्न दोनों देशों के बीच यह अशांत क्षेत्र विवाद का केंद्रबिंदु है. थरूर को लगता है कि मोदी सरकार की आलोचना का मतलब यह नहीं है कि पाकिस्तान और चीन दोनों को दोषमुक्त कर देना चाहिए. उनका मानना है कि ये दोनों देश भी संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. वे कहते हैं, "पाकिस्तान जिसने खुद के शासन वाले जम्मू-कश्मीर नें कई जनसांख्यिकीय, प्रशासनिक और राजनीतिक अपराधों को अंजाम दिया है. अब वह भारत की आलोचना कर रहा है." थरूर ने दावा किया कि पाकिस्तान प्रशासित जम्मू-कश्मीर के 97% हिस्से में पंजाब प्रांत के लोग हैं, न कि मूल कश्मीरी.

चीन भी इस क्षेत्र के कुछ हिस्से पर दावा करता है और उसने मोदी सरकार द्वारा कश्मीर को लेकर उठाए गए कदम की आलोचना की है. भारत और चीन के बीच 1962 में हुए युद्ध का संदर्भ देते हुए थरूर कहते हैं, "चीन एक तरफ कश्मीर को विवादित क्षेत्र मानता है और दूसरी ओर 1962 में पाकिस्तान से कश्मीर में बड़ा रास्ता देने के लिए दबाव बनाया." थरूर दावा करते हैं कि चीन और पाकिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति भारत की तुलना में काफी खराब है. वे कहते हैं कि ऐसे में न तो चीन और न ही पाकिस्तान कश्मीर में मानवाधिकारों को लेकर कुछ बोल सकते है. वे कहते हैं, "यदि अनुचित तरीके से हमला होता है तो मैं अपने झंडे और देश के साथ खड़ा रहूंगा."

थरूर का मानना है कि भारत में इस समय हिंदू-मुस्लिम संबंधों, राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और इतिहास के मुद्दों पर सार्वजनिक बहस हो रही है. भारत की अर्थव्यवस्था काफी नीचे गिर चुकी है, जिसे अनदेखा किया जा रहा है. देश में बेरोजगारी दर काफी बढ़ चुकी है और ऑटोमोबाइल सहित कई उद्योगों का मुनाफा घट रहा है. वे कहते है, "नरेंद्र मोदी के सरकार में भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत जितनी खराब है, उतनी कभी नहीं हुई है. लोग इससे व्यक्तिगत रूप से प्रभावित हो रहे हैं लेकिन कोई इसके बारे में चर्चा नहीं कर रहा है."

भारत में कट्टरता

पिछले कुछ सालों में दक्षिणपंथियों द्वारा लिंचिंग की कई घटनाएं सामने आई है जिनमें बीफ खाने और हिंदू नारे नहीं बोलने पर मुसलमानों को निशाना बनाया गया है. थरूर कहते हैं कि वे 'भारत के विचार (आइडिया ऑफ इंडिया)' में विश्वास रखते हैं, जिसे बंगाली कवि और नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा परिकल्पित किया गया था. वे कहते हैं, "सत्ता में शामिल लोगों द्वारा बडे पैमाने पर फैलाए गए कट्टरता से देश का नैतिक चरित्र प्रभावित हुआ है. और धर्मनिरपेक्षता में इस तरह की कट्टरता कई मायनों में भारत के विचार के लिए विदेशी है जो स्वतंत्रता संग्राम के माध्यम से आई थी."

भारत और पाकिस्तान दोनों को 1947 में ब्रिटिश शासन से आजादी मिली. थरूर जोर देकर कहते हैं, "पाकिस्तान का निर्माण कुछ लोगों द्वारा धर्म के आधार पर किया गया. लेकिन दूसरी ओर जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गांधी, बीआर अंबेडकर, मौलाना आजाद ने कहा कि नहीं, हमारी आजादी के पीछे सभी जाति, धर्म, समुदाय, भाषा, रंग वाले लोगों का संघर्ष है और हमारा देश सबके लिए है."

भारत में धार्मिक ध्रुवीकरण का हवाला देते हुए थरूर ने आगाह किया कि भारतीय संविधान पर हमला हो रहा है. उन्होंने कहा, "भारत को पाकिस्तान के हिंदू संस्करण में बदलने के भारतीय संविधान के साथ विश्वासघात करना मेरे विचार से हमारी आजादी की लड़ाई के साथ विश्वासघात है."

थरूर को लगता है कि भारत की सेक्युलर परंपरा को जीवित रखने के लिए विभिन्न समूहों के बीच समझदारी बढ़ानी होगी. वे कहते हैं, "मुझे लगता है कि भारत में सहनशीलता से ज्यादा की जरूरत है क्योंकि हमारी विविधता की जड़ें काफी गहरी है. हमें दूसरे की पूजा पद्धति, उनके रंग, उनके खाने के तरीके और भाषा को स्वीकार करने की जरूरत है. यही हमारी ताकत रही है और इसे कमजोर करना हमारी सबसे बड़ी विफलता होगी."

रिपोर्टः मानसी गोपालकृष्णण

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