भारत की अमेरिकी दूतावास पर और सख्ती | दुनिया | DW | 08.01.2014
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दुनिया

भारत की अमेरिकी दूतावास पर और सख्ती

भारत ने अमेरिका से नई दिल्ली दूतावास परिसर में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को रोकने के लिए कहा है. भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े की गिरफ्तारी के बाद से दोनों देशों के बीच चल रही खींच तान में एक और अध्याय जुड़ गया है.

भारत ने अमेरिकी दूतावास को 16 जनवरी तक उसके परिसर में चलाई जा रही सभी व्यावसायिक गतिविधियों को रोकने के लिए कहा है. सरकार ने कहा है कि अमेरिकन कम्यूनिटी सपोर्ट एसोसिएशन (एसीएसए) के अंतर्गत चल रहे रेस्तरां, बार, वीडियो क्लब, बोलिंग एली, स्वीमिंग पूल, ब्यूटी पार्लर, जिम और खेल के मैदान भी इस दायरे में आते हैं.

देने होंगे टैक्स भरने के सबूत

भारत ने अमेरिका से एसीएसए की सभी व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े टैक्स रिटर्न के साक्ष्य मांगे हैं जो उन्होंने भारतीय अथॉरिटी के पास दर्ज कराये हैं. एसीएसए की इन सुविधाओं का इस्तेमाल भारत में निजी रूप से रह रहे अमेरिकी नागरिक और उनके परिवार के सदस्यों जैसे गैर राजनयिक लोग भी करते आए हैं. इन सुविधाओं के इस्तेमाल के लिए हर साल गैर राजनयिक लोग हजारों डॉलर की फीस देते हैं. भारतीय प्रशासन ने बताया है कि गैर राजनयिक लोगों को इस तरह की व्यावसायिक सुविधाएं देना 1961 के वियना कन्वेंशन के आर्टिकिल 41(3) का उल्लंघन है.

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु वर्धन रेड्डी ने बताया कि सरकार इस मामले में अमेरिकी दूतावास की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रही है. अमेरिका के इन व्यावसायिक गतिविधियों को बंद न करने की स्थिति में भारत का रूख पूछने पर रेड्डी ने बताया, "यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि अमेरिकी दूतावास आगे क्या कदम उठाता है. पूरी दुनिया में किसी भी दूतावास को ऐसी गतिविधियों में लिप्त होने का अधिकार नहीं है." अमेरिकी दूतावास ने इस मामले पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है.

भरना पड़ेगा जुर्माना भी

सूत्रों के हवाले से यह खबर भी आयी है कि अमेरिकी राजनयिकों को भी अनधिकृत पार्किंग में कार खड़ी करने, खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाने या ट्रैफिक लाइट का पालन न करने जैसे किसी भी यातायात नियम का उल्लंघन करने पर जुर्माना किया जाएगा.

पिछले ही महीने नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के सामने बनाए गए कंक्रीट के बैरीकेड हटा दिए थे. ये बैरीकेड अमेरिकी दूतावास के बाहर यातायात को नियंत्रित करते थे. भारतीय मीडिया के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों को आयात में दी गई रियायतें भी हटा दी गई हैं. अब अमेरिकी अधिकारियों को आम व्यक्ति की तरह कस्टम नियमों का पालन करना होगा.

विशेषाधिकार पर विवाद

पिछले महीने न्यूयार्क में भारत की उप वाणिज्य दूत देवयानी खोबरागड़े को हिरासत में ले लिया गया था. उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने घर में काम करने वाले एक कर्मचारी के लिए वीजा नियमों में धांधली की और उसे कम मेहनताना दिया. खोबरागड़े के खिलाफ इस मामले में 13 जनवरी तक अभियोगपत्र दाखिल किया जाना है.

भारतीय मीडिया के अनुसार 39 साल की खोबरागड़े की कपड़े उतार कर जांच की गई थी. जबकि अमेरिका ने अपनी कार्यवाही को उचित बताते हुए कहा कि गिरफ्तारी के समय कपड़े उतार कर तलाशी लेना भी "सामान्य मानकों" के अंतर्गत आता है. वीजा में धोखाधड़ी करने का दोषी पाये जाने पर खोबरागड़े को दस साल की और गलत हलफनामा दायर करने के लिए पांच साल की सजा हो सकती है. खोबरागड़े को राजनयिक विशेषाधिकार मिलने चाहिये या नहीं इसको लेकर अमेरिकी एटर्नी और खोबरागड़े के वकील के बीच विवाद चला आ रहा है.

आरआर/एमजे(एएफपी,एपी,पीटीआई)

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