भारतीय एजेंसियों पर मानवाधिकार हनन के आरोप | जर्मन चुनाव 2017 | DW | 17.12.2010
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जर्मन चुनाव

भारतीय एजेंसियों पर मानवाधिकार हनन के आरोप

कश्मीर में भारतीय सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस पर मानवाधिकारों की धज्जियां उड़ाने के आरोप लगे. विकीलीक्स के इस बारे कुछ दस्तावेज जारी किए हैं. इनके मुताबिक भारत में 2002 से 2004 तक कई संदिग्धों तक निर्मम यातनाएं दी गईं.

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विकीलीक्स ने 2005 के कुछ दस्तावेज जारी किए हैं. इन दस्तावेजों में रेड क्रॉस और भारत में स्थित अमेरिकी दूतावास का जिक्र है. पांच साल पहले रेड क्रॉस ने अमेरिकी दूतावास को भारत में होने वाले मानवाधिकार हनन की जानकारी दी. रेड क्रॉस ने कश्मीर और अन्य राज्यों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में संदिग्धों के साथ निर्मम व्यवहार किया जाता है. कश्मीर में ऐसे सैकड़ो मामले सामने आए.

पूछताछ के नाम पर लोगों को करंट लगाया गया. कई लोगों को हिरासत में लेने के बाद फर्श पर लेटाया गया और उन पर भारी रोलर चलाया गया. कई लोगों के पांवों को 180 डिग्री की सीध मे चीर सा दिया गया. प्रताड़ित करने के लिए भारतीय पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां पानी का भी इस्तेमाल करती हैं.

Srinagar, Sicherheitsvorkehrungen vor den Wahllokalen

रेड क्रॉस के मुताबिक साल 2002-2004 के बीच ऐसे कई मामले सामने आए. रेड क्रॉस का कहना है कि इन दो सालों में हजारों लोग प्रताड़ित किए गए. रेड क्रॉस स्टाफ ने हिरासत में लिए गए 1,500 लोगों से बातचीत की. मारपीट और जोर जबरदस्ती के बाद सरकारी एजेंसियों ने इनमें से आधे से ज्यादा लोगों का सही ढंग से इलाज तक नहीं करवाया. ऐसे 852 मामले रेड क्रॉस की नजर में आए. 300 से ज्यादा लोगों ने कहा कि उनके साथ यौन दुर्व्यवहार भी किया गया.

हैरानी की बात है कि यह सब बड़े अधिकारियों की देखरेख में हुआ. विकीलीक्स के दस्तावेजों में कहा गया है, ''पूछताछ के दौरान भारत में सुरक्षा एजेंसियों का यातना देना एक आम बात सी है.''

रिपोर्ट: रॉयटर्स/ओ सिंह

संपादन: आभा एम

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