भड़के इस्राएल ने ग्रास पर प्रतिबंध लगाया | दुनिया | DW | 08.04.2012
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दुनिया

भड़के इस्राएल ने ग्रास पर प्रतिबंध लगाया

इस्राएल ने जर्मन नोबेल पुरस्कार विजेता लेखक गुंटर ग्रास की विवादास्पद कविता से नाराज होकर उन्हें अवांछित व्यक्ति घोषित कर दिया है. ग्रास के इस्राएल आने पर रोक लगा दी गई है. जर्मनी में भी उनकी आलोचना जारी है.

इस्राएल के गृह मंत्री एली जीशाई ने गुंटर ग्रास के इस्राएल आने पर रोक की घोषणा करते हुए कहा है, "मैं पवित्र देश में उनके आने पर रोक लगाने को सम्मान समझता हूं." इस्राएल के नजरिए से अपनी इस्राएल विरोधी कविता के साथ 84 वर्षीय बहुमुखी प्रतिभा के लेखक ने लक्षमण रेखा पार कर ली है. गृह मंत्री जीशाई अत्यंत धार्मिक शास पार्टी के हैं और उनका कहना है कि बुद्धिजीवी ग्रास अपने विचारों के साथ पूरी तरह नाजी के दर्जे पर पहुंच गए हैं. जीशाई ने कविता में ग्रास द्वारा व्यक्त भावनाओं की तुलना यहूदीवाद विरोध से की जिसका नतीजा नरसंहार के रूप में सामने आया. उन्होंने ग्रास का नोबेल पुरस्कार वापस लेने की मांग करते हुए कहा, "ऐसे शब्दों की वजह से चुप भी नहीं रहा जा सकता." जीशाई ने ग्रास को "यहूदी विरोधी" और "एसएस यूनिफॉर्म पहनने वाला व्यक्ति" बताया.

इस्राएल में बहुत से लोग यह भी आरोप लगा रहे हैं कि ग्रास की कविता का यहूदी पेसाच महोत्सव से ठीक पहले प्रकाशित होना कोई संयोग नहीं है. उनका कहना है कि इसके साथ ग्रास उन ईसाई यहूदी विरोधियों की श्रेणी में चले गए हैं जो यहूदियों पर धार्मिक अनुष्ठानों के लिए हत्या का आरोप लगाते रहे हैं. ग्रास की इस चेतावनी को भी इसी तरह बेतुका बताया जा रहा है कि इस्राएल विश्व शांति के लिए खतरा है.

Günter Grass in Israel

इस्राएल में गुंटर ग्रास

विदेश मंत्री अविग्डोर लीबरमन ने इटली के प्रधानमंत्री मारियो मोंटी से भेंट के दौरान आरोप लगाया है कि ग्रास का बयान पश्चिमी बुद्धिजीवियों के इस सनक को दिखाता है जो प्रचार और किताब बेचने के लिए यहूदियों को एक बार फिर पागल विरोधियों की बलि चढ़ाने को तैयार हैं. इस्राएल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू ने ग्रास की आलोचना की है.

यह पहला मौका नहीं है जब इस्राएल ने आलोचना की सजा आने पर रोक लगाकर दी है. दो साल पहले अमेरिका के यहूदी लेखक नोआम चोम्स्की को इस्राएल ने देश के अंदर घुसने से रोक दिया था. पिछले साल इस्राएल की सरकार सैकड़ों फलीस्तीन समर्थक कार्यकर्ताओं को वेस्ट बैंक जाने से रोका. 2010 में आयरलैंड की नोबेल पुरस्कार विजेता मायरे मैग्वायर को एक सप्ताह तक हिरासत में रखने के बाद देश से निकाल दिया गया था. वे इस्राएली और फलीस्तीनी शांति कार्यकर्ताओं से मिलने गई थीं.

पिछले बुधवार को जर्मन दैनिक ज्यूड डॉयचे त्साईटुंग में प्रकाशित अपनी कविता में 84 वर्षीय गुंटर ग्रास ने 'जो बात बोली जानी चाहिए' नामक इस कविता में 84 वर्षीय ग्रास ने ईरान पर इस्राएल के संभावित हमले पर चेतावनी दी है और कहा है कि इससे तीसरा विश्व युद्ध शुरू हो सकता है. ग्रास का कहना है कि उन्होंने यह कविता बर्लिन द्वारा इस्राएल को पनडुब्बी बेचे जाने के बाद लिखी जिससे परमाणु हथियार छोड़े जा सकते हैं और जिनका इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए किया जा सकता है.

ग्रास ने इस्राएल और ईरान दोनों के परमाणु कार्यक्रमों की अंतरराष्ट्रीय निगरानी की मांग की है. इस्राएल ने कभी स्वीकार नहीं किया है कि उसके पास परमाणु हथियार हैं, लेकिन वह ईरानी परमाणु हथियार से खतरा महसूस करता रहा है. ईरान ने बार बार इस्राएल के अस्तित्व पर सवाल उठाए हैं और उसे नष्ट करने की धमकी दी है.

जर्मनी में भी ग्रास की आलोचना जारी है. जर्मन विदेश मंत्री गीजो वेस्टरवेले ने एक लेख में कहा है, "इस्राएल और ईरान को नैतिक रूप से समान स्तर पर रखना बौद्धिक नहीं बेतुका है." वेस्टरवेले का कहना है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम की निगरानी में पूरा सहयोग करने से सालों से इनकार कर रहा है. उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु ऊर्जा के नागरिक इस्तेमाल का हक है लेकिन उसे परमाणु हथियार बनाने का हक नहीं है. जर्मन विदेश मंत्री ने कहा, "जो उससे पैदा होने वाले खतरे को नकारता है, वह हकीकत को झुठला रहा है."

गुंटर ग्रास को 1959 में लिखे गए उनके उपन्यास द टिन ड्रम के साथ अंतरराष्ट्रीय ख्याति मिली. अपने लंबे करियर में ग्रास सामाजिक मुद्दों पर बेबाक राय देने वाले लेखक के रूप में जाने जाते रहे हैं. उन्हें 1999 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला. 2006 में छपी अपनी आत्मकथा में उन्होंने पहली बार स्वीकार किया कि वे नाजियों की कुख्यात अर्द्धसैनिक टुकड़ी एसएस के सदस्य रह चुके हैं.

रिपोर्ट: महेश झा (डीपीए, रॉयटर्स)

संपादन: ओ सिंह

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