भारत अफ्रीका फोरम में 40 से ज्यादा राजनेता | दुनिया | DW | 28.10.2015
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दुनिया

भारत अफ्रीका फोरम में 40 से ज्यादा राजनेता

अफ्रीका की विकास चुनौतियों का सामना करने में भारतीय निवेश और तकनीकी किस तरह से मदद कर सकती है, यह भारत अफ्रीका फोरम में चर्चा का प्रमुख मुद्दा है. फोरम में 40 से ज्यादा अफ्रीकी नेता भाग ले रहे हैं.

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पूर्व राजदूत योगेंद्र कुमार से बातचीत

मोजांबिक में भारत सोलर पैनल की फैक्टरी बना रहा है जबकि कैमरून ने भारत से आतंकी संगठन बोको हराम से लड़ने के लिए मदद मांगी है. भारत की वित्तीय और तकनीकी मदद से इथियोपिया प्रमुख गन्ना उत्पादक बन गया है. इस प्रक्रिया में वहां दसियों हजार नौकरियां पैदा हुई है.
नई दिल्ली में गुरुवार से हो रहे शिखर सम्मेलन से पहले फोरम के 54 अफ्रीकी देशों के वाणिज्य और विदेश मंत्रियों ने बैठकों में हिस्सा लिया. शिखर सम्मेलन में 40 से ज्यादा देशों के सरकार या राज्य प्रमुख हिस्सा ले रहे हैं. नई दिल्ली में आईडीएसए की अफ्रीका विशेषज्ञ रुचिता बेरी कहती हैं, "यह दिखाता है कि भारत अफ्रीका के साथ संबंधों को कितना महत्व देता है."
भारत विकास के लिए सहयोग के बदले अफ्रीका के व्यापक प्राकृतिक संसाधनों में हिस्सेदारी चाहता है ताकि वह अपने विकास के लिए उनका इस्तेमाल कर सके. साथ ही उसका मकसद यह भी है कि वह अफ्रीका में चीन के साए में न चला जाए. पिछले सालों में चीन ने अफ्रीकी देशों में सड़क, पुल और बिजलीघर जैसी परियोजनाओं में अरबों डॉलर का निवेश किया है.
भारत अफ्रीकी देशों से मुख्य रूप से संसाधनों और खनिज का आयात करता है. इसमें तेल और कोयले के अलावा जवाहरात और सोना शामिल है. भारत निर्मित दवाओं, गाड़ियों और पेट्रोलियम उत्पादों के लिए अफ्रीका बड़ा बाजार है. पिछले पांच सालों में अफ्रीकी देशों के साथ भारत का कारोबार दोगुना बढ़कर 72 अरब डॉलर हो गया है.

एमजे/आईबी (एपी)

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