भविष्य के लिए अहम अफगान स्पेशल फोर्स | दुनिया | DW | 26.08.2014
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दुनिया

भविष्य के लिए अहम अफगान स्पेशल फोर्स

अफगानिस्तान को इराक जैसे हालात से बचाने में अमेरिका से प्रशिक्षित विशेष बल काफी अहम भूमिका निभा सकते हैं. ऐसे सैनिकों को ट्रेनिंग दी जा रही है जो भविष्य में देश की सुरक्षा और जनता में विश्वास बहाली का जिम्मा उठा सकें.

काबुल के बाहर स्थित विशाल सैन्य बेस बंजर पहाड़ियों से घिरा है. यहां कमांडोज को ऑल राउंडर बनने की ट्रेनिंग दी जा रही है. स्पेशल फोर्स के लिए इन जवानों को सेना से चुना गया है. अफगानिस्तान से अमेरिकी फौज की वापसी के बाद इन्हीं जवानों के पास देश की सुरक्षा का जिम्मा होगा. जवानों को अभियानों के लिए योजना बनाने से लेकर उन्हें लागू करना तक की ट्रेनिंग दी जा रही है. शहरी इलाकों में युद्ध अभ्यास, गांवों में गश्त लगाने और एम 4 राइफल चलाने के अलावा क्लासरूम में पाठ पढ़ाए जा रहे हैं.

स्थानीय कमांडो की ट्रेनिंग

रिश खोर गांव के पास "कैंप कमांडो" के बाहर एक ऋंखला में हमर गाड़ियां खड़ी हैं, इनके ऊपर लगी मशीनगन एक संकेत है कि फोर्स का मॉडल अमेरिकी रेंजरों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. 13 साल तक तालिबान से लड़ने के बाद नाटो फौजें अफगानिस्तान से रवाना होने वाली है, ऐसे में ध्यान स्थानीय सुरक्षाबलों पर दिया जा रहा है, जिनके ऊपर राष्ट्रव्यापी अस्थिरता से जूझने का जिम्मा होगा.

स्पेशल फोर्स के कमांडर जनरल सैयद अब्दुल करीम के मुताबिक, "हमारे पास बेहतर योजना है, बढ़िया उपकरण और बढ़िया हथियार हैं, इसलिए हम इस बारे में नहीं सोचते हैं नाटो हमारा पार्टनर नहीं होगा. हो सकता है कि हमें कोई परेशानी हों, लेकिन हमने पहले ही अपने सैनिकों को परख लिया है और वे बहुत उच्च मनोबल वाले हैं. हमारी भूमिका हर जगह ऑपरेशन संचालन करने की है जहां हमें विद्रोहियों का जोखिम है." लेकिन इस आत्मविश्वास के बावजूद 11,500 सदस्यीय कमांडो फोर्स को लेकर गंभीर चिंताएं हैं. खासकर हवाई समर्थन की कमी जो गंभीर रूप से उनकी गतिशीलता को सीमा में बांध देते हैं.

अमेरिकी सेना की विरासत

पूर्व सैन्य अधिकारी और विश्लेषक अतिकुल्ला अमरखिल कहते हैं, "अफगान स्पेशल फोर्स अमेरिकी स्पेशल फोर्स के अनुयायी हैं, जिनके हाथ उन्हीं की तरह खून से सने नजर आते हैं. उन्हें सर्वश्रेष्ठ लोगों के बीच से चुना जाना चाहिए था, लेकिन ऐसे कई मामलों में कबीलाई सरदारों ने अपने लड़ाकों को स्पेशल फोर्स में दाखिल करा दिया. इसलिए यह भी हो सकता है कि उनके वफादार सरकार के साथ नहीं है."

अमरखिल का यह भी कहना है कि हेलिकॉप्टरों की कमी कमांडो की तैनाती की क्षमता को कम कर देता है जब पुलिस और सेना को उनकी ज्यादा जरूरत होगी. वे कहते हैं, "उनके पास प्रभावशाली हवाई समर्थन की कमी है, जिस पर अमेरिकी सुरक्षा बल भरोसा करते हैं. साथ ही साथ निगरानी और खुफिया जानकारी इकट्ठा करने के मामले में भी वह कमजोर हैं."

जनरल करीम इस बात को मानते हैं कि कमांडो कैंप में हेलिकॉप्टर नहीं हैं, लेकिन जोर देकर कहते हैं कि एक हेलिकॉप्टर जल्द तैनात किया जाएगा और साथ ही कहते हैं कि हवाई मदद स्पेशल फोर्स के लिए तेजी से सुधर रही है. कमांडो के कथित बुरी छवि के बारे में वे बात करने से बचते हैं. उसके बजाय जोर देते हैं कि सभी कमांडो को नागरिकों की इज्जत करने के बारे में सिखाया गया है.

इस साल के अंत तक नाटो के सभी सैनिकों की अफगानिस्तान से वापसी होने जा रही है. हालांकि कुछ अमेरिकी स्पेशल फोर्स वहां बने रहेंगे और अलकायदा के खिलाफ समझदारी के साथ हमले भी जारी रखेंगे. कैंप के पास रहने वाले स्थानीय लोगों के लिए कमांडो की मौजूदगी सुरक्षा की गारंटी होगी.

एए/एमजे (एएफपी)

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