भविष्य में और सूनामियों के लिए तैयार रहिए | विज्ञान | DW | 03.10.2018
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विज्ञान

भविष्य में और सूनामियों के लिए तैयार रहिए

पिछले बीस सालों में सूनामी विनाश का पर्याय बन गया है. दुनिया के अलग अलग इलाकों में यह तबाही मचाता रहा है. लेकिन रिसर्चर चेतावनी देते हैं कि भविष्य में इस तरह की आपदाएं बढ़ सकती हैं जिनके लिए तैयार रहना होगा.

ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से दुनिया भर में तापमान के साथ साथ समुद्र का जलस्तर भी बढ़ रहा है. शोध दिखाते हैं कि समुद्र के जलस्तर में थोड़ी सी वृद्धि भी सूनामी जैसी आपदाओं के खतरे को बहुत बढ़ा सकती है.

2004 में हिंद महासागर, 2011 में जापान और फिर सितंबर 2018 में इंडोनेशिया में आई सूनामी में हुए विनाश में 'द इम्पॉसिबल' जैसी फिल्मों के दृश्य नजर आते हैं. यह हकीकत है जो लाखों लोगों को अपना शिकार बना चुकी है.

इंडोनेशिया की ताजा सूनामी में लगभग 1,350 लोग मारे गए जबकि इससे पहले जापान में लगभग 16 हजार और हिंद महासागर की सूनामी में सवा दो लाख लोगों की जानें गईं. वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है जिससे सूनामी का असर घातक होता जा रहा है.

अमेरिका के वर्जीनिया टेक संस्थान में भूविज्ञान विभाग के प्रोफेसर रॉबर्ट वाइस ने डीडब्ल्यू को बताया, "हमारा शोध दिखाता है कि समुद्र में जलस्तर का बढ़ना सूनामी के खतरे को बढ़ा सकता है. इसका मतलब है कि आने वाले समय में छोटी सूनामी से भी उतना ही विनाश हो सकता है जितना आज बड़ी सूनामी से होता है."

वाइस उन लोगों में शामिल हैं जिन्होंने 'साइंस एडवांस' पत्रिका में प्रकाशित उस रिपोर्ट को लिखा है जिसमें सूनामी पर बढ़ते जलस्तर के असर की पड़ताल की गई है. स्टडी के लेखकों में शामिल सिंगापुर की अर्थ ऑब्जरवेट्री के एसोसिएट प्रोफेसर एडम स्वित्सर कहते हैं, "इंडोनेशिया के पालू में जिस तरह की सूनामी आई, अब से 50 साल के भीतर उसका परिणाम कहीं खतरनाक होगा क्योंकि दुनिया के उस हिस्से में जलस्तर बढ़ रहा है और जमीन नीचे जा रही है."

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गांव के सामने खड़ा हिमखंड

बहुत समय तक वैज्ञानिक सोचते रहे कि सूनामी और बढ़ते जलस्तर का आपस में कोई संबंध नहीं है. हालांकि इस पर उनकी बराबर नजर थी कि कैसे बढ़ता जलस्तर तूफान जैसी परिस्थितियों में तटों के करीब रहने वाले लोगों को जलमग्न कर सकता है, खास तौर से सोलोमन आईलैंड जैसे निचले इलाकों में. लेकिन ताजा अध्ययन सूनामी पर इसके असर की पुष्टि करता है.

चीन में मकाऊ के इलाके को अभी 'सूनामी से सुरक्षित' माना जाता है. लेकिन अगर जलस्तर अनुमान के मुताबिक बढ़ता रहा तो वह भी सुरक्षित नहीं रहेगा. स्वित्सर कहते हैं, "जो इलाके सूनामी से सुरक्षित हैं और जहां बाढ़ के लिए दो से तीन मीटर ऊंची लहरों की जरूरत पड़ती है, वहां आगे चलकर 1.5 से 2 मीटर ऊंची लहरें ही भारी बाढ़ ला सकती हैं."

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