भारतीय तोपें पाकिस्तानी सैनिकों की सबसे बड़ी दुश्मन | दुनिया | DW | 19.11.2010
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दुनिया

भारतीय तोपें पाकिस्तानी सैनिकों की सबसे बड़ी दुश्मन

पाकिस्तान ने माना है कि बोफोर्स तोप और मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चरों ने करगिल के जंग में उसकी सेना को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया. जंग में मारे गए 453 सैनिकों में से 190 भारतीय सेना की तोप से छूटे गोलों के शिकार हुए.

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करगिल की जंग में मारे गए पाकिस्तान सैनिकों की आधिकारिक सूची पाक आर्मी ने अपनी वेबसाइट पर लगाई है. सबसे ज्यादा सैनिकों के नाम के सामने मौत की वजह वाले कॉलम में दुश्मन की गोलीबारी लिखा है. भारतीय सैनिकों के साथ सरहदों पर आए दिन होने वाली गोलीबारी में पाक सेना के 160 जवान मारे गए हैं. इन लोगों के नाम के आगे वजह में दुश्मन की कार्रवाई लिखा है. दोनों तरफ से चलने होने वाली गोलीबारी के अलावा 90 लोगों को सीधे गोली मारने की बात भी इसमें दर्ज है. पाक सेना की वेबसाइट के मुताबिक 90 सैनिकों को सीधे गोली मार कर मौत के घाट उतार गया इन लोगों के नाम के आगे दुश्मन की फायरिंग लिखा है.

करगिल के दौरान लड़ाकू विमानों से बम बरसाने वाले भारतीय एयरफोर्स के विमानों ने भी पाक सेना के नियमित जवानों को नुकसान पहुंचाया. करगिल की जंग में पाक सैनिक केवल भारतीय सेना से ही मुकाबला नही कर रहे थे. दुश्मन के रूप में उनके सामने तूफान और ऊंचाई से लुढ़क कर नीचे आती चट्टानें भी थी. इन प्राकृतिक दुश्मनों ने भी पाक सेना के 30 जवानों की जीवनलीला खत्म कर दी. इनमें से एक सैनिक तो बिजली गिरने से मारा गया. सैनिकों के मौत की दूसरी वजहों में हैलीकॉप्टरों का गिरना भी है.

पाकिस्तान आर्मी अब तक करगिल के संघर्ष में अपने नियमित सैनिकों के शामिल होने की बात से इंकार करती रही. हाल ही में उसने चुपके से अपनी वेबसाइट पर शहीद सैनिकों की फेहरिश्त में 453 सैनिकों के नाम जोड़े हैं. ये वो सैनिक हैं जो करगिल की जंग में मारे गए. करगिल की जंग में मारे गए ज्यादातर सैनिक पाकिस्तान की नॉर्दर्न लाइट इंफैंट्री के जवान थे. पहले ये एक अर्द्धसैनिक बल था लेकिन 1999 की जंग में इसका प्रदर्शन देखने के बाद इसे सेना के नियमित रेजिमेंट में बदल दिया गया.

पाकिस्तानी सेना की साइट पर करगिल की जंग में मारे गए जवानों का नाम तो आ गया है लेकिन जंगों के इतिहास वाले हिस्से में करगिल का कहीं नाम नहीं है. इसमें 1948, 1965 और 1971 की जंग की ही विस्तार से चर्चा है.

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः एस गौड़

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